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मजदूर दिवस: सिर्फ़ खाने की नहीं साहब मजदूरों की और भी समस्याएँ हैं, पढ़ियेगा तो जानियेगा

छत्तीसगढ़ मुक्तिमोर्चा ने संघर्ष के दिन 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाया. सुबह 6 बजे से कुम्हारी नगर पालिका, भिलाई चरोदा निगम, भिलाई निगम, रिशाली निगम दुर्ग नगर निगम, पाटन जनपत पंचायत के सफाई कर्मियों ने लाल हरा झंडा लेकर 1 मई के अमर शहीदों को गगन भेदी नारो से सलामी पेश की और अपने अधिकार व् सुरक्षा प्राप्त करने आवाज़ बुलंद की.

10 बजे से ओउद्योगिक क्षेत्र के हथखोज, अक्लोर डीह, छावनी, शंकर नगर, इंदिरा चौक, डबरा पारा, उम्दा, जामुल रावण भाठा, लेबर केम्प, बिजली नगर, श्रमिक नगर, जहाँ आद्योगिक मजदूर रहते है जम कर नारा लगाया गया.

मुख्या मांग

लाकडाउन में पूरा वेतन मिले

12 घन्टे कार्यवधि अमानवीय है इसका विरोध

सफाई कर्मियों के ESI और PF का हिसाब दिखाया जाए

लाकडाउन में सफाई कर्मी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं उनको इसका अलग भत्ता दिया जाना चाहिए

मजदूरों का बीमा कराया हो

ठेकेदारी प्रथा बन्द करके सफाई कर्मियों को स्थाई किया जाए

प्रवासी मजदूरो की घर वापसी के लिए समुचित व्यवस्था हो

अधिकतर उद्योगों में स्व घोषणा पत्र देने वाले मजदूरों को ही काम पर लिया जा रहा इस पर रोक लगे, क्योंकि लाकडाउन के पहले उसी कम्पनी में मजदूर कार्यरत था तो फिर घोषणा पत्र लिखवाने का क्या तात्पर्य है

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति के कलादास डहरिया ने बताया कि कई कम्पनियो में 12 घंटे काम करवा कर केवल 6 घंटे के ही पैसे दिए जा रहे हैं. इस कटौती के लिए कम्पनियाँ लॉकडाउन का बहाना बना रही हैं. मजदूरों ने मांग की है कि सरकार इसमें हस्तक्षेप करे और उन्हें पूरा वेतन दिलवाए.

कम्पनियाँ लॉकडाउन का हवाला देकर मजदूरों की छंटनी भी कर रही हैं, सरकार को सख्ती से इस पर रोक लगवानी चाहिए.

वर्तमान में ओउद्योगिक मजदूरो के हालात बेहद खराब हैं अब मजदूरों का सब्र टूटने लगा है. मजदूरों ने कहा कि यदि कम्पनियाँ मनमाने तरीके से यूँ ही शोषण करती रहीं तो लॉकडाउन के बाद वे इसके विरोध में आन्दोलन छेड़ने पर मजबूर हो जाएंगे. क्योंकि छटनी, वेतन कटौती, ठेकेदारों और प्रबन्धन की तानाशाही ज़ोरों पर है जिसके खिलाफ मजदूरों में भयंकर गुस्सा है.

मई दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने में लखन साहू राजकुमार साहू, बिसनु यादव, अमित गीत जयप्रकाश नायर नेमन, मनोज कोशरे, नीरा, र्मिला कलादास डेहरीया, सुरेन्द मोहन्ती, खेमिन, मोतम आदि अलग अलग जगहों के साथी शामिल रहे.

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