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भोपाल जैसी 329 और त्रासदियां अब भी देश में पानप रही हैं

दुनिया के सबसे बड़े रासायनिक हादसों में से एक भोपाल गैस त्रासदी को 35 साल हो चुके हैं. इसके असर से अब भी बच्चे बीमारियों के साथ जन्म ले रहे हैं. लेकिन हमारी सरकारें बेशर्म बनी हुई हैं.

जानलेवा मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का प्रयोग अभी तक देश में प्रतिबंधित नहीं है. उलटे उसके उत्पादन में वसूली जाने वाली लेवी को भी घटा दिया गया. केंद्र सरकार मेक इन इंडिया के जाम पहिए में रसायन उद्योग से ही ग्रीस डलवाना चाहती है. दरअसल, भारत दुनिया में रसायन उत्पादन के मामले में छठवे स्थान पर और कृषि रसायनों के मामले में चौथे स्थान पर है.

देश में अब भी खतरनाक एसीफैट, ग्लाइफोसेट, फोरेट जैसे रसायनों का उत्पादन जारी है. यदि इन्हें सीमित करने और चरणबद्ध तरीके से हटाने पर निर्णय न लिया गया तो कई स्थान भोपाल जैसे विस्फोटक बन गए हैं और हम सब उसी बारुद की ढेर पर बैठे हैं

cgbasket.in के पाठकों के लिए आज हम लाए हैं डाउन टू अर्थ में प्रकाशित विवेक मिश्रा की विशेष रिपोर्ट. नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर आपको ये रिपोर्ट ज़रूर पढ़नी चाहिए.

भोपाल हादसे के 35 साल: देश में पनप रहीं 329 और त्रासदियां

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