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बिलासपुर : लॉकडाउन के बीच पुलिस की दादागिरी, पेट्रोल पम्प कर्मचारी पर बरसाए डंडे

Bukhari Petrol Pump

by Appu Navrang

बिलासपुर के बुखारी पेट्रोल पम्प में आज एक पुलिस अफसर ने गुंडों वाली हरकत कर दी. तारबहार थाने के आरक्षक ने बुखारी पेट्रोल पम्प कर्मचारी पंचराम को 26 मार्च की दोपहर डंडे से उस समय बुरी तरह पीटा जब वो काम पर था और पेट्रोल भर रहा था. cctv कैमरे से मिले वीडियो में आरक्षक की ये गुंडागर्दी साफ़ देखि जा सकती है. पंचराम की हालत खराब है उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

घटना की जानकारी मिलने पर तारबहार थाना प्रभारी सुरेन्द्र स्वर्णकार को आईजी दीपांशु काबरा ने लाइन अटैच कर दिया है और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने की बात कही है. मारपीट करने वाले आरक्षक का नाम समीर यादव बताया जा रहा है.

आपको बता दें कि पेट्रोल पम्म को उन ज़रूरी सेवाओं में शामिल किया गया है जो लॉक डाउन के दौरान भी खुले रहेंगे. याने के जब पेट्रोल पम्म कर्मचारी को आरक्षक ने पीटा तब वो कोई गैरकानूनी काम नहीं कर रहा था. वो भी उतना ही महत्वपूर्ण कार्य कर रहा था जितना कि श्रीमान आरक्षक कर रहे थे.

कर्फ्यू या लॉक डाउन जैसी आपात स्तिथियों में पुलिस पर ये ज़िम्मेदारी होती है कि वो कानून व्यवस्था बनाए रखे, लोगों से कानून का पालन करवाए और जो कानून का पालन न करे उस पर (कानूनी कार्रवाई) करे.

जी हां कानूनी कार्रवाई…इस शब्द को हम जानबूझकर बोल्ड अक्षरों में लिख रहे हैं. वो इअलिये कि कानून की नज़र में सब बराबर हैं, पुलिस भी बराबर, प्रधानमन्त्री भी बराबर और पेट्रोल पम्प का कर्मचारी भी बराबर. हम सब कानून के दायरे में हैं. कोई भी कानून से बड़ा नहीं है.

हमारे संविधान ने देश चलाने का जो सिस्टम बनाया है उसमें सब की अपनी अहमियत और सबकी अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं. इस लॉकडाउन वाली आपात स्थिति में जैसे पुलिस का काम महत्वपूर्ण है वैसे ही दूसरी सेवाओं में लगे कर्मचारियों का काम भी महत्वपूर्ण है. घर से बाहर निकल कर इस मुश्किल समय में सेवाएं देने वाले हर व्यक्ति को जान का उतना ही खतरा है जितना पुलिस अधिकारी को है.

मारपीट की ऐसी ही घटनाओं के कारण समाज में पुलिस की छवि यों भी बहुत अच्छी नहीं है. हमारी सलाह है कि पुलिस को छवि सुधारने वाले इस मसले पर ध्यान देने की ज़रुरत है. हालाँकि हमारी ये सलाह आला अधिकारियों को फ़िज़ूल भी लग सकती है पर जो काम सूजबूझ से हो जाता है वो डंडे के जोर पर अक्सर बिगड़ जाता है. वैसे सूझबूझ भी एक बड़ा अच्छा शब्द है.

cgbasket.in के लिए भूपेंद्र नवरंग की रिपोर्ट

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