कला साहित्य एवं संस्कृति

भोपाल : दस्तक समूह का काव्य पाठ : अपने समय की बेचैनी और परेशानियों को दर्ज करती कविताएं

भोपाल, 4 जून

शहर के साहित्यकारों के समूह दस्तक की ओर से मायाराम सुरजन स्मृति भवन में सोमवार को काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इस काव्य गोष्ठी में अनूपपुर से आईं युवा कवियत्री अनामिका चक्रवर्ती, गया के युवा कवि सौरभ शांडिल्य, युवा कवि सचिन श्रीवास्तव समेत प्रज्ञा रावत, संगीता सक्सेना, संध्या कुलकर्णी और ममता वाजपेयी ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि और कथाकार अमिताभ मिश्र ने किया। दस्तक समूह के संचालक अनिल करमेले ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। दस्तक का यह कार्यक्रम पत्रकार राजकिशोर जी की स्मृति को समर्पित था.

गया से आए युवा कवि *सौरभ शांडिल्य* ने “आयु,” “पहचान” और “जंगल” शीर्षक की अपनी कविताओं का पाठ किया।

जंगल” शीर्षक कविता में वे कहते हैं-
मैं रुकना चाहता हूं यहां
ठिठक कर नहीं
इत्मीनान से
कुछ देर को जीना चाहता हूं जंगल को
चश्मे का पानी पीना चाहता हूं चिरुआ से
चिरुआ चिरुआ पी कर
मिटाना चाहता हूं तराश

अनूपपुर से आईं कवियत्री *अनामिका चक्रवर्ती* ने “भूख”, “यात्रा”, “दायरा”, “स्त्री” और “अंतिम बिंदू” शीर्षक की कविताएं सुनाईं। “भूख” कविता की शुरुआत में वे कहती हैं-

गरीब के पेट पर
जब कुलांचे मारती है भूख
तांडव होता है तब
आदमी के दिमाग पर
खाट के नीचे सरकायी थाली में भी
पड़ा होता है अकाल

युवा कवि *सचिन श्रीवास्तव* ने नाम में “बहुत कुछ रख्खा है”, “राज कमल तुम याद आ रहे हो” और “बेतुकापन” शीर्षक से कविताएं पढ़ी। नाम में “बहुत कुछ रख्खा है” में वे लिखते हैं-

आप कोई शर्मा, तिवारी, भारद्वाज, द्वारी हैं
तो आपका जीवन आसान होने की गारंटी तो नहीं
लेकिन संभावना बहुत ज्यादा है
जैसे अगर आपके नाम से जुड़ा है
कहीं कोई ऐसा संबोधन
जिससे आती है गंध
आपके आदिवासी जीवन की
तो बहुत आशंका है कि आप
अपनी योग्यता से कभी पहचाने ही न जाएं

*प्रज्ञा रावत* ने “बांके बिहारी” अौर “जिद्दी बटन” कविताओं का पाठ किया। उन्होंने “बांके बिहारी” शीर्षक की कविता में कहा-

न जाने कबसे ढूंढ रही हूं
उस तमतमाहट को आक्रोश को
आंखों की गमक थी जिसकी
जो सही को सही और गलत को गलत
साबित करने में जमीन और आसमान
एक कर देता था

*संध्या कुलकर्णी* ने “सभ्यता के लिए” शीर्षक कविता में कहा-
वो एक अफीम का पौधा मात्र थी
जिसे हर तरह किया जाता था इस्तेमाल
और जिसका हर हिस्सा
बीमारी और संधान प्रयोग और नशे के लिए
नितांत उपयोगी था

*संगीता सक्सेना* ने “तितलियां”, “औरत” और “मौसम के फगुनाहटी तेवर” शीर्षक की कविताओं का पाठ किया। *ममता वाजपेयी* ने दो छंदबद्ध कविताएं सुनाईं।

इन कविताओं के बारे में बात करते हुए *वरिष्ठ साहित्यकार रामप्रकाश त्रिपाठी* ने कहा कि आज का काव्य पाठ एक मायने में बेहद खास है कि यह उम्मीद जगता है कि नए साथी भी अपने समाज की बेचैनियों, परेशानियों को कविताओं में पूरी ताकत के साथ दर्ज कर रहे हैं। इन कविताओं में अपनी परंपरा का जुड़ाव है और भविष्य की दृष्टि का संकेत भी है।

काव्य पाठ का संचालन करते हुए *वरिष्ठ साहित्यकार अमिताभ मिश्र* ने कहा कि आज जो भी कविताएं पढ़ी गई, उनमें विषयों की विविधता और कथ्य का अलहदा अंदाज भी है। इन कविताओं को सुनकर आश्वस्त हुआ जा सकता है। यह कविताएं अपने समय की कविताएं हैं और सार्थक हस्तक्षेप करने में सक्षम हैं।

*दस्तक समूह के संचालक और वरिष्ठ कवि अनिल करमेले* ने बताया कि दस्तक समूह का यह आयोजन इस मायने में खास है कि इसमें बाहर से आए और स्थानीय कवियों ने साझा रूप में अच्छी कविताएं पढ़ीं। उन्होंने कहा कि यह युवा साथियों की कविताएं विचार और ऊर्जा से भरपूर हैं और इन कविताओं को सुनना अपने आप में अच्छा अनुभव रहा है। दस्तक ने साहित्य और पाठक के बीच की दूरी को कम करने का काम किया है। उन्होंने सभी श्रोताओं और कविओं का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि राजेश जोशी, देशबंधु अखबार के संपादक पलाश सुरजन, मनोज कुलकर्णी असंगघोष,
अनिल सिन्हा, वंदना दवे, प्रतिभा गोटीवाले, उदिता मिश्र समेत कई साहित्यकार, कवि उपस्थित

सचिन श्रीवास्तव की रिपोर्ट 

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