दलित मानव अधिकार वंचित समूह हिंसा

बिलासपुर . दो युवकों के साथ भीड़ की हिंसा.तोरबा थाने ने रिपोर्ट लिखने से किया इंकार कहा सरकंडा थाने जाईये.दर दर भटक रही हैं मां अपने बेटे के साथ न्याय के लिये.

दो युवकों के साथ भीड़ की हिंसा.तोरबा थाने ने रिपोर्ट लिखने से किया इंकार कहा सरकंडा थाने जाईये.
बिलासपुर में भीड़ द्वारा दो दलित युवको के साथ जानवर चौरी का विशुद्ध झूठा आरोप लगाकर कुछ गुंडेनुमा लोगों द्वारा बुरी तरह ,लाठी ,घूंसे और तलवार से लगातार क ई घंटे मारपीट का वीडियो खुद गुंडो ने बनाया और सोशल मीडिया में जारी कर दिया .

युवक अभिषेक मोंगरे की मां माधवी मोंगरे लगातार चार दिन से पुलिस अधिकिरीयों के पास जाकर बता और लिखित में आवेदन दे रही है कि पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ कार्रवाही करने की जगह पीडित युवको को ही पकड कर जेल भेज दिया. और तो और पुलिस ने मेरे बेटे का कोई मेडिकल भी नहीं कराया बल्कि एक इजेकुलेशन लगा दिया था .्और थाने में तथा घटना स्थल पर बेटे के साथ मारपीट भी की.

मां ने पूरी घटना कि जांच की मांग करते हुये एसपी को ज्ञापन दिया .सामाजिक कार्यकर्ता प्रिंयंका शुक्ल भी उनके साथ पुलिस के पास शिकायत करने साथ रहीं.
आज जब अभिषेक की मां तोरबा थाने इन गुंडो के खिलाफ़ एफआईआर करने गई तो थानेदार ने रिपोर्ट करने से इंकार कर दिया जब कि अभिषेक और उनकी मां उसी थाना क्षेत्र आरटीएस कालोनी में रहती हैं .तोरबा थाने ने कहा कि आप सरकंडा थाने जाईये.और उन्हें वापस कर दिया.

अधिवक्ता प्रिंयंका शुक्ला ने कहा कि जहाँ आवेदक रहता हैं वहीं एफआईआर दर्द की जाती हैं .जब कि सरकंडा थाने में तो उसके बेटे को गुंडो और पुलिस ने मारपीट की हैं. यह बिल्कुल गलत और गैरकानूनी भी हैं.

सही तो यह हैं कि पुलिस ने भीड़ द्वारा मारपीट का केस बनाया ही नही जबकि युवकों के खिलाफ़ गंभीर आपराधिक धाराये लगाई गई हैं .

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