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“मॉब लिंचिंग” दुर्दांत और भयानक है यह सब रुकना चाहिए: अमन की पहल

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय  NAPM ने मॉब लिंचिंग के की घटनाओं को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए कुछ ज़रूरी सुझाव रखे गए हैं जो इस प्रकार है –

मॉब लिंचिंग पर सरकार की ढुलमुल नीतियों का नतीजा है कि मुंबई से 125 किमी दूर पालघर में यह भयानक घटना हुई है। गढ़चिंचले गांव के पास हत्यारी भीड़ ने दो साधुओं और एक कार चालक को कार से खींच कर मार डाला। इनमें से एक 70 वर्षीय महाराज कल्पवृक्षगिरी थे। उनके साथी सुशील गिरी महाराज और कार चालक निलेश तेलग्ने भी भीड़ की चपेट में आ गए।

हम इस भीड़ तंत्र का पूरी तरह विरोध करते हैं। दो असहाय वृद्धों को महाराष्ट्र में भीड़ ने हत्या की ! हम उसकी पूरी तरह से निंदा करते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने तुरंत कार्यवाही करके 100 लोगों को गिरफ्तार किया है। उन पर 302 का मुकदमा दर्ज किया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के गृह मंत्री को भी उन्होंने बात की है।  साथ ही उन्होंने घटना को सांप्रदायिक रंग देने वालों को भी कड़ी चेतावनी दी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के इस कदम का सम्मान करते हैं। 

अमन की पहल के हम सब साथी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हैं। हम मांग करते हैं कि तुरंत केंद्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय की आदेश के अनुसार मॉब लिंचिंग पर कठोर कानून बनाए।  2014 के बाद मॉब लिंचिंग की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ी है। अखलाक की हत्या से लेकर पहलू खान, 2017 में ईद के मौके पर रोजे के दौरान ही युवक जुनैद को चलती गाड़ी में चाकुओं से गोदकर मार देना, उत्तर प्रदेश के हापुड़ में कासिम को युवाओं द्वारा मारना और चारों तरफ से छोटे-छोटे बच्चे द्वारा भी खड़े होकर देखना व वीडियो बनाना, दिल्ली में अंकित सक्सेना की प्रेम विवाद के चलते हत्या करना, झारखंड में रात भर एक युवक को खंभे से बांधकर मरने तक मारे जाना और भी अनेक घटनाएं हुई है। 

झारखंड के रामगढ़ जिले में बीती रात असामाजिक तत्वों के द्वारा राजू अंसारी पर जानलेवा हमला किया गया ।  वह 8:00 बजे रात ससुराल से वापस घर जा रहा था। कुछ असामाजिक तत्वों ने उसे रोककर उसका नाम पूछा मुस्लिम नाम सुनकर उस पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए और बड़ी बेरहमी से पिटाई की और निर्वस्त्र करके पूरा मोहल्ला घुमाया गया यह बहुत ही शर्मनाक और दर्दनाक घटना है।

इन घटनाओं का सिलसिला बहुत लंबा, दुर्दांत और भयानक है

यह सब रुकना चाहिए। सरकार को और समाज को यह देखना होगा कि हम प्रजातंत्र में चुनी हुई सरकार और बनाए हुए नियम कानूनों के तहत रह रहे हैं। भीड़ को यह कोई अधिकार नहीं कि वह चोरी के, गौ हत्या के या किसी भी अन्य शक की बिना पर किसी को भी मार दे। जरूर अब तक कानून की पालना कराने वाला स्थानीय शासन-प्रशासन इसके लिए दोषी है। खासकर हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, झारखंड वह अन्य कई राज्यों में इस तरह की घटनाओं को सख्ती से नहीं रोका गया। बल्कि मीडिया भी इसमें शामिल होकर बढ़ावा देता रहा है। उसका ही नतीजा है कि दो वृद्ध इंसानों को इस तरह मार दिया गया।
उद्धव ठाकरे सरकार ने इस पर सख्त कार्यवाही की है। हम उनका पुनः धन्यवाद देते हैं। क्योंकि ऐसा अन्य किसी राज्य में अभी तक नहीं हुआ है। साथ ही उनसे अपेक्षा करते हैं कि गोविंद पंसारे और नरेंद्र दाभोलकर के हत्यारों को भी इसी तत्परता से पकड़ा जाए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित तमाम मुख्यमंत्रियों से भी निवेदन करते हैं कि उनके राज्य में अब तक जो भी मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं। उसके दोषियों को वह निष्पक्ष जांच के सामने लाएं और उन्हें कठोर सजा दें। देश के गृहमंत्री इस पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार कानून बनाए। जब तक संसद नहीं है सरकार अधिसूचना लाए। देश में ये स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि कानून को हाथ में लेने का किसी भी जाति, धर्म, भाषा से संबंधित व्यक्ति या समाज को नहीं है। भारतीय समाज को हम दुर्दांत समाज नहीं देखना चाहते।

देश भर के जन आंदोलनों के सभी साथियों तरह अमन की पहल के साथी भी कोविद-19 की महा विपत्ति के समय लॉक डाउन में फंसे मजदूरों वह अन्य जरूरतमंदों को कच्चा राशन पहुंचाने में लगे है। सरकार को भी लगातार सुझाव व सहयोग दे रहे हैं। ऐसे में इस घटना से हम बुरी तरह आहत हैं।

भविष्य में इन घटनाओं को तुरंत रोकने की जरूरत है जिसके लिए

1-देश के गृहमंत्री मॉब लिंचिंग पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल रिट पिटिशन नंबर 257/ 2016 के निर्देशानुसार कानून बनाए। अधिसूचना जारी करे। इसकी की मांग लगातार देश में उठी है। https://www.indialegallive.com/constitutional-law-news/supreme-court-news/mob-lynching-loopholes-in-the-law-70241 

2-हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, झारखंड व तमाम मुख्यमंत्रियों से भी निवेदन करते हैं कि उनके राज्य में अब तक जो भी मॉब लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं उसके दोषियों को वह निष्पक्ष जांच के सामने लाएं और उन्हें कठोर सजा दें।

2- इन घटनाओं के संदर्भ में मीडिया पर वक्त अंकुश के लिए कड़े कायदे कानून बने। जिसके पालन के लिए सख्ती बरती जाए। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया इस पर तुरंत संज्ञान ले।

3- घटना का धार्मिक व राजनीतिक कारण ना किया जाए।

अब्दुल रशीद अगवान, मोहम्मद यूनुस, जितेंद्र, मोहसिन खान, मजहर खान, विमल भाई, मकसूद उल हक, तारिणी

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समंवय की ओर से समर्थन में।

संजीव ढांडा व मधुरेश – दिल्ली; अरुंधति धुरू व रिचा – उत्तर प्रदेश; सुहास कोल्हेकर व बिलाल खान – महाराष्ट्र ; कृष्ण कांत- गुजरात; समर बागची – बंगाल

 

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