राजनीति

बिलासपुर : आमचुनाव के परिणाम न केवल शोकिंग है बल्कि आशंका के अनुसार भी .मिले, बैठे आत्मलोकन किया और सतत संघर्ष का संकल्प भी

बिलासपुर / यह आम चुनाव परिणाम न केवल शोकिग थे बल्कि हमारी कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठाते थे. पिछले पञ्च साल के जनविरोधी नीतियों के विरोध के बाबजूद हम आम जन तक क्यों नहीं पहुच पाए ,इन सब  चिन्ताओ के आत्मलोकन और कहाँ क्या कमी रह गई इन सब पर विस्तार से चर्चा करने के लिए आज बिलासपुर में कुछ सामाजिक और राजनेतिक कार्यकर्ताओ ने बैठक की ,आगे की योजना पर ज्यादा चर्चा तो नही हो पी लेकिन चुनाव पर सबने अपनी बात जरुर रखी .आगे फिर  राजनेतिक दलों के बिना एक मंच या संघठन बनाने पर प्रारम्भिक सहमती बनी .जहाँ अपनी राजनेतिक पहचान के साथ मिलकर चुनोतियों का सामना करने और बेहतर वैकल्पिक मंच और सतत संघर्ष की बात की गई.यह भी तय किया गया की हम सब और लोगों के साथ मिलकर महीने ,सप्ताह नियमित बैठें बात करें और आगे बढ़ें .

आज की बैठक में उपस्थित रहे ,नन्द कश्यप , प्रियंका शुक्ल ,नवल शर्मा ,कपूर वासनिक ., शाकिर अली,संजय अग्रवाल,प्रथमेश मिश्र ,संपा सिकदार ,डी डी सिंह ,देवेन्द्र गुप्ता ,सुरेश बाबु पचोरी ,राम आश्रय कश्यप ,आसिम तिवारी , जे के कर ,नीलोत्पल शुक्ला ,और डा. लाखन सिंह आदि .

चर्चा में जेके कर ने कहां की निश्चय ही परिणाम बेहद आश्चर्यजनक और अनुमान के प्रतिकूल है थे. पुरे पांच साल लगातार किसानो ,मजदूरों तथा छात्रों नोजवानो ने आन्दोलन किया इसके बाबजूद ऐसे परिणाम जरुर निराशा जनक थे,दुसरे दलों के साथ हमने भी राहुल गाँधी से कुछ ज्यादा ही उम्मीद कर ली थी .आसिम तिवारी ने कहा कि यह जनादेश सभी संवेधानिक संस्थाओं को काबू में करके मिडिया को पूरी तरह पालतू बना कर लाया गया है. एवीएम भी शंका से अछुता नहीं हैं, विपक्ष भले ही अपना कम करे किन्तु हम सबको मिलकर एक बड़ा जनांदोलन खड़ा करना ही होगा .और इसके लिए अभी से तैयारी करनी पड़ेगी. रामाश्रय कश्यप जो विशेष रूप से रतनपुर से बैठक में पहुचे थे उन्होंने कहा की यह हमें चोंकाने वाला परिणाम तो था ही .इन लोगों ने साम  दाम दंड भेद के साथ यह हासिल किया है,उन्होंने कहा की यह तो सही है की मोदी ने हर प्रकार की चोरी की लेकिन जब तक सिद्द नहीं किया जाये तब तक कुछ कहा नहीं सकते .हमें मतदाताओं को जागरूक करना होगा की चोरी को पकड़ना जरुरी है,

प्रथमेश मिश्र ने कहा कि हम भी उम्मीद ज्यादा कर लिए थे ,जनता के मूड को भी भांप नहीं पाए .जनता को जागरूक करने भी हम लोग कामयाब नहीं हो पाए ,और हमने उनसे उम्मीद कर ली .हमें जनता के बीच जाना चाहिए और उनसे पूछना चाहिए की हम क्यों असफल हुए . सुरेश बाबू पचोरी ने कहा की एवीएम से सेटिंग नहीं हो सकती ,मोदी बेस्ट कम्युनिकेटर है ,हमें उनके संगठनो से भी सीखना चाहिए की वह कैसे काम करते हैं.उन्होंने यह भी कहा की आन्दोलन कभी सफल नहीं होते .मुझे ऐसे ही परिणाम की उम्मीद थी.देवेन्द्र गुप्ता ने कहा की हमें अपनी क्षमता पर भी विचार करना चाहिए . डी डी सिंह ने कहा की हमें सबसे पहले संघठन मजबूत करना चाहिए बिना उसके कुछ नहीं हो सकता .संजय अग्रवाल ने कहा की हिन्दू ,राष्ट्रवाद आदि का मुद्दा उठा कर मोदी को करिश्माई व्यक्तित्व खड़ा कर दिया .पिछले पाँच साल की असफलता को लोगों ने भुला दिया . कांग्रेस भी कमजोर सिद्द हुई और उसने कई राज्यों में सही ढंग से समझोता नहीं किया .इसका भी यह परिणाम हुआ .

