आंदोलन औद्योगिकीकरण जल जंगल ज़मीन

बैलाडीला में 13 नम्बर को अदानी को देने के खिलाफ़ बारिश मे भी डटे रहे आदिवासी.नाच रहे है गा रहे है और मांगें मनवाने के लिये लड़ रहे है. मुख्यमंत्री से लेकर सभी दल कर रहे है समर्थन . अडानी या आदिवासी …तय कर लो.

विभिन्न न्यूज एजेंसी .

बैलाडीला में 13 नंवर खदान को अडानी को दिए जाने के विरोध में दंतेवाड़ा जिले के 200 गांव से पहुंचे हजारों आदिवासियों ने दूसरे दिन भी एनएमडीसी के चेकपोस्ट पर अपना आंदोलन जारी रखा । आदिवासियों का कहना है कि सरकार को यह तय करना होगा कि उन्हें आदिवासी समाज चाहिए या अडानी समूह का कारोवार । आदिवासी अपने हक से समझौता नहीं करेंगे । 13 नवम्बर पहाड़ में उनके आराध्य देव नेदराज हैं जिनकी वे हजारों वर्षों से पूजा करते आ रहे है और इस खदान को किसी भी हाल में बिकने नहीं दिया जाएगा चाहे उसके लिए उनको जान क्यों न देनी पड़े । .

              आदिवासियों ने एलान किया कि जब तक इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया जाता है तब तक वे अनिश्चितकालीन आंदोलन करने को भी तैयार हैं । बीजापुर के लाइन विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि नंदराज पाहड़ से सिर्फ दंतेवाड़ा की ही नीं बल्कि बीजापुर के लोगों की भी आस्था जुड़ी हुई है । कांग्रेस सरकार शुरू से 13 नंबर खादन अडानी को दिए जाने के विरोध में थी और आज भी विरोध में हैं ।

     मुख्यमंत्री को वे पूरे आंदोलन के बारे में जानकारी देंगे । संयुक्त सरपंच समिति के अध्यक्ष नंदाराम कुंजाम , सचिव राजू ' भास्कर , भीममन मडावी , शंकर कुंजाम , पजामीराम ने कह्म एनएमडीसी स्थानीय लोगों के प्रति कितनी संवेदनशील है इसी बात से पता चलता है कि वे स्थानीय लोगों के देव स्थल को भी नष्ट करने से पीछे नहीं हट रहे हैं । सोनी सोरी ने ग्रामीणों में आरपार की लड़ाई लड़ने को कहा । इस आंदोलन में सबसे ज्यादा भीड़ कटेकल्याण ब्लाक से पहले दिन में पहुंची हुई है इस ब्लाक के 23 पंचायत में 15 से अधिक पंचायत के ग्रामीण व सरपच आदोलन में डटे हुए हैं ।

रातभर नाचते गाते रहे आंदोलनकारी .

लाइन लाइन जंगल हो नानो ली लाइन लाइन जंगल , जंगल हो म जंगल पतकरी मादी में भूमि मनतयो . . . . गोंडी गीत की ये पंक्तियां पारंपरिक नाचा के साथ किरंदुल में रातभर गूजती रहीं . तीज , लोहार या कुछ विशेष मौकों पर नाचा के साथ आदिवासी खुशियों का इजहार करते हैं । इस बार ये उत्सव – गीत जल , जंगल और जमीन को बचाने के लिए है । वैलाडीला में जुटे हजारों आदिवासियों ने दिनभर के आंदोलन के बाद शुक्रवार की रात नृप गीत के बीच गुजारी । इस गीत का अर्थ था . . . लाइन लाइन
जंगल यह है दीदी , अपना जंगल रहेगा तो । मादी , अपरा जगत रहेगा तो , भरि छाद नीं जाएगे , अपनी आने वाली पीढ़ी क्या करेगी , भूखे पेट भी लड़ेंगे . . . जनता है तो पैसा है , जनता को कितना परेशान करोगे , लाइन लाइन जंगल है दीदी . . .

सुबह व दोपहर की शिफ्ट में काम रुका

बारिश के बीच भी ग्रामीण एनएमडीसी के चेक पोस्ट पर छाता लगाए आंदोलन में । नारेबाजी करते बैठे रहे । शनिवार को भी सुवह और दोपहर को शिफ्ट में कर्मचारी काम पर नहीं जा पाए । एसकेएमएस ट्रेड यूनियन के सचिव राजेश संधू ने कहा हम 13 नंवर खादन के निजीकरण के विरोध में शुरू से हैं , अडानी को यहां से भागना है , इस पहाड़ से ग्रामीणों की आस्था जुड़ी हुई हैं एनएमडीसी के पास और भी कई खदान हैं । जहां खुदाई का काम हो सकता है । हम निजीकरण के विरोध में ग्रामीणों की इस लड़ाई में उनका पूरा समर्थन करेंगे ।

