आंदोलन मजदूर

भिलाई : लोकतांत्रिक इस्पात एवं इंजीनियरिंग मजदूर यूनियन संयंत्र के प्रतिनिधि यूनियन चुनाव में .

लोकतांत्रिक इस्पात एवं इंजीनियरिंग मजदूर यूनियन संयंत्र के प्रतिनिधि यूनियन चुनाव में भाग ले रहा है,लोईमु लगातार कर्मचारियो के हितों में संघर्ष करते रहा है ,संयंत्र में कोई भी दुर्घटना के खिलाफ हो या निजीकरण करने के खिलाफ हो विरोध में मजबूती से खड़ा है.


भिलाई इस्पात संयंत्र को कारपोरेट घरानों के हाथों बेचने का साजिश चल रहा है,वैसे भी स्थाई कर्मचारियो की संख्या घट कर 16 हजार के आस पास हो गया है,सुविधाओं में कटौती,सेक्टरों में क्वाटरों में पानी बिजली रखरखाव का बेतहासा समस्या,जिस पर प्रबंधक मौन रहता है उसका मूल कारण निजीकरण करना है,भिलाई इस्पात संयंत्र आजादी के बाद पहला स्टील प्लांट है जिसे लौह उत्पादन के साथ साथ मजदूरो,युवाओं बेरजगारो को रोजगार मुहैया कराना मूल उद्देश्य रहा है,और यह रूस के सामाजिक सोच के मुताबिक निर्माण किया गया,रोजगार मिलने के नाम पर सैकड़ो गावों और किसान के बेशकीमती जमीन को न के बराबर कीमत में सयंत्र को दिया गया था आज आस पास के किसानों के बेटों को ठेका मजदूरी भी नही मिलता ,वही भिलाई इस्पात संयंत्र को मिनी भारत के नाम से जाना जाता था आज वह तस्वीर अदृश्य हो गया.


लोईमू यूनियन इन सब समस्याओ को बहुत ही गहराई से देखता है,कयोकि भिलाई इस्पात संयंत्र है तो भिलाई शहर है और भिलाई शहर है तो व्यपारियों,छोटे उद्यमियों के व्यपार चल रहे है,भिलाई इस्पात संयंत्र निजीकरण हुआ तो समझ लीजिए संयंत्र के मजदूर ,कर्मचारी नही बल्कि छोटे छोटे उद्योग में काम करने वाले लाखों मजदूर रोजगार के बिना बेमौत मारे जाएंगे साथ ही 25 हजार ठेका श्रमिक जो संयंत्र के अंदर काम करते है सबके आँखों मे अंधेरा छा जाएगा,आज यह बात कटु सत्य है जुझारू संघर्ष के बिना कर्मचारियों के अधिकार पर डाका बंद नही होगा लोईमु संघर्ष फिर संवाद पर विश्वास रखता है,संघर्ष और निर्माण पर विश्वाश रखता है आशा करते है कि भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारी सूझ बूझ का परिचय देते हुए लोईमु को प्रतिनिधि यूनियन के अगुवाई में खड़ा करेंगे.

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कलादास डेहरीया

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