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मुस्तैद बिलासपुर पुलिस : ढाई साल में चालान पेश नहीं, आरोपी ASI महरबान है विभाग

Written by Anuj Shrivastava / 9752319680

बिलासपुर। बिलासपुर में पदस्थ ASI शैलेंद्र सिंह पर 4 मई 2018 को बीजापुर की एक आदिवासी लड़की को दो साल तक अपने घर पर बंधक बनाए रखने के आरोप में एट्रोसिटी और किडनैपिंग जैसी गंभीर धाराओं में FIR  दर्ज हुई थी। मामला दर्ज हुए अब कुछ समय में तीन साल होने को हैं। घटना को लेकर दो अलग अलग मामले दर्ज हुए हैं एक मामला पीड़ित लड़की की शिकायत पर और एक मामला लड़की के पिता की शिकायत पर। पीड़ित लड़की को जब आरोपी ASI के घर से रेस्क्यू किया गया और शिकायत दर्ज हुई तब लड़की के पिता बेटी को लेने बीजापुर से बिलासपुर आए। लड़की के पिता को ASI शैलेन्द्र सिंह ने जबरदस्ती अगवा कर लिया था, उसे डराया धमकाया और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया।

तमाम गवाह और सबूत मौजूद होने के बावजूद पहले मामले में चार्जशीट प्रस्तुत करने में पुलिस को डेढ़ साल से ज़्यादा का समय लगा था। कुछ समय में घटना को 3 साल होने वाले हैं लेकिन हमारी मुस्तैद पुलिस आजतक पिता की शिकायत पर चालान प्रस्तुत नहीं कर पाई है।

जब लड़की को छुड़ाया गुया तब उसकी दोनों आँखे लात से मारने के कारण खून सी लाल सूजी हुई थीं और डंडे से मारे जाने की वजह से एक ऊँगली टूट कर टेढ़ी हो गई थी। ये सब होता रहा छत्तीसगढ़ की न्यायधानी कहे जाने वाले बिलासपुर शहर में। जिस घर में  पीड़िता को बंधक बना कर रोज़ बेरहमी से पीटा जाता था उस घर से 10 मिनट की दूरी पर एक तरफ़ पुलिस स्टेशन है और लगभग 15 मिनट की दूरी पर दूसरी ओर छत्तीसगढ़ का हाईकोर्ट है। इस बात से छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की स्थिति, पुलिस की भूमिका और प्रदेश के न्यायिक महकमों के लचरपन का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।ASI shailendra singh

संक्षिप्त में जान लीजिए कि मामला क्या है

बीजापुर की आदिवासी लड़की को पढ़ाने और काम दिलाने का झांसा दे कर पुलिस विभाग का ASI शैलेंद्र सिंह बिलासपुर लाकर अपने घर में बंधक बनाकर बलात काम करवाता था। पुलिस अधिकारी का साला व उसकी पत्नी लड़की के साथ बेरहमी से मारपीट भी करते थे। ASI शैलेन्द्र सिंह बिलासपुर से पहले दंतेवाड़ा में पोस्टेड था। दांतेवाड़ा में भी ASI शैलेंद्र सिंह पर बच्चों को बंधक बनाने का आरोप लगा था लेकिन तब इसने मामला रफा-दफ़ा करवा लिया था। शैलेंद्र सिंह की पत्नी शशिप्रभा सिंह उसी इलाके में शिक्षिका थीं।

2017 में ASI शैलेंद्र सिंह का ट्रांसफ़र बिलासपुर के सिविल लईन थाने में हुआ। अपने ट्रांसफ़र के समय बीजापुर के एक ग़रीब मजदूर सन्नु पुनेम की बेटी को वो ये कह कर साथ ले आया कि बिलासपुर में उसे पढ़ाएगा, नए कपड़े दिलाएगा और हर महीने 3000 रूपए भी देगा जिसके बदले में उसे उसके बच्चों की थोड़ी देखभाल मात्र करनी होगी। भरोसा जीतने के लिए शुरुआत के 2 महीने उसने पैसे भेजे भी। फिर ये सिलसिला बंद हो गया।

इस बीच पीड़िता के साथ आए दिन मारपीट होने लगी। पीड़िता ने वापस बीजापुर पिता के पास जाने की इच्छा जताई और एक बार भाग कर अपने घर जाने की कोशिश भी की। तब उसे फिर बेरहमी से पीटा गया और चोरी के इल्ज़ाम में जेल भेज देने की धमकी देकर डराया भी गया।

