अभिव्यक्ति आंदोलन नीतियां पर्यावरण

भोपाल : 1 और 2 मार्च को होगा नदी घाटी विचार सम्मेलन

गांधी भवन भोपाल में आज पत्रकार वार्ता में शामिल रहे उत्तराखंड से आये माटू जनसंगठन के और जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के विमल भाई, बरगी बांध विस्थापित और चुटका परमाणु परियोजना से लड़ने वाले राजकुमार सिन्हा तथा नर्मदा बचाओ आंदोलन की और जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की साथी मेधा पाटकर गांधी भवन न्यास की तरफ से उपस्थित रहे दयाराम नामदेव।

इस पत्रकार वार्ता में 1 और 2 मार्च को हो रहे देश भर के नदी घाटियों के साथी अनेक विशेषज्ञ, शोधकर्ता और अन्य मान्यवरों के साथ नदी घाटी विचार सम्मेलन की बात विमल भाई ने रखी।  उत्तराखंड के बांधों से विविध नदी घाटियों पर हो रहे असरों के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि आज बेहद जरूरी है कि हम नदी और नदी घाटी को बचाने के लिए न केवल संघर्ष करते रहे बल्कि गहरे विचार मंथन के द्वारा नियोजन की प्रक्रिया उद्देश्य और कार्य की सखोल योजना बनाए।  उन्होंने कहा कि नदी घाटीयों के लोगों के साथ ही यह योजना बनेगी तो जनतांत्रिक होगी।  इसका आग्रह रखने वाले देश भर के साथी चाहते है कि मध्यप्रदेश की सरकार भी इसपर ध्यान दे और मुख्यमंत्री सहित संबंधित, मंत्री, अधिकारी सम्मेलन में किसी न किसी सत्र में उपस्थित रहे मुख्यमंत्री कमलनाथ को निमंत्रित किया गया है  आयोजको के द्वारा कि वे 2 मार्च के समारोह  के सत्र में दोपहर 3:30 बजे उपस्थित रहकर सम्मेलन के निष्कर्ष की प्रस्तुती सुने और मध्यप्रदेश के आगे के जल नियोजन में उसे उपयोग में लाएँ।

राजकुमार सिन्हा ने बरगी बांध से लेकर नर्मदा घाटी के विविध बांधों पर उठे हुए सवाल बिना पुनर्वास हो रहा विस्थापन और अवैध रेत खनन जैसे मुद्दों पर सोचा जायेगा इस सम्मेलन में और उर्जा के भी विविध तकनीकों में से किस तकनीक के कौनसे असर, सामाजिक, और पर्यावरणीय, आते है इस पर कोई निष्कर्ष निकलने की उम्मीद व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में शामिल होने वाले मान्यवरों में लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स के अर्थशास्त्री भरत झुनझुनवाला जो आज गंगा घाटी में सक्रिय है, जलवायु परिवर्तन और विकास को जोड़कर प्रस्तुती करने वाले अंतराष्ट्रीय ख्यातीप्राप्त श्री सौम्या दत्ता, यमुना के अभियान में अगुवाही और नेतृत्व करने वाले श्री मनोज मिश्रा, मध्यप्रदेश के भूतपूर्व मुख्य सचिव श्री शरदचन्द्र बेहार, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक चिन्मय मिश्रा, कृष्णा घाटी से महाराष्ट्र से वरिष्ठ कार्यकर्त्ता सुनीति बहन, विवेकानन्द माथने, विलास भोंगाड़े, तथा कावेरी से आने वाले तमिलनाडू के वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री लेनिन जी व किसान संगठन पिनियन जी, गोदावरी पर काम करने वाले नासिक के कार्यकर्त्ता और अन्य नदियों से कोशी (बिहार) से महेंद्र यादव जी और साथी, भोपाल से पर्यावरणविद सुभाष पांडेय, आदि के नाम गिनते हुए कहा कि घाटी के किसान, मजदुर, मछुआरों के साथ साथ इन तमाम लोगों की उपस्थिति और सहभाग इस सम्मेलन को महत्वपूर्ण बना देगा। और इसके निष्कर्ष सरकार ही नहीं और समाज के सामने भी रखे जायेंगे।  उन्होंने भोपाल के हम सब एक है संगठन से राकेश दीवान सहित अनेक संगठन तथा गांधी भवन न्यास भी जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय, नर्मदा बचाओ आंदोलन और माटू जनसंगठन से हुई इस सम्मेलन की पहल के साथ जुड़े रहेंगे यह भी बात बताई।

