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मैं कोई देवी बनूँगी : फातिमा नावूत

नवरात्र में आज से नौ दिनों तक आप के लिए नौ कवयित्रियों की कविताएँ.
प्रथम दिवस पर फातिमा नवूत की कविता “मैं कोई देवी बनूँगी”

मैं निर्वसन कर दूँगी ग्लोब को
मानचित्र को धूल-धूसरित
इतिहास की पांडुलिपियों को
पटक आऊँगी किसी और ठौर

तथा अक्षांश व देशांतरों की लकीरों को पोंछकर
पृथ्वी को कर दूँगी सीमाओं से विमुक्त।

मैं बराबर-बराबर बाँट दूँगी –
पहाड़ , झरने, सोना, पेट्रोल, जलवायु और बादल।

तत्पश्चात
थके – माँदे चेहरों पर फिराऊँगी अपने पंख
क्योंकि सफ़ेद, काले और पीले रंगों को पिघलाकर
मुझे गढ़नी है खूबानी के रंग वाली एक अलहदा नस्ल।

मैं परे कर  दूँगी  बोलियों,
भाषाओं और ज़ुबानों को
और उन्हें अपनी दवात में घोलकर बदल दूँगी एक उजले शब्दकोश में
जिसमें बुरे और बेहूदे शब्दों के लिए
नहीं होगी जरा – सी भी कोई जगह ।

मैं नियन्त्रित करूँगी सूरज का कोण
भूमध्य रेखा की सार – सँभालकरूँगी

थोड़ा सुधारूँगी बारिश के तंत्र को
और उसे बनाऊँगी न्यायसंगत।

मेरे अनुयायी सराहना करेंगे
जब मैं फीता काटूँगी नई दुनिया का :
( साक्षी होंगे ! )
स्पार्टाकस, गोर्की, ग्वेवारा।

हकलाहट से भर जाएगी मेरी वाणी
जब प्रसन्न्ता से अभिभूत हो
इस संसार की वास्तुकला पर मैं करूँगी अपना काम।

अभी तो
तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत में
एक क्षण के लिए रुक कर देखती हूँ सब कुछ
और उदास होकर
बनी रहने देती हूँ
इस दुनिया को उसकी पहले वाली शक्ल में –
यथावत
पूर्ववत।

मिस्र में रहने वाली अरबी भाषा की  कवि और अनुवादक फातिमा नावूत का जन्म 1964 में हुआ. फातिमा आइन शम्स विश्वविद्यालय, काहिरा  (मिस्र) से आर्कीटेक्चर में ग्रेजुएट हैं . उनकी दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें से पाँच कविता संग्रह हैं और बाकी अनुवाद व आलोचना  का महत्वपूर्ण काम है. फातिमा कई महत्वपूर्ण साहित्यिक संस्थाओं जैसे ईजिप्ट राइटर्स यूनियन, पोएट्स ऒफ द वर्ल्ड , ईजिप्शियन वीमेन राइटर्स  यूनियन आदि से जुड़ी़ हुई हैं.

उनकी चर्चित किताबों में ‘अ बॊटल ऒफ ग्लू (कविता संग्रह ) और  ‘राइटिंग विद चॊक’ (आलोचना) के साथ जॊन रावेन्सक्राफ्ट व वर्जीनिया वुल्फ के कथा साहित्य के अनुवाद  का उल्लेख किया जा सकता है.

मूल  कविता का अंग्रेज़ी से अनुवाद किया है कर्मनाशा ब्लॉग के श्री सिद्धेश्वर सिंह ने. मैं आभारी हूँ सिद्धेश्वर जी का जिन्होने यह कविता और कवि परिचय उपलब्ध करवाया है. यह पूर्व में मेरे ब्लॉग में प्रकाशित हो चुका है.

कविता : फातिमा नावूत
अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह
प्रस्तुति : शरद कोकास

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