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बिलासपुर: संक्रमित मेडिकलवेस्ट खुले में फेंक शहर की जान खतरे में डाल रहा है श्रीकृष्ण हॉस्पिटल, CMHO ने भी पल्ला झाड़ा

कोरोना महामारी के इस घातक संक्रमण वाले दौर में जहां एक तरफ़ लोग जेब में सैनेटाइज़र रखना नहीं भूल रहे, दिन में पचासों बार हाथ धो रहे हैं, मास्क तो अब चेहरे के अंग जैसा ही हो गया है, वहीँ दूसरी तरफ़ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के मंगला चौक में संचालित श्रीकृष्ण हॉस्पिटल पूरे बिलासपुर की जान को खतरे में डाल रहा है.

डॉक्टर जितेन्द्र अग्रवाल द्वारा संचालित श्रीकृष्ण हॉस्पिटल अपना पूरा संक्रमित बायो मेडिकल वेस्ट सड़क किनारे खुले में फेंक देता है.

अस्पताल प्रबंधन ये गैरकानूनी काम चोरी छुपे करता है. लॉक डाउन के दौरान रात में सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम होती है इसी का फायदा उठाकर श्रीकृष्ण हॉस्पिटल का स्टाफ़ रात 12 बजे के बाद स्ट्रेचर में संक्रमित बायो मेडिकल वेस्ट की पन्नियों को लेकर निकलता है और मंगला चौक में रखे निगम के खुले कूड़ेदान में उसे डम्प कर देता है.

मंगला चौक पर रखा ये कूड़ेदान रोज़मर्रा के सामान्य कचरे के लिए रखा गया है. अस्पताल का मेडिकल वेस्ट इस खुले कूड़ेदान में फेंकना कानून के विरूद्ध तो है ही, साथ ही अस्पताल की इस घोर लापरवाही से कोरोना महामारी के संक्रमण का ख़तरा और भी बढ़ गया है. cgbasket की टीम ने अस्पताल के स्टाफ़ को लगातार कई रातों तक खुले में संक्रमित कचरा फेंकते देखा और एक रात श्रीकृष्ण हॉस्पिटल की इस हरकत को बतौर सबूत हमने अपने कैमरे में कैद किया.

कैमरा पर्सन : अप्पू नवरंग

अस्पताल के स्टाफ़ ने पहले तो झूठ बोला कि जो कचरा वो फेक रहे हैं वो जनरल वेस्ट है(मरीजों के भोजन आदि के बचे हुए सामन को जनरल वेस्ट कहते हैं) लेकिन जब हमने पास जाकर छानबीन की तो पता चला कि ये ख़तरनाक संक्रमित बायो मेडिकल वेस्ट है. वीडियो बनाते हुए इस कचरे से केमिकल की तेज़ गंध भी आ रही थी.

कैमरा पर्सन : अप्पू नवरंग

वीडियो में आप साफ़ देख पाएंगे कि श्रीकृष्ण हॉस्पिटल किस तरह गैर कानूनी ढंग से ICU और ऑपरेशन थिएटर में इस्तेमाल किए जाने वाली घातक संक्रमित चीज़ों को खुले फेक रहा है. इस कचरे में ताज़ा खून के धब्बों वाली पट्टियाँ भी दिखाई देंगीं.

श्रीकृष्ण हॉस्पिटल के संचालक डॉ. जितेन्द्र अग्रवाल से जब हमने फ़ोन पर इस बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि “हमारा टाईअप इन्वायरोकेयर कंपनी से है, हम हर महीने उसे पैसे देते हैं और वो हर रोज़ आकर अस्पताल से कचरा ले जाते हैं.” लेकिन डॉक्टर साहब का झूठ हमारे वीडियो में साफ़ दिख रहा है.

CMHO ने मामले से पल्ला झाड़ लिया है

अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए हमने इस बात की जानकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थय अधिकारी प्रमोद महाजन तक पहुचाई. परन्तु CMHO साहब ने मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ते हुए कहा कि “हम कुछ नहीं कर सकते इस मामले में तो पर्यावरण विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए आप उनको खबर कर दीजिये.”

अस्पताल के समीप मिला कोरोना पॉज़िटिव

श्रीकृष्ण हॉस्पिटल खुले में अपना घातक संक्रमित कचरा फेंकता रहा. स्वास्थय विभाग और पर्यावरण विभाग कुम्भकरण की नींद सोते रहे. समय रहते किसी ने ध्यान नहीं दिया और अब हालत ये है कि अस्पताल के समीप वाले मंगला इलाके को कन्टेनमेंट ज़ोन घोषित करना पड़ा है क्योंकि यहाँ कोरोना का पॉज़िटिव मरीज़ मिला है.

कैमरा पर्सन : अप्पू नवरंग

अस्पताल जहां कचरा फेंकता है वो भीड़भाड़ वाला इलाका है

श्रीकृष्ण हॉस्पिटल रात में चोरी छिपे जिस जगह पर अपना संक्रमित कचरा फेंकता है वहां दिन में फलों और सब्ज़ियों की दुकानें लगती हैं. सामने एक डेयरी है, बाजू में होटल और पान की दुकान है और सामने ही पुलिस चौकी भी है. ये बेहद भीडभाड वाला चौराहा है. अगर इस कचरे से किसी को कोई बीमारी लग गई होगी तो पूरी आशंका है कि कोरोना का वायरस उसपर आसानी से हमला कर लेगा. हम नहीं जानते… पर क्या पता मंगला में जो कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ मिला है उसके पॉज़िटिव होने में श्रीकृष्ण हॉस्पिटल के इस संक्रमित कचरे की ही भूमिका हो!!!

