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महाराष्ट्र सरकार कानून के शासन की जगह प्रतिशोध की राजनीति बंद कर समाज के कमजोर वर्गों और नागरिक अधिकारों के लिए कार्यरत गिरफ्तार पांचों साथियों को रिहा करे .: छतीसगढ बचाओ आंदोलन.

7 जून 2018

विगत 31 दिसम्बर को भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस मनाते दलितों पर हमले हुए थे जिसमें दलित साथी घायल और शहीद हुए थे परंतु सरकार ने इस हिंसा के लिए दलितों को ही जिम्मेदार ठहराया और पूना में यलगार परिषद तथा प्रेरणा अभियान के साथियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवा दिया, परंतु सच्चाई दूसरी थी और आरएसएस से जुड़े कट्टरपंथी लोगों ने इस हमले को अंजाम दिया था । जन प्रतिरोध और निष्पक्ष जांच की मांग करने के बाद जांच बिठाई गई परंतु , इसके षड्यंत्रकारियों की गिरफ्तारी नहीं हुई । जब तमाम राजनीतिक दलों सामाजिक संगठनों और खासकर प्ररेणा अभियान से जुड़े लोगों ने आरएसएस के अनुषांगिक संगठनों से जुड़े शंभू भिड़े और मिलिंद एकबोटे की गिरफ्तारी के लिए दबाव डाला तो महाराष्ट्र सरकार ने कानून के पालन कर निष्पक्ष न्याय के सिद्धांत का माखौल उड़ाते हुए उल्टे 6 जून की सुबह जनता के वकीलों के राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र गाडलिंग, नागपुर, अंग्रेजी विभाग नागपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सोमा सेन “विद्रोही” पत्रिका के संपादक सुधीर धावले, राजनीतिक बंदियों के अधिकारों के लिए समर्पित
रोना विल्सन तथा विस्थापन के खिलाफ संघर्षरत सी एस डी के महेश राऊत को गिरफतार कर लिया.

यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि समाज के पीड़ित दमित हिस्सों के साथ खड़े होने वालों नागरिक अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध, किसानों आदिवासियों के विस्थापन के खिलाफ काम करने वालों, देश की संसद द्वारा पारित भूमि-अधिग्रहण कानून, वनाधिकार कानून पेसा कानून आदि के पालन के लिए सक्रिय लोगों को महाराष्ट्र सरकार गिरफ्तार कर , कट्टरपंथी हिंदुत्व वादी कारपोरेट परस्त सामंती और सांप्रदायिक लोगों को बचाने का काम कर रही है
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से मांग करता है कि गिरफ्तार पांचों सामाजिक कार्यकर्ताओं को अविलंब निशर्त रिहा करे, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ,इन गिरफ्तारियों के खिलाफ लामबंद संगठनों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करता है
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नंदकुमार कश्यप विजय भाई रमाकान्त बंजारे, रिनचिन आलोक शुक्ला

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन

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