अभिव्यक्ति

फौजी अफसरों के बयान अब साम्प्रदायिक और राजनीतिक भी . : सुनील कुमार ,संपादकीय सांध्य दैनिक छतीसगढ

23.03.2018

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत एक बार फिर अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों और विवाद में हैं। उन्होंने असम के एक राजनीतिक संगठन एआईयूडीएफ का नाम लेकर कहा कि यह संगठन तेजी से आगे बढ़ रहा है, और जनसंघ के दिनों से लेकर आज तक भाजपा जिस रफ्तार से आगे बढ़ी है, उसके मुकाबले ऑल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम का यह संगठन आगे बढ़ा है। असम में यह संगठन मुस्लिमों की आवाज उठाता है। और जनरल रावत ने यह पूरी चर्चा इस संदर्भ में की कि पड़ोसी देशों से जिस तरह कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए आतंकी भेजे जाते हैं, उसी तरह उत्तर भारत में अशांति फैलाने के लिए अवैध आबादी को भारत में भेजा जाता है। उनके इस बयान के बाद भारत की सबसे बड़ी मुस्लिम पार्टी एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि सेना प्रमुख को राजनीतिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए, उनका काम किसी राजनीतिक पार्टी पर कमेंट करना नहीं है, लोकतंत्र और संविधान में सेना हमेशा जनता द्वारा निर्वाचित सरकार के तहत काम करती है।

यह पहला मौका नहीं है जब एक बड़े फौजी अफसर ने राजनीतिक या विदेश नीति से जुड़े बयान दिए हैं। बल्कि कुछ दिनों पहले कश्मीर में आतंकी हमलावरों के हमले से शहीद होने वाले हिन्दुस्तानी सैनिकों में बड़ी संख्या में मुस्लिम सैनिक थे, और जब ओवैसी ने उनकी शहादत की चर्चा करते हुए कहा था कि भारत में मुस्लिमों के देशप्रेम को शक की नजर से देखा जाता है, और वे इस तरह देश के लिए शहादत देते हैं। इस पर थलसेना के एक दूसरे अफसर ने तुरंत ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर की थी कि सेना साम्प्रदायिक नजरिए से चीजों को नहीं देखती है, और जो लोग सेना के कामकाज, तौर-तरीकों को नहीं जानते हैं, वे ही ऐसी बातें कह सकते हैं।

ओवैसी का यह बयान बड़ा साफ था, और वह किसी भी तरह से साम्प्रदायिक नहीं था। वह बयान भाजपा के और हिन्दू संगठनों के कुछ नेताओं के कुछ दिन पहले के ही बयानों को लेकर था जिसमें यह कहा गया था कि मुस्लिमों के लिए पाकिस्तान बनाया गया था, और उन्हें भारत छोड़कर पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाना चाहिए। इस घोर साम्प्रदायिक बयान के जवाब में जब ओवैसी ने हिन्दुस्तान के लिए मुस्लिमों की शहादत की चर्चा की, तो उसका जवाब एक फौजी अफसर की तरफ से आना केन्द्र सरकार की बहुत ही बड़ी चूक थी। केन्द्र सरकार कभी पाकिस्तान को कोई संदेश देने के लिए भारत के थलसेना या वायुसेना प्रमुख से विदेश नीति और फौजी तैयारियों के बयान दिलवा रही है, और अब तो देश के भीतर के धार्मिक, साम्प्रदायिक, और राजनीतिक मामलों पर ये अफसर खुलकर बोलने लगे हैं।

भारतीय लोकतंत्र को जो लोग गहराई से नहीं समझते हैं, वे ही ऐसी चूक कर सकते हैं, या ऐसा गलत काम कर सकते हैं। यह सिलसिला बहुत खतरनाक है, और किसी भी मजबूत लोकतंत्र को अपनी फौज को बैरकों में ही रखना चाहिए, और सरहद पर भी इन फौजों को केवल सरकार के हुक्म और फैसले से जाना चाहिए, न कि अपनी मर्जी से। इसके साथ-साथ पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश के साथ एक नाजुक फौजी संबंध के चलते हुए इस रिश्ते को लेकर कोई बयान फौजी अफसरों की तरफ से नहीं आना चाहिए। आज देश का माहौल ऐसा लग रहा है, कि वर्दीधारी फौजी अफसर भी देशप्रेम और राष्ट्रप्रेम के नाम पर सरकार और सत्तारूढ़ दल की तरफ से बयानबाजी कर सकते हैं, या कि देश की बहुसंख्यक हिन्दू आबादी के नजरिए से बयान दे सकते हैं। यह पूरा सिलसिला बहुत ही गलत, और बहुत ही खराब है। भाजपा या दूसरी राजनीतिक पार्टियों के पास लोकतांत्रिक या अलोकतांत्रिक तरीके से बयानबाजी करने के लिए बहुत से लोग मौजूद हैं, और उनका काम किसी फौजी अफसर से करवाना, या कि उन्हें करने देना लोकतंत्र के लिए बड़ी घातक नौबत है।

आज देश में राष्ट्रवाद के नाम पर जिस तरह का उन्माद बढ़ाया जा रहा है, उसमें फौजी अफसरों की ऐसी बातों को उनकी फौजी जिम्मेदारियों का ही एक विस्तार मान लिया जाएगा, और यह देश की जनता में लोकतांत्रिक प्रशिक्षण की कमी का सुबूत भी है। हमाराख्याल है कि देश की भलाई के लिए, लोकतंत्र की भलाई के लिए फिक्रमंद लोगों को ऐसी गैरजरूरी और नाजायज बयानबाजी का खुलकर विरोध करना चाहिए ताकि आम जनता को यह समझ पड़ सके कि यह गलत है। लोकतंत्र में अलग-अलग किस्म की जिम्मेदारियों के अधिकार और किरदार दोनों बंटे हुए हैं। न तो राजनीतिक लोगों को सरहद पर जाकर गैरफौजियों के लिए जंग के फतवे देने चाहिए, और न ही फौजी लोगों को राजनीतिक या साम्प्रदायिक बातें करनी चाहिए।

***

Related posts

भिलाई में मजदूरों संगठन ने रिपब्लिक टीवी और अर्नव गोस्वामी के खिलाफ पुलिस में मानहानि की रिपोर्ट दर्ज कराई .

News Desk

रंगारंग कार्यक्रमों से दिया प्यार का संदेश : मंत्रमुग्ध हुए रायपुरियंस. जागरुकता के लिए जुटे एलजीबीटी समुदाय.

News Desk

जो धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करते हैं, उनके माता-पिता और ख़ून की कोई पहचान नहीं: केंद्रीय मंत्री. _ दी वायर

News Desk