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बीजापुर छतीसगढ : 26 बराती पुलिस के कब्जे में ,ग्रामीणो ने लगाये आरोप ,पुलिस ने किया इंकार .

बीजापुर/छत्तीसगढ़

अनुज श्रीवास्तव की रिपोर्ट

19.05.2018

ख़बर मिल रही है कि कल 18 मई 2018, दिन के करीब 12 बजे शादी कर के लौट रही एक बारात को भैरमगढ़ के पास पुलिस ने पूछताछ के लिए रोका।

बारात पुल्लोड़ गांव जा रही थी।

गांव वालों ने बताया कि बारात में कुछ नक्सलियों के होने की आशंका के चलते पुलिस ने बारात को रोक और पूछताछ शुरू की। दुल्हन विनीता मंडावी और दूल्हे मनकू पुड़िया को कुछ देर बाद छोड़ दिया गया बाकी बचे लगभग 26 बारातियों को शाम 4 बजे आगे की पूछताछ के लिए बीजापुर थाना ले जाया गया है।

चूंकि पूछताछ के लिए लाए गए इन सभी व्यक्तियों को थाने में बन्द 24 घण्टे से ज़्यादा हो चुके हैं जो कि असंवैधानिक है अतः अब तक उन्हें रिहा कर दिया जाना था। आपको बता दें कि पूछताछ के लिए किसी को भी 24 घंटे से ज़्यादा थाने में नहीं रोका जा सकता है।

हमने गांव वालों से जानकारी ली तो उन्होंने इस ख़बर की पुष्टि की।

ये जानने के लिए कि पुलिस की पूछताछ में क्या निकला?

क्या कोई नक्सली बारातियों के बीच पकड़ में आया?

हमने बीजापुर थाने का नम्बर मिलाया जो लगा नहीं

फ़िर बीजापुर के sp साहब को फ़ोन मिलाया।

Sp  ने कहा है कि बीजापुर थाने में किसी भी बारात को पकड़ कर नहीं लाया गया है न भैरमगढ़ के आस-पास से ही किसी को भी पूछताछ के लिए लाया गया है।

हमने फिर गांव वालों से बात कि के पुलिस तो घटना के होने से ही इनकार कर रही है। गांव वालों ने चिन्ता ज़ाहिर की और उन सभी लोगों के नाम भी हमें बताए जिन्हें पुलिस ने बंधक बना रखा है। गांव वालों ने कहा कि पुलिस बंधकों के बारे में उन्हें भी कोई जानकारी नहीं दे रही है।

बात करने से ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि गांव वाले झूठ बोल रहे हैं। हालांकि sp  ने भी हमसे पूरी शालीनता से बात की जिसके लिए हम उनके शुक्रगुज़ार हैं।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस अपनी अमानवीय कार्यप्रणाली के चलते यों भी बदनाम ही है जिसके कई तथ्य भी जगज़ाहिर हैं।

भैरमगढ़ के इस मामले में अब तक मिली जानकारी और वहां की पुलिस की छवि पर ग़ौर करें तो पुलिस ही संदिग्ध मालूम होती है। मुझे ख़ुशी होगी गर पुलिस सही और गांव वाले ग़लत हो जाएं लेकिन अधिकतर वाक्यों की तरह गर इस बार भी पुलिस ही ग़लत साबित हो जाती है तो पहले से ही बदनाम छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए ये घटना भी बदनामी का सबब बनेगी।

इक्कीसवीं सदी सूचना प्रौद्योगिकी का दौर है अब खबरें हवाओं में ट्रैवल करती हैं आप इन्हें तोड़ मरोड़ तो ज़रूर सकते हैं पर छुपा बिल्कुल नहीं सकते। अगर पुलिस इस घटना में भी तथ्यों को छुपा रही है तो उसे छुपने छुपाने के इस खेल में थोड़ा और पारंगत होना पड़ेगा।

हथियारों की ट्रेनिंग के साथ साथ पुलिस को बातें छुपाने की ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए। अब भई सफ़ेद झूठ नहीं चल पाएगा ना…

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