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मध्यप्रदेश जा रहे 16 प्रवासी मजदूरों को मालगाड़ी ने कुचला, मौत, माननीय ने दुःख व्यकत कर दिया है, उनसे कुछ और उम्मीद थी क्या आपको?

आज सुबह की शुरुआत एक ऐसी दर्दनाक घटना से हुई हैं जिसके बाद हमारे देश की सरकारों को शर्म से डूब मरना चाहिए.

पटरी पर बिखरे हैं मर चुके मजदूरों के अवशेष, सामान

पैदल घर जा रहे मजदूरों के रास्ते में दम तोड़ देने की घटनाएं सामने आ रही हैं. आज सुबह औरंगाबाद से मध्यप्रदेश के लिए पैदल निकले 16 मजदूरों को एक खाली मालगाड़ी ज़िंदा कुचल दिया. 16 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई. दुर्घटना में घायल 5 लोगों को औरंगाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

घटना आज सुबह 5:30 बजे की बताई जा रही है. देखिए घटना के बाद का ये वीडियो.

https://youtu.be/9qJkDF_MUQQ

ये मजदूर जालना से भुसवाल पटरी के रास्ते अपने घर जा रहे थे. सभी मजदूर जालना की एक स्टील फैक्ट्री में काम करते थे. उन्हें बताया गया था कि भुसावल से उन्हें ट्रेन मिल जाएगी. परभणी मनमाड रेल सेक्शन पर बदनापुर और कर्माड रेल्वे स्टेशन के बीच ये हादसा हुआ. मुंबई से 360 कि.मी दुर औरंगाबाद जिले में स्थित करमाड के बाद वे थक कर पटरियों पर ही आराम करने लेट गए. मीलों पैदल चलने की थकान उन्हें नींद में ले गई और नीद में मौत की रेल उन्हें साथ ले गई.

जैसे साध्वी प्रज्ञा को वे दिल से माफ़ नहीं कर पाए थे फिर भी उन्हें टिकट देकर चुनाव लडवाया था वैसे ही इन मजदूरों की मौत पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करके घटना पर दुःख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है ये घटना बहुत दुखद है, रेल मंत्री पियूष गोयल से बात हुई है उनकी नज़र पूरे मामले पर बनी हुई है, सभी संभव मदद मुहैय्या कराई जाएगी.

मजदूरों को ये चार रोटियां ही डे देती सरकार, तो वे पटरियों पर नहीं कुचले जाते

हालाँकि कोई नहीं जानता कि मर चुके इन 16 मजदूरों को प्रधानमन्त्री क्या मदद पंहुचा पाएँगे और कैसे पंहुचा पाएँगे. मोदी जी दमदार नेता हैं वो चाहें तो कभी भी कहीं भी कुछ भी पंहुचा सकते हैं. सवाल तो ये है कि जिस मदद की वो बात कर रहे हैं वो इन मजदूरों के ज़िंदा रहते क्यों नहीं पहुचाई गई.

ट्विटर पर व्यक्त किया गया पधानमंत्री जी का दुःख अब उन मरे मरे हुए मजदूरों के किस काम का है आखिर

रेल मंत्रालय ने भी आधिकारिक बयान जारी कर घटना की जाँच करने की बात कही है.

https://twitter.com/RailMinIndia/status/1258595033260929029

मध्य प्रदेश के मुख्या मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी घटना पर दुःख जताया है. उन्होंने कहा कि वो महाराष्ट्र के मुख्या मंत्र्ती से संपर्क में हैं. उन्होंने न 5-5 लाख रूपए और घायलों के इलाज की व्यवस्था करने की बात कही गई है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना पर दुःख जताते हुए कहा है कि वो महाराष्ट्र के मुख्या मंत्र्ती से संपर्क में हैं. उन्होंने मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रूपए देने और घायलों के इलाज की व्यवस्था करने की बात कही है.

https://twitter.com/ChouhanShivraj/status/1258608853668823041

ये मजदूर मध्यप्रदेश के शहडोल और उमरिया के बताए जा रहे हैं.

दो दिन पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में पैदल चलते चलते बीमार पड़ गए एक मजदूर ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था.

उससे कुछ दिन पहले पैदल घर आ रहे छत्तीसगढ़ के एक मजदूर ने घर पहुचने से लगभग 10 किलोमीटर पहले दम तोड़ दिया था.

आप कहेंगे कि ये मजदूर पटरी पर क्यों सो गए थे तो आपको बता देते हैं कि आपका सभ्य समाज पैदल चलते मजदूरों को अपने घर या गाँव के आसपास सुस्ताने नहीं देता है कहता है रातोंरात यहाँ से निकल जाओ वर्ना पीट देंगे. इसलिए ये मजदूर पटरी जैसे किसी एकांत में सुस्ताने रुक गए हों शायद.

हालांकि पटरी पर क्यों सो गए वाला सवाल मजदूरों से नहीं, कॉलर पकड़कर देश की सरकारों से पूछना चाहिए.

“सबका साथ सबका विकास” और “वक़्त है बदलाव का” जैसे नारे देने वाली सरकारों ने देश के मजदूर को मरने के लिए उसके हाल पर छोड़ दिया है. लॉक डाउन में आप घर पर हैं इसलिए आपको सड़कों पर मजदूरों के साथ हो रही वहशियत नहीं दिखा रही हो शायद. रास्ते पर वो रोज़ मर रहा है,वो रोज़ दुत्कारा जा रहा है.

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