गांधीवादी दयाराम नामदेव ने कहा कि गांधी जी के 150 वी वर्षगांठ पर जल और पर्यावरण पर स्पष्ट जाहिर विचारों को भी इस सम्मेलन में रखा जाएगा और गांधी जी के मार्ग पर चलते हुए निरंतर विकास की अवधारणा को कैसे ला सकते हैं इस पर भी सोच विचार जरूरी होगा |

मेधा पाटकर ने मध्यप्रदेश सरकार जल आपूर्ति का क़ानून जो ला रही है  इसका स्वागत करते हुए कहा कि जल की सुरक्षा, प्रदुषण से, विनाश से, और नदी को सुरक्षित रखने से भूजल के दोहन, पर मर्यादा डालने से कैसी होगी इस पर आज बहुत जरूरी है चर्चा – विचार ब्रह्पुत्र से लेकर कावेरी और पेरीयार तक उत्तर से दक्षिण तक नदी घाटी से उठ रहे आक्रोश के पीछे है उनके अधिकारों पर हो रहा आक्रमण इसलिए लोग उनके अधिकार नदी घाटी के तमाम प्राकृतिक संसाधन जिसमें मछली और रेत भी शामिल है।  और सही तकनीक का चुनाव यह सब आधार होने चाहिए नदी घाटी के नियोजन में आज पर्यावरणीय क़ानून भी बदलते हुए जरूरी हो रहा है कानूनी और मैदानी संघर्ष इसीलिए इस सम्मेलन में बदलते कानूनी दायरों का विचार और आगे की दिशा तय करते हुए संघर्ष और निर्माण दोनों पथ पर चलने की बात तय करेंगे सभी सहभागीजन।  मेधा पाटकर जी ने कहा कि इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री कमलनाथ जी सहित संबंधित मंत्रियों को इसीलिए आमंत्रित किया गया है कि मध्यप्रदेश की जीवन रेखाएं रही नदियों के नियोजन में पुरे देश भर के नदी घाटीयों के अनुभव और निष्कर्ष तथा विशेषज्ञों के सुझाव ध्यान में लेकर राज्य की नई सरकार जो संवाद करती है वह अमल भी कर पायेगी सही विकास की अवधारणा पर इस सम्मेलन के समारोप में मुख्यमंत्री जी को निमंत्रित किया गया है अभी जवाब आना बाकी है।   साथ ही उदघाटन सत्र के बाद विविध विषयों पर समूह चर्चायें होने वाली है जिससे की सभी सहभागी व्यक्तियों को अपनी बात और अनुभव तथा सुझाव रखने का मौका मिले।

भोपाल तथा मध्यप्रदेश के विविध संघटनो के साथियों को और सभी संवेदनशील और विचारशील नागरिकों को इस सम्मेलन का खुला निमंत्रण है। माध्यमकर्ताओं को भी उपस्थित रहने का और विस्तृत रूप से सम्मेलन के कार्यक्रम और अंतिम प्रस्ताव पर समाज तक जानकारी पहुंचाने का आग्रह है पत्रकार वार्ता में यह भी सूचित किया गया कि मध्यप्रदेश सरकार के समक्ष नये जल आपूर्ति क़ानून का जो मसौदा है उसपर भी इस सम्मेलन के बाद देश भर के नदी घाटीयों के साथी जरुर दे पाएंगे।

Related posts

Statement condemning the attack on Advocate Sudha Bhardwaj We the undersigned wish to place on record our utter disgust, contempt and outrage at the latest in the series of machinations by Republic TV.

News Desk

Gujarat Police arrested Activist Medha Patkar, Goldman Environmental Prize 2017 winner Prafulla Samantara, Dr. Sunilam and approximately 60 more people participating in Rally For The Valley organized by Narmada Bachao Andolan

News Desk

गांधी:150 – बिलासपुर में आयोजन की रूपरेखा बनीं.

News Desk