कला साहित्य एवं संस्कृति कविताएँ

बहुत सुखद होता है अपनेपन का वह एहसास ःः सविता तिवारी

4.12.2018

“एहसास ” ●

कभी कभी किसी अपरिचिता से मिलना बहुत ही खूबसूरत सी ख़ुशी का एहसास करा जाती है, लगता ही नहीं कि अपरिचिता है, प्यारे से चेहरे पर,प्यारी सी मुस्कान उनके अपने होने का एहसास करा जाती है,
बहुत सुखद होता है अपनेपन का वह एहसास,
जिसमें कोई शर्त नहीं होती,
न ही कोई दरकार,
अपनी सी अपरिचिता से बातें कर मन की उदासी, तन्हाई,
कहीं खो जाती है,
मन उमंगो, तरंगों और खुशियों के इंद्रधनुषी रंगों के साथ,
मधुर मुस्कान मेरे चेहरे पर ले आती है, सच में
” बहुत ही खूबसूरत होता है, एक खूबसूरत अपने के साथ, अपनेपन का खूबसूरत एहसास” “सवि”

**

अंतर्मन ☆

मैं दोहरे चरित्र में नहीं जी पाती हूं,
इसलिए अक्सर ही अकेली नजर आती हूं,
निश्चल अनुराग प्रेम से भरा सवि का अंतर्मन,
तकदीर उसकी हमेशा मीरा ही बन जाती है । “

**

अनुराग प्यार की अविरलता, समाई हुई मैं ह्रदय में
पर दूर हो तुम भी,
और दूर हैं हम भी .

**

सविता तिवारी 

Related posts

जिन्नाह ,संघ और भगतसिंह

News Desk

कोंडागांव ःः “समकालीन” लोक सांस्कृतिक सम्मलेन .संवाद -4

News Desk

बस्तर का सर्वाधिक बुरा दौर -दिवाकर मुक्तिबोध सीजी खबर

cgbasketwp