शाकिर अली ने कहा की मुझे सही में उम्मीद नहीं थी ,गठबंधन से काफी उम्मीद थी लेकिन जनता ने मोदी को बहुत ताकत दी है की अब ये तानाशाह की तरह काम करेगा इसमें कोई शक नहीं हैं..एवीएम को दोष देना बेकार है.नए वोटर ने एक पक्षीय वोट किया मोदी को ,उनपर राष्ट्रवाद का बखूबी प्रभाव पड़ा .मोदी पुरे समय चुनावी मूड में बने रहे .विपक्ष मुद्दा देता रहा .सोशल मिडिय में भी अपनी भुमिका मोदी के लिए अदा की  और समाज को भड़काने का काम किया .इसके ही परिणाम है की वही सरकार बनी जिसके खिलाफ हम लोग लड़ते रहे . कपूर वासनिक ने कहा की किसी ने नहीं सोचा था की ऐसे परिणाम आयेंगे ,षड्यंत्र और मोदी पर्यावाची बन गए .छद्म राष्ट्रवाद का हवा खड़ी  कर दी ,फासीवाद पहले काल्पनिक दुशमन खड़ा करता है फिर उसके इर्द गिर्द दुश्मनी बुनता है यही अबकी बार भी मोदी ने किया .पुरे देश में पिछले 75 साल से धर्मिक  धुर्वीकरण किया गया और फिर आज उसकी फसल भाजपा ने काट ली. .नवल शर्मा ने कहा की चुनाव परिणाम के संकेत तो दिख रहे थे ,कांग्रेस की विचारधारा का खात्मा भी है यह चुनाव.30,35 साल के होमवर्क का नतीजा हा यह चुनाव का परिणाम .घोषित पूंजीवाद को लाने की घोषणा के साथ लुटा है देश को .आप कल्पना भी नहीं कर सकते की इस चुनाव में कितना खर्च किया गया होगा .

प्रियंका शुक्ल ने कहा की इस चुनाव में महागठबंधन ने सिर्फ अपने लिए काम किया वो किसी विचारधारा का मेल नहीं था बल्कि सिर्फ सत्ता को प्राप्त करने के लिए था.कही कोई वैज्ञानिक सोच नहीं बन पाई बल्कि सिर्फ धार्मिक आधार पर यह जीत हासिल की गई.राष्ट्रवाद का नारा सफलतापूर्वक चला और जीत हासिल कर लिया .कांग्रेस से बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती .पार्टी नेता अपने कार्यकर्त्ता का ही सामना नहीं कर पाए .

नन्द कश्यप ने पहले सत्र का सञ्चालन करते हुए कहा की विपक्ष का खोखलापन ही इस हार के लिए जिम्मेदार है. मेने पहले ही कहा था की या तो मोदी 30,35 पर सिमट जायेंगे या फिर 400 के पार भी जा सकते है ,हमें इसकी आशंका थी और वही हुआ भी  एवीएम की बातें बेकार की है .में जानता हूँ की एवीएम को राष्ट्रिय स्तर पर हेक नहीं किया जा सकता ..हमें ऐसे परिणाम की ही उम्मीद की  आशंका था .मोदी ने अपने आप को गरीब के साथ जोड़ लिया ,गरीब ने ईमानदारी के साथ मोदी को वोट किया .हम जब मोदी की बात करते है तब हमें उनके वोटर की भी ख्याल,रखना होगा .पूंजीवाद बहुत षड्यंत्र कारी होता है .कार्पोरेट ही प्रियंका गाँधी को लेके आये जिसने राहुल के गठबन्धन की पहल को प्रभावित किया और ज्यादातर जगह अकेले लड़ने का निर्णय लिया गया जो उन्हें नुक्सान पहुचाया .कांग्रेस को चाहिए था कि राहुल को प्रधानमंत्री का केंडीडेट घोषित करते ,लोगों के सामने मोदी के सामने नो मोदी था .

डा.लाखन सिंह ने कहा की यह परिणाम मेरे अनुमान के ठीक विपरीत आये .मुझे लगता था की पाँच साल जिस तरह के जन विरोधी काम हुए उसके परिणाम जरुर इस चुनाव में दिखेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं. समाज में जो धार्मिक विभाजन किया गया वह लगता है की स्थाई रूप लेता जा रहा है, यह विभाजन संघ के 75 साल के काम का परिणाम है.यह विभाजन बहुत निराश करने वाला है. एवीएम की बार भले ही में नहीं मानता लेकिन अमित शाह का जो षड्यंत्रकारी छवि है वह यह आसानी से मान लेता है की अमित शाह और मोदी कुछ भी करके चुनाव जीत सकते था और वही किए भी , हमें तो यह लगता है की यदि भाजपा या एनडीए के 150 भी आते तो भी सरकार मोदी ही बनाते .

इसी बैठक में बात होनी थी की आगे की योजना कैसे बने ,इसके लिए कुछ बिखरी बिखरी चर्चा जरुर हुई लेकिन यही तय किया गया की अगली मीटिंग में इन सभी सुझाव पर भविष्य के कार्यक्रम पर बात होगी कोशीश करेंगे की इस ग्रुप को और विस्तार किया जायेगा और अगली बैठक यही की जाएगी .यह जरुर सहमती बनी की यह ग्रुप गैर राजनेतिक दलों का होगा .

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