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बड़ा सवाल ? गोलियां खाकर जीवित बचे ग्रामीणों ने बताई दहशत भरी रात की दास्तान.

एडसमेटा में अगर माओवादी बैठक हो रही थी तो महिलाएं निशाने पर क्यों नहीं आईं

पत्रिका न्यूज नेटवर्क . जगदलपुर

सीबीआई की टीम एडसमेटा में ग्रामीणों से चर्चा कर रही थी तो यह बात भी सामने आ कि जिस रात हमला हुआ उस वक्त ग्रामीण बीजपंडुम मना रहे थे । इस कार्यक्रम में सिर्फ पुरूष ही शामिल होते हैं । महिलाओं को इसमें आने की मनाही रहती है । जबकि घटना के बाद पुलिस ने दावा किया था कि यहां माओवादी बैठक हो रही थी , ऐसे में ग्रामीणों में सवाल उठाया कि माओवादी बैठक में तो महिलाएं भी शामिल रहती हैं , तो इतने बड़े हमले में एक भी महिला निशाने पर क्यों नहीं आई । ग्रामीणों के इस तर्क को सीबीआई ने गंभीरता से लिया है .माना जा रहा है कि सीबीआई इस एंगल पर अपनी जांच आगे बढ़ाएगी । अगस्त माह में गंगालुर में से जो ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जायेंगे उसमें भी इसे शामिल किया जायेगा.

मारे गए लोगों को छोड जवान मासा को अपने साथ ले गए और करीब से मार दी थी गोली :

बुधरी ने बताया कि घटना के बाद पुलिस के जवान एक ग्रामीण कारम पासा को अपने साथ ले गए । इस वक्त तक मास जिंदा था । मासा को जवानों ने करीब से गोली मारी और उसे माओवादी बता दिया । ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस केवल मासा को अपने साथ ले गई थी .
बाकी के ग्रामीणों का शव घटनास्थल पर ही
पड़ा था .दूसरे दिन गांव की महिलाये घटना स्थल पर पडे शवों को खाट पर डालकर गंगालूर पहुची.

जवान की मौत अपनों की गोली से हुई

इस घटना में एक जवान की भी मौत हुई थी .जब ग्रामीणों से पूछा गया तो उन्होने कहा कि तीन तरफ से घेरकर गोलियां बरसाई जा रही थी .इसमे एक जगह ऐसी भी आती है जिसमें जवान आमने सामने की स्थिति में थे ।एसे में अपनों को ही गोली उसे लगी होंगी । क्यों कि पंडुम की जगह में तो कोई भी हथियार नहीं था ।

पुनेम सोमलू ने कहा कि ,

कंधे में गोली लगते ही कुएं की तरफ भागा । बीजपंडुम में शामिल होने के लिए अपने चाचा के साथ पहुंचा था । पूजा चल ही रही थीं । तभी तीन तरफ से गोली चलने लगीं । चारों.तरफ से सब जमीन में गिरने लगे और भागने लगे । एक गोली मेरे कंधे मे लगी जिसके बाद घटना स्थल से नीचे 300 मीटर नीचे की और गिरते पड़ते भागा और कुये.में जाकर गिर गया .

कारम छोटू बोले

रात को पटाखे की आवाज़ के साथ ही मेरी जांघ मे गोली चलते हुये बगल से निकाल गई और में जमीन पर गिर गया . और चारो तरफ अफरातफरी मच गई और मे खेत की तरफ मेढ मे छिप गया . तब समझा की गोलीचल रही है. इसके बाद अफरा तफरी मच गई ।
तब समझ में आया कि गोली चल रही हैं .गोलियों की आवाज बंद तो उस हालत में पहाड़ी में जंगल मे भाग गया दूसरे दिन वापस आने की हिम्मत जुटा पाया हूँ ।

कारम आयतू

कमर में गोली लगते ही हो गया बेहोश

पंडुम में शामिल होने में देर में गया था । जैसे ही पाया गोलीबारी शुरू हो गई . शुरूआत में ही गोली कमर में लगी और में बेह़ोश हो गया । जब आंख खुली तो खून से सनी लाशें दिखी । उसी दौरान एक घायल को वर्दी में जवान लेकर जा रहे थे । दूसरे दिन तक शरीर में गोली लिए जंगल में छिपा रहा । इसके बाद गांव के लोग मुझे गंगालूर तक ले गये .

कारम सन्नू

महिलाएं खाट पर लिटा ले जा रहीं थी.

में कुएं से पानी ला रहा था , तभी गोलियां चलने लगी में गोली से बचके जान बचाने के लिए भागा .लेकिन इधर मी गोली चल रही थी । भागकर खेत में बेह़ोश होकर गिर पड़ा । दूसरे दिन जब आया तो देखा कि गांव की महिलाएं खाट मे लिटा कर गंगलूर की तरफ को ले जा रही थी . जब वापस में लौटने पर बताया कि गांव में भी पुरुष नहीं है और .सब लोग मारे गए हैं ।

अपनों के शव उठाने दूसरे दिन गांव कोई मर्द ही नहीं बचा था

महिला कारम पोदी बताती हैं रात को जब पटाखों की आवाज आई तो उस वक्त गांव महिलायें ही महिलाएं थी वे इस आवाज की तरफ भागी ,उन्होंने देखा कि वर्दीधारी जवान गोलियां बरसा रहे थे ।

जान बचाने वे जंगल में ही छिपकर खूनी मंजर देखने लगीं । दो कलाद जवान जय मां से ने मौके पर पहुंची । चारों लाशें बिखरी थी । कुछ ही देर यहां गांव के सभी लोग इकठ्ठी हो गुई । इसमें उनके पति की भी मौत हो गई । दूसरे जब घायलों और शव को ले जाने की बात सामने आई तो गांव में कोई भी पुरूष नहीं ं था । घटना के बाद सभी अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकाने ढूंढ कर छिपे थे ।


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