डरी सहमी लड़की कुछ न कर पाई। इस बीच लड़की के पिता और घर वालों ने कई बार ASI को फ़ोन किया और लड़की से बात करने की इच्छा ज़ाहिर की, ये भी कहा कि हमें उसकी बहुत याद आती है उसे घर भेज दीजिये परन्तु ASI हमेशा कोई बहाना बना कर टाल दिया करता था उसने घर वालों से लड़की की कभी भी बात नहीं करवाई।

बिलासपुर में ASI के पड़ोसियों को पीड़िता की हालत का थोड़ा-बहुत अंदाज़ा तो था लेकिन पुलिस वाले के ख़िलाफ़ बोलने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा था। दो साल बाद 29 अप्रैल 2018 को आरोपी शैलेन्द्र सिंह ने हेमलता नाम की महिला को खाना बनाने के काम के लिए अपने घर पर नौकरी में रखा। हेमलता को पीड़ित लड़की की हालत पे तरस आया और उसने मोहल्लेवालों की मदद से महिला हैल्पलाइन नंबर 181 पर मामले की सूचना दी। तब सखी वन स्टॉप सेंटर, पुलिस व सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला आदि की संयुक्त टीम ने पीड़िता को ASI शैलेन्द्र सिंह के घर से घायल अवस्था में छुड़ाया।

एक अहम बात ये भी है कि बस्तर में जब सलवा जुडूम का आतंक था तब बड़ी मात्रा में हुई हिंसा और आगज़नी में बीजापुर के गंगलूर में पीड़ित लड़की का भी घर था जो जला दिया गया था। वो बेघर हो गए और दूसरी जगह रहने लगे। सरकार ने मदद के नाम पर तो कभी कुछ किया नहीं उलटे ये एक नया मामला निकल आया।

आज सुबह पीड़िता के परिवार वाले पुलिस के बुलाने पर बिलासपुर अजाक थाना पाहुचे हुए थे। परिवार वाले पुलिस के इस ढुलमुल रवैये से बहुत निराश नज़र आ रहे थे।

लड़की के पिता का बयान :-

“मैं सन्नु पुनेम पिता पंडू पुनेम, लड़की का पिता आपको बताना चाहता हूं कि पिछले कुछ दिनों में हमारे साथ क्या क्या हुआ। मैं बीजापुर का रहने वाला हूं और बहुत ग़रीब हूं मजदूरी का काम करता हूं। करीब दो साल पहले मैंने अपनी बेटी को ASI शैलेन्द्र सिंह और उनकी पत्नी शशि सिंह के साथ बिलासपुर भेजा था। उन्होंने कहा था कि मेरी बेटी को पढ़ाएंगे उसे कपड़े दिलवाएंगे और घर के कामों के एवज में तीन हज़ार रूपए हर महीने वेतन के रूप में भी देंगे। हमें हमारी बेटी की बहुत याद आती थी, हम जब भी उससे बात कराने को कहते तो ASI साहब हर बार कुछ बहाना बना देते थे। फिर एक दिन अचानक उनका फ़ोन आया, उन्होंने कहा कि कल आकर बेटी को ले जाओ। हम बस से बिलासपुर के लिए निकले। बिलासपुर के नया बस स्टैंड में ASI शैलेन्द्र सिंह उनकी पत्नी शशि शिंह और उनका साला स्कोर्पियो जैसी किसी गाड़ी में हमें लेने आए। हमें किसी होटल में ले गए। मैंने उनसे कहा कि मुझे पहले बेटी से मिलना है उसे देखने के बाद ही हम कहीं जाएंगे, साहब ने कहा कि सखी सेंटर वाली मैडम ने उसे बहला फुसला कर कहीं रख लिया है इसलिए बाद में मिलवाएंगे। फिर वो हमें एक गाँव में वकील के ऑफिस जैसे किसी कमरे में ले गए वहां स्टाम्प पेपर में हमसे अंगूठा लगवाया हमारा मोबाईल भी छीन लिया न वो कुछ बता रहे थे न हमें किसी से बात करने दे रहे थे। मैं अपनी बेटी के बारे में सोच कर बहुत डर गया था। मैंने फिर ASI साहब से पूछा कि बेटी से कब मिलवाएंगे उन्होंने कहा कि जब केस का निपटारा हो जाएगा तो लड़की को तुम्हारे साथ भेज देंगे। मैं अनपढ़ हूं इसलिए मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ये किन कागज़ों पर अंगूठा लगवा रहे हैं, किस केस के ख़त्म होने की बात कर रहे हैं और ये भी कि मालूम नहीं मेरी बेटी किस हाल में होगी। मैंने सोचा पुलिस वाला है तो अच्छा आदमी होगा इसलिए बेटी को उसके साथ भेज दिया था।”

ये उस आवेदन पत्र का अंश है जो पीड़िता के पिता ने बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक को मदद की गुहार लगाते हुए लिखा था।

