राजनीति सांप्रदायिकता

भाजपा ने कबूला कि करणी सेना को उन्हीं की सरकार ने खुला छोड़ दिया, ताकि वे लोग राजस्थान में चुनाव जीत सकें. वे कहते हैं कि “सरकार उन्हें नुकसान पहुंचाने के मूड में नहीं है। अगर वाहन फूंके जाते हैं तो ये अच्छा है।” “भाजपा की अपनी मजबूरी है.

26.01.2018

विद्यानंद ठाकुर की जानकारीपूर्ण टिप्पणी :

लीजिए वही हकीकत सामने आयी है जिसकी आशंका सुबह की पोस्ट में जताई गई थी.

रिपब्लिक टीवी द्वारा किये गए स्टिंग में भाजपा के विधायक और महाराष्ट्र विधानसभा में मुख्य सचेतक राज पुरोहित ने इसमें कबूला कि करणी सेना को उन्हीं की सरकार ने खुला छोड़ दिया, ताकि वे लोग राजस्थान में चुनाव जीत सकें. वे कहते हैं कि “सरकार उन्हें नुकसान पहुंचाने के मूड में नहीं है। अगर वाहन फूंके जाते हैं तो ये अच्छा है।” “भाजपा की अपनी मजबूरी है। यहां समर्थन का सवाल नहीं है। यह मजबूरी है। भाजपा के पास इसके अलावा क्या विकल्प है। वह उनके खिलाफ भी तो नहीं जा सकती? बड़े स्तर पर हिंदू लोग उन्हें समर्थन दे रहे हैं। वे क्यों दे रहे हैं साथ? क्या भगवान का अपमान करने के लिए?”

आगे श्रीमान राज पुरोहित जी बोलते हैं कि “कई बार कुछ चीजें फैशनेबल बन जाती हैं। छह महीने पहले कौन जानता था करणी सेना को? लेकिन उन्होंने मुद्दा उठाया। 24-25 राजपूत विधायकों में से एक भी उनके साथ नहीं था। मगर जब हिंसा को जज्बातों से जोड़ा गया, तो आप जानते ही हैं कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं? यह राजनीति है। जज्बातों के आगे सारे कारण खो गए। मेरे नाम से मत छापना ये बात। यह राजनीति है।”

स्टिंग के आखिरी हिस्से में यह पूछे जाने पर कि यह मसला राजस्थान के चुनाव पर असर डालेगा? पुरोहित इस पर कहते हैं, “बिल्कुल। वे भाजपा के साथ जाएंगे। कारण यह है कि यह धार्मिक गतिविधियों का हिस्सा है। यह दक्षिणपंथी विचारधारा से मेल खाता है और भाजपा की सोच दक्षिणपंथी है।”

क्या अब भी किसी को शक रह गया है कि इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर किसने खड़ा कर हिंसा ओर दहशतगर्दी को अपना पूरा बैकअप दिया है ?
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