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पेलमा सेक्टर-2 कोयला खदान, ग्रामसभा में असहमति प्रस्ताव पास, दबाव बनाने पुनः की जा रही जनसुनवाई

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पूर्ववर्ती रमन सरकार की तरफ़ भूपेश सरकार भी कार्पोरेटपरस्त व्यवहार करती दिख रही है. भारी खनन का कारण है कि आज प्रदेश के दो शहरों रायगढ़ और कोरबा को नासा ने सबसे प्रदूषित शहर माना. नई खदाने आबंटन का सिलसिला अब भी जारी है.
14 गाँवों को प्रभावित करने वाले गारे पेलमा सेक्टर-2 में मराष्ट्रा पॉवर लिमिटेड(महाजनको) परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई 27 सितम्बर को ग्राम डोलेसरा ज़िला तमनार में होने वाली है. इस जनसुनवाई का इलाके के ग्रामीण लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

यदि ये परियोजना शुरू हो जाती है तो पाता, सराई टोला, टिहरी राम पुर, डोलेसरा, सारसमाल, लिबरा, गारे, चित्वाही, कुंजेमुरा, मुड़ागांव, रोड़ोपाली, बांधापली, बजरमुडा, और झिंकाबहाल ये 14 गँव सबसे अधिक प्रभावित होंगे.

इन गाँवों के रहवासियों का कहना है कि जनसुनवाई के विरोध में जो भी प्रदर्शन व बैठकें आदि हो रही हैं, अडानी कंपनी के लोग वहां पहुच कर उस पर नज़र रखते हैं और मानसिक रूप से ग्रामीणों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं. बैठकों में मौजूद लोगों के पीछे कंपनी अपने आदमी लगा देती है और उनकी गतिविधियों की जासूसी करवाती है.

तमनार जिलेमें जनसुनवाई के विरोध में एकत्रित ग्रामीण

ग्रामीणों ने बताया कि कुछ युवकों को लालच देकर गांव वालो के विरूद्ध भड़काया जा रहा है ताकि लोग आपस में लड़ें और कंपनी अपने मंसूबे में कामयाब हो जाए. ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी इन गाँवों में कोयले की अंधाधुंध खुदाई करना चाहती है. पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहे इस इलाके में यदि इसी तरह नई खदानें बनती रहीं तो पर्यावरण भयानक स्तर पर प्रदूषित हो जाएगा. पहले ही विस्थापन इन इलाकों की बहुत बड़ी समस्या है, पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ नई खदानों से विस्थापित लोगों की समस्या और भी बढ़ जाएगी. पर्यावरण और आम ग्रामीणों के जीवन को ताक पे रख कर किए जाने वाले विनाश कार्यों का ये ग्रामीण विरोध कर रहे हैं.

सांकेतिक तस्वीर

गौर करने वाली महत्वपूर्ण बात ये है कि पिछले 3 सालों से इन्हीं 14 प्रभावित गांवों की ग्राम सभाओं ने इस परियोजना के ख़िलाफ़ असहमति प्रस्ताव पारित किए हैं. पिछली रिपोर्ट्स ने पर्यावरणीय नज़रिए से भी इस जगह को पहले से चल रहे कोयला खदान और पॉवर प्लांट की वजह से अति प्रदूषित बताया है. यहां तक कि सरकारी संस्था नीरी ने भी इन 14 गांवो में पानी और हवा में प्रदूषित तत्वों को सामान्य से अधिक मात्रा में खतरनाक स्तर पर पाया है.

एनजीटी में चल रहे प्रकरणों से भी पिछले महीने एक हाई लेवल टीम ने इस छेत्र का जायज़ा लिया था. ये बात समझ से परे है कि इतनी समस्याओं के बावजूद भी सरकार FRA, PESA और पर्यावरणीय नियमो की अनदेखी करते हुए ये जनसुनवाई क्यू करवा रही है? नई काँग्रेस सरकार को ख़ुद ही इसका विरोध करना चाहिए था, परन्तु रमन सरकार की तरह ही भूपेश सरकार भी आदिवासियों के हित में ठोस फ़ैसले लेती नज़र नहीं आ रही है.

विरध प्रदर्शन में मौजूद मानव अधिकार कार्यकर्ता पुष्पा कलाप्रेमी ने ये जानकारियाँ साझा करते हुए बताया कि बस्तर से लेकर हसदेव अरण्य व रायगढ़ तक अडानी की दादागिरी चल रही है और प्रशासनिक महकमा ख़ामोश बैठा है.

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