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बोधघाट में बांध की ऊंचाई घटाने की तैयारी :सरकार को सौंपी गई परियोजना की रिपोर्ट,अब 42 की जगह 28 गांव होंगे प्रभावित.

जगदलपुर . नईदुनिया की रिपोर्ट

साढे तीन दशक से अधर में अटकी बस्तर की महत्वाकांक्षी बोधघाट परियोजना को दोबारा शुरू करने पर शासन विचार कर रही है । वन संबंधी बाधा को देखते हुए बांध की पुरानी प्रस्तावित उंचाई में कमी कर के परियोजना को पूर्ण करने की दिशा में विशेषज्ञों की राय लेने का काम भी शुरू कर दिया गया है । उन्लेरनीय है कि राज्य में नई सरकार बनने के बाद दर्ताड़ा जिले के गीदम ब्लाक के बारनूर के निकट इंद्रावती नदी पर स्थित इस परियोजना को दोबारा शुरू करने शासन ने जल संसाधन विभाग से रिपोर्ट मांगी थी ।

शासन के निर्देश पर जल संसाधन विभाग के चार सदश्यीय इजीनियरों के दल ने बारसूर जाकर परियोजना स्थल का जायजा लिया था । विद्युत विभाग ने परियोजना की पुरानी रिपोर्ट आदि संकलित करने के बाद दल ने रिपोर्ट शासन को तीन माह पहले भेज दिया था । रिपोर्ट में बांध की ऊंचाई दस मीटर तक कम करने की सिफारिश की गई है । ऐसा करने से इबान क्षेत्र कात्र 2435 हेक्टेयर कम हो जाएगा लेकिन एक लाख : 51 हजार हेक्टेयर सिचाई और 500 मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता वाली बोधघाट परियोजना से मिलने वाले लाभ में कमी नहीं आएगी ।

जल संसाधन विभाग के उच्चाधिकारियों का कहना है कि परियोजना को दोबारा शुरू करने अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है लेकिन इसे शुरू किया जा सकता है या नहीं इस पर जरूर गंभीरता से विचार चल रहा है । जल संसाधन विभाग ने परियोजना के पक्ष में अनुमा कर पोर्ट शासन को भेजी है । अब यह शासन पर निर्भर करता है कि वह परियोजना को दोबारा शुरू करती है या फिर पांग्टयोजना हमेशा के लिए बंद घोषित कर दी जाएंगे ।

15 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होंगी सिचाई

परियोजना को यदि पूरा किया जाता है । तो बीजापुर , दंतेवाड़ा और बस्तर जिले के 111069 हेक्टेयर खरीफ और 40000 हेक्टेयर रबी का मिलाकर कुल 151059 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी । सिंचाई के अलावा पेयजल निस्तारी और औद्योगिक आवश्यकता की पूर्ति के साथ – साथ 500 मेगावॉट विद्युत उत्पादन भी किया जा सका । परियोजना की वर्तमान लागत 21 हजार करोड़ रूपये आंकी गई है । ओडिशा के साथ इंद्रावती नदी जल बंटवारा सम्झौता में छग में बोधघाट और ओडिशा में खातीगुड़ा बांध निर्माण में दोनों राज्यों ने एक दूसरे का सहयोग करने का वादा किया था । ओडिशा ने 2005 में खाती डा बांध का निर्माण पूरा कर लिया लेकिन क्लब में परियोजना अधर में लटकी है । बस्तर में इंद्रावती पर एक भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी ।

अंग्रेजो ने किया था सर्वे ,मोरारजी देसाई ने रखी थी आधारशिला

बोधघाट परियोजना की कल्पना सबसे । पहले 1941 में अंग्रेजों ने की थी और इसकी संकल्पना के 38 साल बाद । तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 21 जनवरी 1979 में परियोजना की आधारशिला रही थी । 1979 में परियोजना हेतु पयांवरण की स्वीकृति मिली थी । 1980 में परियोजनाका काम शुरू किया गया और सा करोड़ तापये के आसपास राशि भी खर्च कर कई निर्माण कार्य भी पूरे कर लिए गए थे लेकिन बाद में 1986 आते – आते । पर्यावरण और वन संबधी बाधा सामने आने के बाद परियोजना बंद कर दी गई । तव से परियोजना बंद ही पड़ी है । छ । राज्य बनने के बाद पांच परवरी 2005 को न्द्र र वनवं पयावरण विभाग द्वारा दोबारा परियोजना को सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई परंतु काम में कोई प्रगति नहीं हुई ।

ऊंचाई कम करने से कई गांव डूबान से होंगे बाहर .

पुरानी ड्राइंग – डिजाइन के अनुसार परियोजना का निर्माण करने से 42 गांवों पर डूबान का खतरा था और इससे 13783 हेक्टेयर वन , राजस्व और शासकीय भूमि के प्रभावित होगी । बांध की ऊंचाई दस मीटर तक कम कर 455 एफआरएल पर निर्माण करने से 11348 हेक्टेयर भूमि ही प्रभावित होगी जिन गांवों * के परभावित होने की संभावना जताई गई है उनमें सदर ,इतलकुम , कोयम , बैंगलूर , नैयूरनार , उडेनार , एरपुंड , हरीकोईर , पिच्चीकर , पुसपाल , मालवाही , अमलीधार , कर्डनार , धर्माबेड़ा , चंदेला , पुसपाल , पालम , कनार , महिमा , रायगोंदी , सतसपुर , भेजा , बिता , करकोट , कोरली , कुथुर , राशर्मटा और तुमड़ीवाल शामिल है । पुंगारपाल , हादावाडा , भारपाल और हितार्म पर आंशिक असर रहेगा ।

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