दलित महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार हिंसा

बिलासपुर : दो युवकों के साथ सामूहिक मारपीट में अपराधियों को बचा रही है पुलिस .इसे ही माँब लिचिंग कहते है ज़नाब .

माँँब लिंचिग शब्द से घबराई पुलिस और कुछ मीडिया यह सिद्ध करने में लगे है कि यह आपसी लड़ाई और चोरी का मामला है जिसे कुछ गैर जिम्मेदार मीडिया माँब लिंचिग लिख रहे है .

पहली बात तो यही हैं कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी आरोप में एक भीड़ सुनियोजित तरीके से लगातार कई घंटे लात घूंसै डंडे और तलवा लेकर मारते है और लगभग जान से मारने की बात करते है और यह भी कहते है कि इसे.जान से मार दो.पुलिस को पन्द्रह बीस हजार दो कर निबटा देंगे और इस पूरी.घटना का वीडियो जारी करते है. चार पांच घंटे की पिटाई के बाद पुलिस अपराधियों की जगह पिटने वाले दोनों युवकों को ही जेल भेज देती हैं. यह माँब लिंचिग नही ंं है तो क्या है।यदि वह दोनों बच्चे मर जाते तब ही इसे माँब लिंचिग कहते ।

पिटने वाले अभिषेक की मां पिछले पांच दिन से दर दर भटक रही हैं ,पुलिस ,कलेक्टर से लेकर पत्रकारों से जाकर अपनी व्यथा बता रही हैं कि न तो उसके यहाँ कोई सूअर का धंधा होता हैं और न उसके बेटे का चोरी से कोई सबंध है ,फिर भी उसकी कोई नहीं सुनता. जो पिटे उसके खिलाफ गंभीर धाराये लगाई जाती है और मीडिया के भारी दबाव से जब सरकंडा पुलिस अपराधियों के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज करती हैं तो मामूली धाराये लगा कर उन्हें बचाने की कोशिश करती हैं।

जो लोग और मीडिया इस घटना को आपसी विवाद और चौरी का मामला कह रहे हैं और माँब लिंचिग शब्दों के खिलाफ़ लिख रहे हैं वे कृपया एक बार फिर पिटाई का वीडियो और उसकी मां का वीडियो देख लें.

कल सरकंडा थाने द्वारा की गई एफआईआर पर सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने कहा .

मारपीट करने वाले में शामिल कुछ लोगो पर साधारण सी FIR कर ली गई है, पर बता दू कि पीड़िता मा ने अभी मुझे जानकारी दी है कि थाने वालो ने उनका लिखित शिकायत नहीं लिया है और अपने मन से लिख दिया है।
बार बार यही कह रहे थे कि पुलिस वालो से तुमको आखिर क्या दिक्कत है? उन्होंने नहीं मारा है तुम्हारे बेटे को, उसको दौड़कर पकड़ने से चोट लगी है, और थानेदार बोल रहे थे कि वीडियो कहा से आया तुम्हारे पास……

थानेदार संतोष जैन जी
आपको आखिर क्या दिक्कत है कि कोई लिखित शिकायत नहीं ली आपने, और जिन पुलिस वालो ने मारा है, जो 112 पर उस समय तैनात थे, उनके बारे में जानकारी करके आखिर क्यों नहीं अन पर कार्यवाही करना चाहते..?

वीडियो कहा से आया ये मुद्दा आखिर क्यों है आपके लिए? जबकि घटना आपका मुद्दा होना चाहिए।

मां ने बार बार हर जगह बोला है कि उनकी पड़ोस कि महिला ने उन्हें आकर लगभग 11 30 बजे दिन में आकर जानकारी दी थी, पर आपने FIR में गलत क्यों लिखवाया है??
आखिर आप सारे आरोपियों को क्यों बचाने में लगे है??

एफआईआर की कापी.


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