आदिवासी जल जंगल ज़मीन राजकीय हिंसा

मप्र. बुरहानपुरमें आदिवासियों पर गोली-चलाई ,चार घालल.

बादल सरोज की रिपोर्ट .

एक ओर म.प्र शासन वन अधिकार के लिए खरीफ और लंबित दावों का पुनः निरिक्षण का प्रक्रिया शुरू कर रही है और इस बारे में समस्त कलेक्टरों को आदेशित भी किया गया है कि इस प्रक्रिया के होने तक किसी को बेदखल नहीं किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने भी अगली सुनवाई – 24 जुलाई तक – अपने फैसले पर रोक लगाई हुई है। मगर जंगल विभाग और प्रशासनिक अमले का आतंक ज़ारी है।


कल 9 जुलाई को बुरहानपुर के ग्राम सिवल में पुलिस और रेवेनुए अधिकारी सहित वन अमला पहुंचा और जेबीसी मशीनों से खेत उखाड़ने लगे। गौरतलब है कि ये आदिवासी वन अधिकार के दावेदार हैं और 1988 -89 के सबूत अपने दावों में पेश किये हैं।


आदिवासियों द्वारा फसल उखाड़ने का विरोध करने पर अमले ने गोली चलाई जिसमे चार लोग घायल हुए हैं। उनमे से एक, गोखरिया पिता गाठला के गर्दन और छाती में लगे छर्रे बाहर नहीं निकलने के कारण उन्हें एम वाय अस्पताल इंदौर भेजा गया है .


खबर है कि 5 खेत उखाड़े गए, बाद में ग्रामीणों के विरोध के कारण कार्यवाही स्थगित कर दी गयी।
दिन पर के प्रयास के बाद देर रात को ही इस सम्बन्ध में FIR दर्ज की गयी मगर उसमे भी दोषी कर्मियों का नाम नहीं लिखा गया। जबकि ग्रामीणों पर भी “दंगे’ और शासकीय काम में बाधा धाराएँ दर्ज कर ली गयी हैं।


अखिल भारतीय किसान सभा तथा आदिवासी एकता महासभा मध्यप्रदेश ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप का आग्रह करते हुए मांग की है कि समस्त दोषी कर्मियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उन पर ‘अत्याचार निरोधक अधिनियम’ की धारा भी जोड़ी जाये। सभी निरस्त एवं लंबित दावों का तुरंत निराकरण किया जाये, इस प्रक्रिया के दरमियान किसी भी दावेदार को बेदखल नहीं किया जाए और ग्रामीणों पर लगाये केस वापस लिए जाए .

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