कला साहित्य एवं संस्कृति

बांगलादेश प्रगति लेखक संघ ःः ○○ढाका में हुए तृतीय राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित किए गए प्रस्ताव ○○

बंगाली से हिन्दी अनुवाद शीतेन्दनाथ चौधरी 

 15 मार्च 2019, ढाका विश्वविद्यालय सभागार 

साहित्य हमारी कोमल अनुभूतियों को जागृत करने के दौरान मानवीय बनाता है। कला एवं साहित्य इसीलिए हमेशा सभी प्रकार की अमानवीयता, अन्याय व अत्याचार के विरुद्ध मुखर हो उठते है। अमानवीयता के खिलाफ मानवीयता की लड़ाई इसीलिए ऐतिहासिक है। बांग्लादेश का मुक्तियुद्ध मानवीयता की लड़ाई में मील का पत्थर है। मुक्तियुद्ध की चेतना में हम आज भी लड़ाई किए जा रहे हैं धर्मांधता, साम्प्रदायिकता, मूलतत्ववाद व शोषण के खिलाफ। आज मानवमुक्ति का संघर्ष समाज व राष्ट्र में अन्याय-अविचार, शोषण-उत्पीड़न के प्रति लेखकों-कलाकारों की मुक्तविचार व मत प्रकट करने की लड़ाई के साथ जुड़ा हुआ है। लेखकों की सृजनशीलता ही सारे विश्व के उत्पीड़ित मनुष्यों के पक्ष में खड़े होकर मानवमुक्ति के संघर्ष को तेज कर पाएगी।

(1) बांग्लादेश के प्रत्येक लेखक एवं नागरिक की विचार व्यक्त करने की आज़ादी सुनिश्चित करने के संघर्ष में बांग्लादेश प्रगति लेखक संघ दृढ़ रहेगा।

(2) प्रत्येक लेखक की व्यक्तिगत व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्र को उन्मुख करने की दिशा में प्रगति लेखक संघ अपनी भूमिका निभाएगा।

(3) लेखकों को यथोचित मानदेय तथा किताबों की रॉयलटी सुनिश्चित करने हेतु प्रगति लेखक संघ सक्रिय हस्तक्षेप करेगा।

(4) लोक एवं आदिवासी भाषा, साहित्य तथा संस्कृति के संरक्षण एवं विकास हेतु प्रगति लेखक संघ समुचित रूप से उद्यमशील होगा।

( 5) निर्धन तथा हाशिए पर के साधारण लेखकों को सहारा देने की दिशा में प्रगति लेखक संघ सचेष्ट रहेगा।

(6) दार्शनिक व वैचारिक धरातल पर लेखकों के विकास हेतु पाठागार तथा लघु पत्र-पत्रिका आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए प्रगति लेखक संघ प्रतिबद्ध है।

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