मानव अधिकार

मानव अधिकार के मुद्दों के प्रति अत्यंत निष्ठावान साथी एडवोकेट बोस थॉमस नहीं रहे .

गोल्डी एम जार्ज 

बहुत ही दुखद और बुरी खबर  है यह। मैं इन्हें व्यक्तिगत तौर से 1991 से जान रहा हूँ। एड० बोस थॉमस PUCL छत्तीसगढ़ के ऐसे वरिष्ठ साथी थे। वे 1990 के दशक में मध्यप्रदेश PUCL के ट्रेजरार और फिर उपाध्यक्ष भी रहे है। बोसजी PUCL में ना केवल वरिष्ठ साथी रहे है, बल्कि PUCL के अंदर कलह और क्लेश के समय में संगठन और मानव अधिकार के मुद्दों के प्रति अत्यंत निष्ठावान साथी के रूप में भी रहे हैं। वे ऐसे दौर के वकील साथी है, जब मज़दूर, किसान, दलित, आदिवासी, इत्यादि के दलील हेतु सहानुभूति वाले वकील साथीयों की काफी कमी थी। उस दौर में इनकी भूमिका बहुमूल्य रही है।

नियोगीजी के समय से ही इन्होंने CMM के मज़दूर साथियो के अनेकों पेचीदा केस को बड़े सफाई और सामर्थ के साथ क़ानूनी हस्तक्षेप करने में सफल रहे है। CMM के अनेकों आंदोलन के साथ सहयोग करने के अलावा, संगठन के क़ानूनी मसलो को भी इन्होंने उठाया। नियोगी मर्डर केस के निचले अदालत में बहस के दौरान बोसजी की बहुत एहम भूमिका रहा हूं। दलित अत्याचार के कई मसलों पर इनकी हस्तक्षेप और भूमिका सराहनीय रही है। टुंड्रा कांड के आरंभ में इन्होंने विट्नेस्सो को बड़े सफाई से तैयार किया, जिसके चलते आरम्भ से ही केस को ढीला होने नहीं दिया। इसी तरह गौद, घुमका इत्यादि दलित अत्याचार के मसलो में इनकी भूमिका अति महत्वपूर्ण रही थी। इसी तरह भुरकी में हुए दलित मर्डर केस में भी बोसजी ने अतिरिक्त क़ानूनी हस्तक्षेप किया और पीड़ित को न्याय दिलाया। राजनांदगांव में हुए फर्जी मुठभेड़ और फर्जी गिरफ़्तारी के भी कई मामलो में सफलतापूर्वक क़ानूनी हस्तक्षेप कर निर्दोष आदिवासियों को कारागृह से मुक्त किया। इसी तरह जब RSS के माध्यम से चर्च एवं ईसाई संस्थानों पर हमले का सिलसिला आरम्भ हुआ तब बोसजी इन मामलो में सबसे आगे सहयोग करने उपस्थित थे।

एक अटल एवं सशक्त व्यक्तित्व के स्वामी बोसजी अपने सैद्धान्तिक और वैचारिक परिपेक्ष में जीवनभर कभी भी पीछे नहीं हठे। साथी बोसजी के आज हमारे बीच नहीं रहना इन तमाम आंदोलनों के लिए एक बहुत बड़ा आघात है। साथी एड० बोस थॉमस जी को सत सत नमन।

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