अपने देवता के आराध्य स्थल को बचाने लिए दूर – दूर से पैदल चलकर अलग – अलग गांवों से । आदिवासी बैलाडीला पहुंचे हैं । शनिवार को कई गांव के लोगों को । राशन खत्म हुआ तो वे वापस ही । पैदल राशन लाने गांव की ओर बढ़ गए हैं । आदिवासियों ने बताया कि वे तीन – तीन पैली चावल लेकर । आदोलन में शामिल होने आए थे । अव इनका राशन भी खत्म ह्येने लगा है तो राशन के लिए वापसी कर रहे हैं । कटेकल्याण ब्लाक के टेटम गांव के हुरी , सन्नू , वमन , भीमा , मंग , काया व हिंगा पैदल लौट रहे थे । उन्होंने बताया तीन तीन पेली चावल , इमली व कुछ माग सब्जी लेकर वहां आए थे .

पिछली सरकार के निर्णय की करेंगे समीक्षा – भूपेश बघेल .

 मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पिछली सरकार के निर्णयों की समीक्षा की आवश्यकता है। बघेल ने सवाल उठाया कि बैलाडीला खदान के मामले में लोगों को विश्वास में लेकर निर्णय क्यों नहीं किया गया? प्रक्रिया पर पुर्नविचार की आवश्यकता पर बल दिए जाने का कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी समर्थन किया है।

कांग्रेस सरकार के द्वारा बैलाडीला मामले में प्रतिपादित की गई समीक्षा की आवश्यकता की बात का समर्थन किया है.
कह है कि बिना लोगों को विश्वास में लिये जिस हड़बड़ी में बैलाडीला खदान का आबंटन अडानी को किया गया, वह संदेह को जन्म देता है। अडानी को बैलाडीला खदानों के तेरहवें निक्षेप को दिये जाने की महत्वपूर्ण तिथियां जारी करते हुये  कहा है कि टेन्डर डाक्यूमेंट एनसीएल की बोर्ड की मीटिंग में 28.07.2018 को एप्रुव किया गया। लेटर आफ इंटेट एलओआई 20.09.2018 को जारी किया गया और 6.12.2018 को हैदराबाद में एनसीएल सीएमडी, एनएमडीडी के चेयरमैन द्वारा अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर किये गये, जबकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार ने 17 दिसंबर 2018 को शपथ ग्रहण किया है

इधर… नगरनार में कोरियन कम्पनी के दौरे का विरोध सुरु

आज से 13 जून तक प्रस्तावित है दौरा, निजीकरण की आशंका पर मजदूर संघो ने किया स्टील प्लांट के दफ्तर का घेराव

आज से 13 जून तक प्रर जगदलपुर नगरनार में बन रहे एनएमडीसी इस्पात संयंत्र के निजीकरण का विरोध करते हुए शनिवार को मजदूर यूनियन ने स्टील प्लांट के प्रशासनिक भवन का घेराव किया । मजदूर यूनियन के पदाधिकारियों के मुताबिक सरकार ने इस बार कोरिया की स्टील कंपनी पॉस्को को निजीकरण के लिए आमंत्रित किया है । पॉस्को के अफसर 9 से 13 जुन के बीच यहां पहुंच रहे हैं । इससे पहले भी विनिवेशीकरण की बात चली थी , लेकिन विरोध को देखते ए यह फैसला उस समय टाल दिया गया था । अब एक बार फिर से विनिवेशीकरण की तैयारी की जा रही है .

ये आदिवासियों के अधिकारों का हनन

पदाकिारियों के साथ बड़ी संख्या में पहुचे भू -प्रभावितों ने अधिशासी निदेशक को एनएमडीसी के सीएमडी के नाम माग पत्र सौंपा है । उन्होंने साफतौर पर कहा है । जव उनके पूर्वजों की जमीनों पर एनएमडीसी का इस्पात संयंत्र की नींव खड़ी हैं तो अब उनके साथ [ एनएमडीसी प्रबंधन छल क्यों कर रहा है । किसानों ने जमीन एनएमडीसी को दी हैं , लेकिन इसे प्राइवेट कंपनी को देना आदिवासियों के अधिकारों का हनन है ।

पेसा कानून का हवाला दे रहे भू – प्रभावित

मजदूर यूनियन के सचिव महेंद्र जॉन ने बताया कि भू – प्रभावित विनिवेशीकरण का कड़ा विरोध कर रहे हैं । संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते उन्होंने बताया कि वस्तर में पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के साथ ही । अन्य संवैधानिक अधिकार भी । आदिवासियों को मिले हुए हैं । ऐसे में सरकार के नाम पर जमीन लेकर निजी कंपनियों को इसे वेचना आदिवासी ग्रामीणों की अपेक्षाओं पर चोट करना है .

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