महिला सम्बन्धी मुद्दे शिक्षा-स्वास्थय

मासिक धर्म होने से क्या अछूत हो जाती है महिला /मासिक धर्म के समय महिला को गांव से निकालना अंधविश्वास – डॉ दिनेश मिश्र .

अंध श्रद्धानिर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने कहा राजनांदगांव जिले के एक ग्राम से यह खबर मिली थी कि वहां मासिक धर्म होने से महिलाओं को चार दिनों तक अछूत के जैसा रखा जाता है .उन्हें अपने घर में रहने की भी इजाजत नहीं होती ।ज्ञात हो 28 मई को प्रति वर्ष विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है ,मासिक धर्म से जुड़ी भ्रान्तियों के सम्बंध में जागरूकता हेतु कार्यक्रम आयोजित किये जाते है तब ऐसी परम्पराओं से ग्रामीण अंचल में महिलाओं के जूझते रहने की खबरें हतप्रभ करने वाली हैं।

डॉ मिश्र ने कहा राजनांदगांव जिले के कोरकटटा गांव में इस कुरीति के कारण मासिक धर्म के समय गाँव से बाहर बनी झोपडी में उन्हें रहना होता है उनके लिए रहने खाने पीने के लिए राशन वहींलाकर दिया जाता है नहाने का पानी दूसरा व्यक्ति कुएं से निकाल कर सबसे बाद में देता है, चार दिनों के वाद उन्हें अपने घर में रहने की इजाजत मिलती है 21 वी सदी जब महिलाएं माह के तीसों दिन पुरुषो के कंधे से कन्धा मिला हर क्षेत्र में आगे बढ़ कर काम कर रही है,चारों ओर महिला समानता ,शिक्षा, सुरक्षा की बातें हो रही है तब ऐसी परम्पराओ को ढोने की खबरे हतप्रभ कर देती है , जब एक समाचारपत्र के संवाददाता ने मुझे यह जानकारी दी तो मैं आश्चर्यचकित रह गया। मैंने जब और आगे जानकारी ली तब पता चला कि यह परंपरा मानपुर ब्लॉक के कोरकटटा गांव में काफी अर्से से चली आ रहीहै और महिलाएं पीढ़ी दर पीढ़ी इस कुरीति को ढोने को मजबूर हैं । इसके अलावा कुछ अन्य स्थानों में भी इस प्रकार की परंपरा के प्रचलित होने के समाचार मिले हैं .

डॉ दिनेश मिश्र ने कहा जबकि ऐसे समय उक्त महिला स्वयं को असहज महसूस करती है ,कमजोर और अस्वस्थ असुरक्षित भी महसूस करती है ,तब उसे न केवल घर बल्कि गांव से बाहर भेजने और निर्वासित सा रहने की परंपरा गलत है । मासिक धर्म महिलाओ में एक सामान्य प्रक्रिया है, इसे किसी भी अन्धविश्वास से जोड़ना एवं कुरीति बनाना अनुचित है हम इस छुआछूत की परंपरा का विरोध करते है उनकी उस गांव के निवासियों ,से मुलाकात व उनसे चर्चा हुई है मेरा वहां जाना भी हुआ है ,हम जन जागरण अभियान चला कर ग्रामीणों को जागरूक करेंगे और इस कुरीति का निर्मूलन करेंगे .

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