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बिलासपुर : बाल संप्रेषण ग्रह में नाबालिग की मौत पर निखिल की मां पिता ने एसपी को दी शिकायत .अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही की मांग .

आज बाल संप्रेशण ग्रह में नाबालिग निखिल की संदिग्ध मौत के संबंध में एसपी बिलासपुर से मिलकर शिकायत. पत्र प्रस्तुत किया और निखिल के परिवार की तरफ से अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने सिटी मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर गवाही देने के लिये समय और तारीख तय करने की मांग की .

एस पी बिलासपुर को लिखे पत्र मे निखिल के पिता और मां ने विस्तार से घटना क्रम का विवरण दिया है कि नाबालिक बेटे की पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत पर दोषी पुलिसकर्मी से लेकर दोषी अधिकारियों तक पर कड़ी कानूनी कार्यवाही हेतु शिकायत दर्ज की जावे. एसपी से मिलने वालो मे माता पिता के साथ एडवोकेट प्रियंका शुक्ला और रोशनी बंजारे भी उपस्थित थे।

हमारे बेटे निखिल यादन पिता राजेश यादव उम्र लगभग 15 वर्ष यो रारकण्डा थाना के आरक्षक गण ( लघर एवं अन्य ) द्वारा हमारे नाबालिक बेटे को घर से चोरी किया है कहकर उठा ले गये थे । निखिल के अलावा दो अन्य लोकेश व एक ओर लड़के को साथ उठाये थे । हमको बोले थे कि पूछताछ के लिए थाने ले जा रहे हैं चूंकि पहले भी निखिल को ऐसे ही दो बार ले जाया गया था और फिर बाल संप्रेक्षण गृह सरकंडा छोड़ दिया जाता था , इसलिए हम सोचे की शायद थाने से पुछताछ करके बाल संप्रेक्षण गृह छोड़ दिया जायेगा । हमें लगा कि बार – बार ऐसे ले जाते है हमारी बेज्जती होती है . पर मंगलवार के दिन बाल संप्रेक्षण में गुलाकात होती है यह बात हमें पता चला , जिस दिन निखिल को पुलिस लेगई थी उसी दिन लोकेश का भाई शाम को घर आया था कि चलों खाना दे आते है थाने में पहले भी जब ले जाते थे तो हम खाना देने जाते थे , पर इस बार घर से कोई नही गया और खाना भी बना था , इसलिए 20 रूपये मेने लोकेश के भाई को दिया कि कुछ खिला देना .

पुलिस द्वारा हमें नहीं बताया गया कि निखिल को कहा ले जा रहे है , इसलिए पहले की तरह मंगलवार को सीधा बाल सम्प्रेक्षण गृह गई की । मुलाकात हो जायेगी और जब में वहां गई तो पता चला कि निखिल तो नहीं है ही नहीं .

जिस पर हम परेशान हो गये कि आखिर निखिल कहा चला गया और धर भी नहीं आया , वहीं से अनिता व निखिल की दादी सीधे सरकंडा थाना जाकर पूछते हैं कि कहा ले गये है । वहां जाकर आधार कार्य और फोटो भी दिखाई और पूछा कि निखिल को लाये थे घर से . तो उसके बाद कहां ले गये निखिल को , वहां बैठे पुलिसकर्मी ने चिडकर जवाब देगा कि जाओ खुद. पता कर लो कि वहां कहाँ गया हैं और बोले कि आधार कार्ड की कोई मान्यता नहीं हैं .हमारे द्वारा बोला गया कि
अभी उसकी उम्र भी पूरी नहीं 15 साल का ही हैं , उसे बाल न्यायालय की जगह कहां ले गये हो , जिस पर पुलिस कर्मी द्वारा ठीक से जबाब नहीं दिये और गोल मोल जवाब दिया कि शायद बड़े जेल में हैं ।

अनीता ( मां) द्वारा बोला गया कि उसको बड़े जेल केसे ले जा सकते हो वो बालिग नहीं है तो पुलिस के लोग बोले की ज्यादा जुबान मत लडाओं और भगा दिया ।