पुलिस की जान को भी होता है खतरा

बिलासपुर शहर में कुछ प्राइवेट अस्पताल मेडिकल वेस्ट प्रबंधन के नियमों की इस तरह खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं और पूरा प्रशासन आँख में पट्टी बांधे बैठा है. आम जनता की जान की जान की तो किसीको वैसे भी परवाह नहीं है लेकिन सरकार की ये लापरवाही अपने ही पुलिस विभाग को जान के खतरे में धकेल रही है. अधिकारी घर में आराम फरमाते हैं और पुलिस के जवानों को हर कन्टेनमेंट ज़ोन में ड्यूटी करने के लिए भेज दिया जाता है. इन पुलिस के जवानों को भी कोरोना वायरस से बचने के पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते हैं.

अब देखना है कि स्वस्थ्य विभाग और पर्यावरण विभाग की नींद कब टूटेगी और कब वो लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई करेगा.

बायोमेडिकल वेस्‍ट मैनेजमेंट कानून 

बायोमेडिकल वेस्‍ट मैनेजमेंट कानून 2016 के तहत पहले के बायो मेडिकल वेस्‍ट कानून 1998 के दायरे का विस्‍तार किया गया है. इसके तहत सरकारी और बड़े अस्‍पतालों के साथ नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब, दवा दुकानों, ब्लड बैंक, पशु चिकित्सा संस्थान को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है. 1998 में बने कानून के तहत अस्पताल के 150 किलोमीटर परिधि के दायरे में बायोमेडिकल वेस्‍ट ट्रीटमेंट प्‍लांट होना जरूरी था, 2016 में बने कानून में इस दायरे को कम कर 75 किलोमीटर कर दिया गया है.

कुछ अस्पताल खुले में कचरा जलाने का काम करते हैं. नतीजा संक्रमण सहित कई बीमारियों के फैलने की आशंका हमेशा बनी रहती है. बायोमेडिकल कचरा निष्पादन सभी अस्पतालों को करना है. बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्‍स 2016 के तहत बायो मेडिकल कचरा को खुले में नहीं फेंका जा सकता है. यह गैर कानूनी है. ऐसा करनेवालों को पांच साल की सजा या फिर एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. निजी अस्पतालों का लाइसेन्स भी कैंसल किया जा सकता है.

मेडिकल कचरे के निपटारे की प्रक्रिया

अस्पतालों से निकलने वाले अलग अलग अवशिष्ट पदार्थों को अलग रंगों के थैलों में डाला जाना चाहिए जिससे सबका अलग से निस्तारण हो सके.

पीला – ऐसे थैलों में सर्जरी में कटे हुए शरीर के भाग, लैब के सैम्पल, खून से युक्त मेडिकल की सामग्री ( रुई/ पट्टी), एक्सपेरिमेंट में उपयोग किये गए जानवरों के अंग डाले जाते हैं इन्हें बन्द चेंबर में जलाया जाता है या बहुत गहराई में दबा दिया जाता है.

लाल–  इसमें दस्ताने, कैथेटर, आई सेट.वी, कल्चर प्लेट को डाला जाता है. इनको पहले काटते हैं फिर डिस इन्फेक्ट कर के जला देते हैं.

नीला या सफ़ेद बैग–  इसमें गत्ते के डिब्बे , प्लास्टिक के बैग जिनमे सुई, कांच के टुकड़े या चाकू रखा गया हो उनको डाला जाता है इनको भी काटकर केमिकल द्वारा ट्रीट करते हैं फिर जलाते या दबाते हैं.

काला–  इनमें हानिकारक और बेकार दवाइयां, कीटनाशक पदार्थ और जाली हुई राख डाली जाती है. इसको किसी गहरे वाले गड्ढे में डालकर ऊपर से मिटटी दाल देते हैं.

द्रव – इनको डिस इन्फेक्ट करके नालियों में बहा दिया जाता है.

डिस इन्फेक्शन

इस प्रक्रिया द्वारा हानिकारक कीटाणुओं को हटा दिया जाता है. इसके कुछ विशेष तरीके हैं जैसे –

थर्मल ऑटोक्लैव– इससे गर्मी द्वारा कीटाणु नष्ट करते हैं,

केमिकल – इसमें फॉर्मएल्डीहाइड , ब्लीचिंग पावडर, एथिलीन ओक्साइड से कीटाणु नष्ट करते हैं.

रैडीएशन- अल्ट्रा वोइलेट किरणों द्वारा कीटाणुओं का नाश करते हैं.

स्टोरेज

जब तक थैले पूरी तरह भर न जाएँ तब तक अवशिष्ट पदार्थों को निश्चित जगहों पर थैलों में भरकर रखा जाता है. थैलों पर मार्किंग की जाती है और अलग सिक्योरिटी गार्ड रखा जाता है ताकि कोई बाहरी व्यति इनके संपर्क में न आ जाए 

ट्रांसपोर्ट

जो कर्मचारी मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन के काम में लगे होते हैं उन्हें बूट, दस्ताने,मास्क आदि लगाने होते हैं और ये ध्यान रखा जाता है कि ये पदार्थ ट्रोली से बाहर न फैलें. इन्हें खुली गाड़ियों में नहीं ले जाया जा सकता ATM में पैसा जमा करने वाली बन्द गाड़ियों की तरह मेडिकल वेस्ट की भी अलग गाड़ियाँ होती हैं. इनका ट्रांसपोर्ट सामान्य कचरे के साथ नहीं किया जाना चाहिए. 

फ़ाइनल डिस्पोज़ल

जो पदार्थ संक्रामक होते हैं उन्हें जलाया जाता है. जो संक्रामक नहीं होते हैं जैसे कागज उन्हें फिर से रीसाइकिल करके उपयोग कर लेते हैं.

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