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भूमाफियाओं और बेजा कब्जाधारियों ने हड़प लिया बिलासपुर के माधो तालाब का आधे से ज़्यादा हिस्सा

madho talab

बिलासपुर और उसके आसपास के इलाकों मे ज़मीन माफियाओं का पूरा एक तंत्र सक्रीय है। बैक डेट में फ़र्जी रजिस्ट्री करवाकर ज़मीन हड़पने का धंधा शहर मे खूब फलफूल रहा है। इन मामलों में पटवारी से लेकर तहसीलदार स्तर के लोगों के शामिल होने की जानकारी मिल रही है।

ताज़ा मामला बिलासपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 24 का है।

इसी मोहल्ले मे कोचिंग चलाने वाले एक महोदय ट्रेक्टर भर हर के मिट्टी और एक्सिवेटर लेकर तालाब के किनारे के हिस्से को पाटने पाहुचे थे। मोहल्ले के कुछ लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो कोचिंग संचालक ने कहा कि ये निजी ज़मीन है और मैंने ज़मीन मालिक से इसकी सहमति ली है।

इस बात से ये सवाल भी उठता है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद तालाब की ज़मीन दे बेजाकब्जा हटाने की कार्रवाई करने की बजाए उसे निजी ज़मीन बताकर आखिर कौन बेच रहा है।

इस बात का उल्लेख करना भी ज़रूरी है कि सिर्फ़ बेचने वाला ही नहीं तालाब की इस सरकारी ज़मीन को ख़रीदना भी अपराध है।

वर्ड नंबर 24 मे आने वाले भारतीय नगर इलाके में “माधो तालाब” है। भारतीय नगर के रहने वालों के हिसाब से माधो तालाब का असल क्षेत्रफल 4 एकड़ से भी ज़्यादा का है। इससे संबन्धित कागजात होने की बात भी इलाके के लोगों ने बताई है।

भूमाफियाओं के साथ मिलकर माधोतालाब की ज़मीन मे धड़ल्ले से बेजाकब्जा किया गया है। चारों ही तरफ़ से तालाब की ज़मीन पर कब्जा कर के अवैध निर्माण कार्य कर लिए गए हैं।

इलाके के लोगों ने बताया कि पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने शहर मे पेयजल की बढ़ती समस्या और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को नज़रअंदाज़ करते हुए तालाब की ज़मीन को पाटकर यहां शॉपिंग मॉल बनवाने के निर्देश दे डाले थे।

लोगों ने इसका विरोध किया और तालाब से बेजाकब्जा हटवाकर उसे पुनर्जेवित करने की आशा के साथ 2017 में हाईकोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। जून 2018 में माननीय उच्च न्यायालय ने तालाब मे किए गए सभी अवैध कब्ज़ों और अवैध निर्माण को हटवा कर सौंदर्यीकरण करने का निर्देश दिया था।

इस बाबत 7 अलग अलग विभागों को आदेश के पालन का दिशानिर्देश जारी किया गया था। वे इस प्रकार हैं :

  1. The Secretary Department of Urban Administration And Development Mantralay, Naya Raipur
  2. The Secretary Department of  Revenue And Disaster Management mantralay, Mahanadi Bhavan, Naya Raipur
  3. The Collector Bilaspur
  4. Sub Divisional officer (Revenue), Tehsil Bilaspur
  5. The Tehsildar, Tehsil Bilaspur, Chhattisgarh
  6. Municipal Corporation Bilaspur Through The Commissioner Municipal Corporation Bilaspur, Chhattisgarh
  7. Nagar Panchayat Tifra Through Chief Municipal officer Tifra Distrik

कोर्ट ने अपने आदेश में इस काम के लिए आदेश के दिन से 45 दिन का समय निर्धारित किया था। कोर्ट के इस आदेश को आए अब 2 साल हो गए हैं लेकिन इस संबंध मे रत्तीभर भी कारी नहीं किया गया है।

ये पर्यावरण के साथ खिलवाड़ और विभागीय कार्यों मे लापरवाही तो है कि साथ ही ये उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना का भी मामला है।

भारतीय नगर के रहवासियों ने 21-11-2019 को जिलाध्यक्ष को एक पत्र लिखकर कोर्ट के आदेश भी याद भी दिलाई थी। कोर्ट के आदेश की प्रति नगर निगम कमिश्नर को उपलब्ध भी कराई गई थी। इसके बावजूद भी संबन्धित अधिकारियों के कान मे जूं तक नहीं रेंगी।

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