जिसके बाद अगले दिन निखिल दादी सीत कुंवर और अनिता ( माँ ) दोनों एक बार फिर साहब से मिलने गये , और एक आवेदन बनाकर लगाई और वापस घर आ गई । पर निखिल कब बाल स्प्रेक्षण गृह भेज दिया है इराकी भी जानकारी में नहीं दिये ।

अचानक शनिवार को फिर से सरकंडा थाने से दो पुलिस वाले आये और बोले ति तुम्हारे बेटे को बड़ी जेल से बाल संप्रेक्षण गृह ले आये है चलो पहचान कर लो और उराको ले आओ ,.

हम पुलिस की गाडियों में बैठकों वहां गये वहां देखा कि एक कगरे में जहां सिर्फ़ निखिल एक गाड़े रंग के गमछे से लटका हुआ था , और में और अनिता बेहोश होकर गिर गई और मेरे ( पिता ) द्वारा देखा कि एक बिस्तर जमीन पर पड़ा हुआ है कमरे में कहीँ कुर्सी नही थी कि जिसके सहारे तो फासी लगा सके थोड़ी ऊचाई पर निखिल ती लाश लटक रही थी ।

निखिल ने जो कपडे पहने थे वह भी उसके नहीं थे , उस गले में फांसी में जो गमछे लिपटा था वह भी उसका नहीं था। वो कभी भी गमछा लेकर नहीं चला था ।

उसे उतारकर पोस्ट मार्टम के लिए ले जाया गया और लगभग 1 घंटा तक पोस्ट मार्टम में हमें अस्पताल के बाहर पन्नी में पैक बॉडी दे दी गई । पहले भी निखिल को जब ले जाया गया तो लौटकर उसने बताया था कि बाल संप्रेक्षण गृह में बहुत मारपीट होती है पर हमने यह कहकर टाल दिया था कि गलती करोगे या गलत संगत में रहोगे तो मार तो खाओंगे , हमें नही जानकारी थी कि इस हद तक टार्चर किया जाता है । आखिर क्यों बिना जांच के उसे सेंट्रल जेल भेजा गया , पहली बात यह कि , नहीं लगता कि निखिल ने फांसी लगाई होगी , पर अगर लगाई भी तो उसके साथ ऐसा क्या घटित हुआ कि उसने यह कदम उठाया । आपसे निवेदन है कि उपरोक्त पूरे मामले की निष्पक्ष जांच व कड़ी कानूनी कार्यवाही कर दोषी जनों को दण्ड़ दिलवाये जाने की हमारी मदद करें .

अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने सिटी मजिस्ट्रेट को लिखा पत्र

कि बाल सम्प्रेषण गृह बिलासपुर में रहते हुए पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत पर गठित जाँच कमेटी के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करवाने बावत

की बीते 27/4/2019 दिनांक को एक नाबालिक निखिल यादव पिता राजेश यादव निवासी अशोक नगर भूखम खदान की पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत की खबर अखबारो के माध्यम से पता चली की जिसके बाद से पीड़ित परिवार के संपर्क में हूँ , अखबारों द्वारा यह भी खबर हुई की उपरोक्त प्रकरण में एक जाँच कमेटी भी गठित हुई है ,जिसके जांच अधिकारी आपको बनाया गया है। परिवार को कमेटी के संबंध में सूचना नही होने से आज दिनांक तक बयान नही हो सके है । इसके अलावा एक नाबालिक जो खुद को सम्प्रेषण गृह में प्रताड़ित किया गया है , वह भी इसमें मुरक गवाह के तौर पर अहम भूमिका निभा सकता है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है की पीड़ित परिवार को अपना बयान देकर अपने पक्ष को रखे जाने हेतु एक दिनांक व समय प्रदान कराए जाने की कृपा करें

जिससे मामले की निष्पक्ष जांच की जाने व पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके .

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