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बिलासपुर : शाहीन बाग में याद किए गए चन्द्रशेखर आज़ाद

shaheen bag bilaspur

छत्तीसगढ़ बिलासपुर के ईदगाह चौक पर पिछले 39 दिनों से NRC, सीएए और NPR  के विरोध में शाहीन बाग का आंदोलन चल रहा है। दिल्ली के शाहीन बाग के समर्थन में देशभर में घरों से निकली महिलाओं की तरह बिलासपुर के शाहीन बाग में भी औरतें बड़ी संख्या में शामिल रहती हैं।

27 फरवारी को इस आंदोलन की शुरुआत स्वतन्त्रता सेनानी चन्द्रशेखर आज़ाद को याद करते हुए की गई। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अलफ़्रेड पार्क में अंग्रेजों के साथ मुठभेड़ में आज़ाद शहीद हो गए थे।

१९१९ में हुए अमृतसर के जलियांवाला बाग नरसंहार ने देश के नवयुवकों को उद्वेलित कर दिया। चन्द्रशेखर उस समय पढाई कर रहे थे। जब गांधीजी ने सन् १९२१ में असहयोग आन्दोलनका फरमान जारी किया तो वह आग ज्वालामुखी बनकर फट पड़ी और तमाम अन्य छात्रों की भाँति चन्द्रशेखर भी सडकों पर उतर आये। अपने विद्यालय के छात्रों के जत्थे के साथ इस आन्दोलन में भाग लेने पर वे पहली बार गिरफ़्तार हुए और उन्हें १५ बेतों की सज़ा मिली। इस घटना का उल्लेख पं॰ जवाहरलाल नेहरू ने कायदा तोड़ने वाले एक छोटे से लड़के की कहानी के रूप में किया है-

ऐसे ही कायदे (कानून) तोड़ने के लिये एक छोटे से लड़के को, जिसकी उम्र १५ या १६ साल की थी और जो अपने को आज़ाद कहता था, बेंत की सजा दी गयी। वह नंगा किया गया और बेंत की टिकटी से बाँध दिया गया। जैसे-जैसे बेंत उस पर पड़ते थे और उसकी चमड़ी उधेड़ डालते थे, वह ‘भारत माता की जय!’ चिल्लाता था। हर बेंत के साथ वह लड़का तब तक यही नारा लगाता रहा, जब तक वह बेहोश न हो गया। बाद में वही लड़का उत्तर भारत के क्रान्तिकारी कार्यों के दल का एक बड़ा नेता बना।

बिलासपुर के शाहीन बाग में भी बीते कल स्वतंत्रता सेनानी शहीद चंद्रशेखर आजाद के पुण्यतिथि को शहादत दिवस के रूप में मनाया गया चंद्रशेखर आजाद की तस्वीर को फूलों की माला पहनाकर उनके देशप्रेम और उनके बलिदान को लोगों ने याद किया।  

39 दिनों से चल रहा है आंदोलन

ईदगाह चौक बिलासपुर में लगातार 39 दिनों से शांति पूर्वक विरोध प्रदर्शन चल रहा है। दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज़ पर बिलासपुर में शाहीन बाग ईदगाह चौक में रोजाना शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक शहर के लोग इकट्ठे होते हैं। बिलासपुर शाहीन बाग में सभी धर्म के, सभी समुदायों के लोग अपनी-अपनी बात रखते हैं और केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 का विरोध करते हैं। NRC, CAA, और NPR का विरोध करते हुए यहाँ के लोग CAA  को वापस लेने और NPR की प्रक्रिया को भी स्थगित करने की मांग कर रह हैं। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष, युवा वर्ग, छात्र, वरिष्ठ नागरिक, बुद्धिजीवि, धर्म गुरु एवं आम नागरिक धरने में शामिल होते हैं।

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