आदिवासी औद्योगिकीकरण जल जंगल ज़मीन दलित पर्यावरण महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार

भेंगारी में महावीर एनर्जी और टीआरएन के खिलाफ जन आक्रोश से सहमा प्रशाशन ,भारी दबाब में जनसुनवाई निरस्त : ग्रामीणों ने बताई की देशभर से आये कार्यकर्ताओ के सामने अपनी व्यथा , अनिश्चितकालीन धरना शुरू .


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रायगढ 16.01.2018

महावीर इनर्जी के कोलवाशरी और टीआरएन के खिलाफ घरधोडा के भेंगारी गांव मे आक्रोश बढ़ता जा रहा हैं .15 जनवरी को शुरू हुये अनिश्चित कालीन धरने ,सारे देश से आ रहे जनसंघठन के कार्यकर्ताओ के पहुँचने और लगातार बढ़ते आक्रोश से कम्पनी और प्रशाशन सहमा हुआ है .

* कंपनी और पुलिस ने किया हमला

अभी तीन दिन पहले कम्पनी और पुलिस के लोगों द्वारा ग्रामीणो पर हमले ने स्थिति और बिगाड़ दी हैं ,कम्पनी की हरकत से स्थानीय प्रशाशन और परेशानी में पड़ गया हैं . जब इस हमले के खिलाफ एमनेस्टी इंटरनेशनल ,पीयूसीएल और छतीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने जांच की मांग की और कंपनी तथा पुलिस के.हमलावरों को तुरन्त गिरफ्तार करने की मांग की.ऋ
हमले पर कार्यकर्ताओ ने कहा कि  “हम जनसुनवाई का विरोध करने के लिए प्रभावितग्रामीणों को लामबंद कर रहे हैं। एक कंपनीअधिकारी गुंडों और 3-4 पुलिस वालों – जिन्होंने अपने चेहरे ढके हुए थे – के साथ आयाथा और धमकी दी कि ‘हम तुम्हारा मुँह बंद करदेंगे ‘तुम्हें गाडी में डाल कर ले जाएंगे और जेलमें ठूस देंगे’उन्होंने हमारे साथ हाथापाई भी की।यह 11 जनवरी को भेंगारी मुख्य सड़क परहुआ“।
दो निजी कंपनियों – टीआरएनएनर्जी लिमिटेड और महावीर एनर्जी एंड कोलबेनेफिक्शन लिमिटेड के बिनाह पर काम करनेवाले एजेंटों द्वारा उनसे हथियाई गयी थी |

 

* समानांतर लोक सुनवाई

ग्रामीणों ने सरकारी जनसुवाई के समानांतर अपनी लोक सुनवाई शुरु कर दी हैं।जिसमें प्रभावित गांव के लोग वायुप्रदूषण ,जमीनो के गैर कानूनी अधिग्रहण और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से पड़ने वाले दुष्प्रभाव की बात कर रहे है.
संगठन का नाम आदिवासी दलित मजदूर किसान संघर्ष कमिटी के बैनर तले अनिश्चित कालीन धरना शुरू हो गया हैं .
राष्ट्रीय जनजाति आयोग ने जिला प्रशाशन को पत्र लिख कर असंतोष को देखते हुये आज की जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की थी, तो कलेक्टर ने पुलिस की कमी का बहाना बनाकर जनसुनवाई स्थगित कर दी ,कहा यह जा रहा हैं कि दो महीने बाद थोड़ा आंदोलन शांत होने पर दुबारा जन सुनवाई की जाएगी .

* संविधान और सारे कानून निष्प्रभावी

संघठन के डिग्री प्रसाद चौहान कहते हैं कि कम्पनी और प्रशाशन की मिली भगत से भारत का संविधान या राज्य शासन का कोई प्रभाव इन क्षेत्रों मे खतम हो गया है ,यहाँ कंपनी के लोग मनमानी कर रहे है . न किसी कानून को मानते हैं और न जनता की सुनते हैं .

* इस लिये बिगडे हालात

रायगढ जिले के घरघोडा मे जुनवानी और सुहाई जंगल के नाम से जाना जाता है ,यह 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मे विस्तारित हैं और 32 गांव की कुल.आबादी करीब पचास हजार के आसपास है ।इस क्षेत्र के केन्द्र मे भेंगारी गांव मे टीआ एन एनर्जी और महावीर. एनर्जी एण्ड कोल नामक दो कंपनियां स्थापित होंने से इस क्षेत्र मे वायु प्रदूषण और अंधाधुंध पेड कटाई बेतहाशा रूप से जारी हैं.
इस क्षेत्र की जीवनदायिनी कुरकुट नदी और भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन से पानी का संकट उत्पन्न हो गया है साथ ही आसपास के जिंदा नाला में अपशिष्ट पदार्थों के डाले जाने से निस्तार के लिये संकट पैदा हो गया है .यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची मे आता हैं इसीलिए गहन वनों से युक्त है, यहाँ पेसा कानून और वनाधिकार कानून लागू है जिसके तहत विशेष अधिकार मिले हुऐ है ,जिनका. उलंघन कानूनी अपराध हैं .ग्रामीणों की जमीन को बिना वनाधिकार कानून ,पेसा,भूअर्जन , पुनर्वास और व्यवस्थापन की प्रक्रिया पूर्ण किए बिना नही लिया जा सकता है .लेकिन सरकार और कम्पनी मिल कर बिना कोई प्रक्रिया पूर्ण किये जमीन हड़प रहे हैं ,इससे अपनी जमीन से बेदखली के कारण भयानक असंतोष ,बेरोजगारी और व्यवस्था फैल गई है ।
अपशिष्ट के गैर जिम्मेदारी पूर्ण निपटारे के कारण लघु वनोपज ,जैव विविधता ,पारिस्थितिकी तंत्र हाथी और मानव में द्वंद की स्थिति के कारण खेती पर विपरीत असर पड़ रहा है.

* एक इंच भी जमीन नहीं देंगे और पर्यावरण की रक्षा भी करेंगे .

आंदोलनकारियों का कहना है कि भारत के सारे कानून हमारे पक्ष मे है ,हम लोगों ने सारी कोशिश कर ली हैं ,हर.अधिकारी के पास गये. समझोते भी किये लेकिन शासन सिर्फ कंपनी की ही सुनता हैं हम आर पार की लडाई को तैयार है ,किसी भी स्थिति में एक इंच भी जमींन नहीं देंगे और जो राखड़ का पहाड़ खडा कर दिया हैं उसे भी हटवाकर ही रहेंगे..
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