पिता के द्वारा की गई FIR …

पड़ोसियों ने कहा आदतन अपराधी हैं ASI दंपत्ति

ASI shailendra singh
बिलासपुर के सिविल लाईन थाने में पदस्थ आरोपी ASI शैलेन्द्र सिंह जो कुछ समय के लिए निलंबित थे पर बाद में उन्हें फिर से उसी थाने मे बहाल कर दिया गया, उनकी पोस्टिंग इससे पहले बीजापुर और दंतेवाड़ा क्षेत्र में थी, उनकी पत्नी शशिप्रभा सिंह जो अब शायद बिलासपुर के पास चकरभाठा में शिक्षाकर्मी हैं वो भी इससे पहले दंतेवाड़ा क्षेत्र में ही शिक्षिका के पद पर पदस्थ थीं। ASI दंपत्ति उस पूरे इलाके में अपनी इसी आपराधिक प्रवृत्ति के कारण बदनाम थे। ये कहना है दंतेवाड़ा की सुरभि कालोनी के लोगों का जहां ASI दंपत्ति रहा करते थे।

सुरभि कालोनी में ASI दंपत्ति के पड़ोसी रहे डॉ.पंडा ने बातचीत में हमें बताया कि दंतेवाड़ा के अपने घर में भी इन्होने 2 बच्चों, सूरज और सविता को बन्धक बना रखा था उन्हें भी इसी तरह छुड़ाया गया था इसके अलावा ASI ने अपने सास-ससुर के घर भी कुछ बच्चों को बंद कर रखा था जिन्हें बाद में छुड़ाया गया। ऐसी भी खबर मिली कि ASI की पत्नी शशिप्रभा सिंह ने फ़र्जी प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी प्राप्त की थी उस मामले में उसे दोषी पाया गया था और पद से निलम्बित कर दिया गया था। दोबारा भर्ती निकलने पर उसने फिर आवेदन किया और नौकरी प्राप्त कर ली। इस दोबारा मिली नौकरी पर भी लोगों ने घपले की आशंका ज़ाहिर की लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। दंतेवाड़ा में बोर्ड परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक करने के मामले में भी इनका नाम शामिल होने की बात कही गई थी। पर सैंय्या भए कोतवाल तो डर काहे का, कोई कारवाई नहीं हुई और नतीजा वही ढाक के तीन पात ही रहा। शिकायत पहले भी होती रही है लेकिन कभी भी कोई कारवाई नहीं की गई।

अपने अधिकारी पर कारवाई से बच रही है पुलिस

महिला थाना की अधिकारी दुर्गा किरण ने पीड़ित लड़की का बयान दर्ज किया, पीड़िता ने पुलिस और मीडिया के सामने ASI दंपत्ति की करतूत सुनाई, ये भी साबित हुआ कि लड़की को लेने आए उसके पिता सन्नु पुनेम को भी ASI ने 3 दिनों तक अगवा रखा और ज़बरदस्ती कागज़ों पर अंगूठा लगवाया, बावजूद इसके पुलिस ASI शैलेन्द्र सिंह के मामले में लगभग 2 साल 7 महीने से भी ज़्यादा का समय बीत जाने के बाद भी चालान तक पेश नहीं कर पाई है। अब तक चालान पेश नहीं होने केकारण पूछने पर पुलिस तरह तरह के बहाने बनाती नज़र आई।

परिवार को मिल रही थीं केस वापस लेने की धमकियां

पीड़िता के परिवार वालों ने बताया कि उस दौरान उन्हें केस वापस लेने के लिए कई बार धमकी भरे फ़ोन आ रहे थे। कुछ लोग उनके घर तक भी गए ये समझाइश देने के लिए कि केस वापस लेने में ही उनकी भलाई है। हमसे बात करते हुए पीड़िता के पिता, बहन और उसके जीजा ने साफ़ शब्दों ये कहा कि उनपर केस वापस लेने का दबाव लगातार बनाया जाता रहा है। ये बात पुलिस को भी बताई गई लेकिन पुलिस विभाग मूक दर्शक बना सब देखता रहा, मानो अपराधी को बढ़ावा दे रहा हो कि डरो नहीं, और कुछ बच्चों को बंधक बनाओ, विभाग तुम्हारे साथ है।

