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? फासीवाद ढोल बजाकर आ रहा है देखते रहिए

हिमांशु कुमार 

24.03.2018

आम आदमी पार्टी के विधायकों को बर्खास्त करने के मामले में राष्ट्रपति के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट ने गलत कहा है

राष्ट्रपति पद की इतनी बेइज्जती इससे पहले किसी सरकार ने नही करवाई थी

जेएनयू के संघी प्रोफेसर के ऊपर 8 लड़कियों ने यौन शोषण का आरोप लगाया

सरकार ने उसे बर्खास्त नही किया

पुलिस ने उसे नाम मात्र के लिये पकड़ा और घंटे भर में अदालत ने छोड़ दिया

भाजपा सरकार ने स्वायत्तता के नाम पर जेएनयू समेत 62 विश्वविद्यालयों को पैसा देना बन्द कर दिया

जेएनयू के छात्र छात्राओं और शिक्षकों द्वारा विरोध प्रदर्शन के लिये निकाले जा रहे शांतिपूर्ण जलूस पर भाजपा सरकार ने बेवजह बर्बरतापूर्वक हमला किया

उधर सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासियों और दलितों के ऊपर होने वाले अत्याचारों के मामले में एफआईआर करने से मना कर दिया है

अब दलित और आदिवासी पहले अपने ऊपर होने वाले शब्दों के लिए शिकायत करेंगे उसके बाद एक DSP उसकी जांच करेगा और फिर FIR लिखी जा सकेगी

हम सब जानते हैं कि भारत में पुलिस अधिकारी अपनी जाति के आधार पर सोच रखते हैं

और उसी हिसाब से काम करते हैं

इस तरह से दलितों और आदिवासियों के ऊपर होने वाले जन्मों के मामले में आप कार्यवाही और भी मुश्किल हो जाएगी

फासीवाद ढोल बजाकर आ रहा है देखते रहिए

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