हम हेमलता के शुक्रगुज़ार हैं

29 अप्रैल यानि मामला उजागर होने के 5 दिन पहले ASI शैलेन्द्र सिंह ने सीपत क्षेत्र की रहने वाली हेमलता पटेल को अपने घर पर खाना बनाने का काम करने के लिए रखा था। हेमलता ने पीड़ित लड़की को घायल अवस्था में देखा उससे चोट लगने का कारण पूछा। लड़की ने उसे शैलेन्द्र सिंह व उसकी पत्नी शशि द्वारा झांसा देकर बिलासपुर लाने और बंधक बनाकर पीटने की पूरी कहानी बताई। हेमलता ने हमें बताया कि उसने लड़की के साथ मारपीट होते हुए अपनी आँखों से देखा है। हेमलता ने पड़ोस में रहने वाले लोगों की मदद से ये जानकारी राज्य महिला आयोग और महिला हैल्पलाईन नंबर 181 पर दी। महिला हैल्पलाईन की टीम सखी सेंटर की अधिकारी मिनाक्षी पाण्डेय के साथ पुलिस को लेकर ASI शैलेन्द्र सिंह के घर पहुँची जहां बाहर से ताला लगा हुआ था। पीड़ित लड़की को घर के एक बंद कमरे से बरामद किया गया। उसके चहरे और हांथ-पैर में गहरी चोट के निशान मिले। पीड़िता ने सखी सेंटर और पुलिस के सामने अपना बयान दिया। ASI दंपत्ति की पूरी करतूत उसने बताई, वापस घर जाने की इच्छा जताई और दो साल का अपना मेहनताना भी मांगा।

जो काम मोहल्लेवालों को बहुत पहले कर देना चाहिए था, हम तारीफ़ भी करते हैं और शुक्रगुज़ार भी हैं के हेमलता ने वो काम कर दिखाया। हेमलता ग़रीब महिला हैं उनके आगे पीछे कोई नहीं है। जब ये घटना हुई तब उनके पास सिर्फ़ वही एक नौकरी थी जीवनयापन के लिए। वो चाहतीं तो बाकियों की तरह ही चुप रहती लड़की को पिटता देखती कुछ न कहती। पर हेमलता ने ऐसा किया नहीं। उसने देश और इंसानियत के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझी और उसे निभाया भी। इस बात के लिए उस समय के बिलासपुर पुलिस अधीक्षक ने भी हेमलता की तारीफ़ की थी और उसे ईनाम देने की घोषणा की। हालांकि कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि ये घोषणा भी पूरी नहीं हुई।

मानव तस्करी की धरा जोड़ी जानी चाहिए थी

पीड़िता की वकील प्रियंका शुक्ला का ये कहना है कि “इस मामले में मानव तस्करी की धरा जोड़ी जानी चाहिए थी लेकिन हमारे बार-बार बोलने के बाद भी ये धरा नहीं जोड़ी गई। पीड़िता का बकाया मेहनताना देने में भी लापरवाही की जा रही है”।

ये किसी बीहड़ की नहीं ज़िला मुख्यालय की घटना है

1 मई 2007, दो नए ज़िले बने, दंतेवाड़ा से अलग होकर बना बीजापुर ज़िला। ये शहर इस ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। इन ज़िलों में आदिवासियों की बेहतरी के लिए पूरा का पूरा पृथक मंत्रालय काम करता है। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर आदि ज़िलों में रिकॉर्ड मात्रा में सुरक्षाबल तैनात हैं नक्सलियों से लड़ने और आदिवासियों की सुरक्षा के लिए। पिछले चुनावों के दौरान अपनी बातों से हवाओं का रुख़ बदल देने की क्षमता रखने वाले माननीय प्रधानमन्त्री महोदय भी इन इलाकों के दौरे पर आए थे। यहां से लेजाकर जिस जगह पीड़ित लड़की को बंधक बनाया गया वो बिलासपुर शहर भी ज़िला मुख्यालय है प्रदेश का हाईकोर्ट इसी शहर में है। इतना विस्तृत विवरण इसलिए लिख रहा हूं ताकि आपको थोड़ा सा अंदाज़ा लग जाए कि ये घटना किसी ऐसे बीहड़ की नहीं है के जहां तक सरकारी महकमों की पहुंच न हो।

पुलिस का दूध-भात है, उन्हें अपराध करने की छूट है ???

बिलासपुर पुलिस के कुछ अधिकारियों पर लगातार लग रहे गंभीर आरोप और विभाग का उन तमाम मामलों में या तो खानापूर्ति करने लगना या पूरी तरह चुप्पी ही साध लेने का रवैया बिलासपुर पुलिस की छवि को भरपूर मटियामेट कर रहा है। इस खबर में हमने केवल बिलासपुर पुलिस के एक मामले का उल्लेख किया है, मामले और भी हैं पर फिलहाल उनका उल्लेख नहीं करेंगे औरइस भी नहीं है कि इस तरह के मामले केवल बिलासपुर में ही हो रहे हैं पूरे प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।

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