कला साहित्य एवं संस्कृति

पुण्य तिथि पर विशेष : नेहरू का भिलाई और भिलाई के नेहरू : दस्तक़ मे प्रस्तुत , मोहम्मद ज़ाकिर हुसैन भिलाई .

27 मई 2018 

वो आजादी के बाद का दौर था, जब प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू अपने विजन के तहत देश भर में भिलाई सहित कई आधुनिक तीर्थ तैयार करवा रहे थे। भिलाई से पं. नेहरू का खास लगाव था। जब भिलाई स्टील प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ तो पं. नेहरू ने प्रशासनिक कामकाज को देखते हुए आईसीएस अफसरों को बारी-बारी से यहां का जनरल मैनेजर बना कर भेजा। पहले श्रीनाथ मेहता आए और उनके बाद निर्मलचंद्र श्रीवास्तव। दोनों अफसर अंग्रेजों के जमाने के आईसीएस पास थे।
इसलिए उन दोनों अफसरों की प्रशासनिक क्षमता का पूरा फायदा भिलाई को मिला और 10 लाख टन की पहले चरण की परियोजना 1955 से शुरू होकर 1959 मेें उत्पादन के स्तर पर आ गई। इसके विपरीत आज भिलाई की 70 लाख टन की परियोजना 2008 में शुरू होने के बाद 10 वें साल में भी पूरी नहीं हो पाई है।
खैर, इन दोनों आईसीएस अफसरों के नेतृत्व में जब कारखाना निर्माण पूरा हो गया तो पं. नेहरू की निजी पसंद की वजह से का्ररखाना चलाने की जवाबदारी उस वक्त के शीर्षस्थ इंजीनियर सुकू सेन को सौंपी गई।

सुकू सेन और पं. नेहरू

सुकू सेन कौन थे? पं. नेहरू ने सुकू सेन को ही भिलाई की बागडोर क्यों सौंपी..? इन सवालों के जवाब के लिए फोटो पर एक नजर डालिए। एक साफ्टवेयर की मदद से कलर की गई इस फोटो में पं. नेहरू के ठीक बगल में लग कर चल रहे ऊंचे-पूरे कद के सज्जन ही सुकू सेन हैं। वे एक ख्यातनाम मेटलर्जिस्ट होने के अलावा स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम योद्धा भी थे। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय बंगाल में बनी अंग्रेज-विरोधी गुप्त क्रान्तिकारी सशस्त्र संस्था ”अनुशीलन समिति” के सदस्य थे।
अनुशीलन समिति के सदस्यों का काम इस कदर खुफिया होता था कि उनके परिवार के सदस्यों को भी इसकी जानकारी नहीं होती थी। हालांकि पं. नेहरू इस बात से वाकिफ थे। इसलिए जब राष्ट्र निर्माण की बात आई तो उन्होंने तब टाटा स्टील में ऊंचे पद पर सेवा दे रहे सुकू सेन को खास कर भिलाई भेजा और यहां जनरल सुप्रिंटेंडेंट (जीएस) की जवाबदारी दी। इसके बाद 1960 में जैसे ही कारखाना निर्माण पूरा हुआ तो उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय की विशेष रुचि के चलते भिलाई का जनरल मैनेजर बना दिया गया।
जानते हैं उस वक्त सुकू सेन जी की उम्र कितनी थी? पूरे 60 बरस। भिलाई के लिए अब तक का यह रिकार्ड है कि रिटायरमेंट की उम्र में किसी व्यक्ति को इतनी बड़ी जवाबदारी मिली हो। ऐसे थे पं. नेहरू और ऐसी थी भिलाई की तरक्की को लेकर उनकी सोच। पं. नेहरू की इसी सोच का सुकू सेन सहित तमाम अफसरों ने भरपूर सम्मान किया और शुरूआती दौर में ही कारखाने की तरक्की का बिगुल फूंक दिया था।

रेल मिल के उद्घाटन पर पं. नेहरू

27 अक्टूबर 1960 को पं. नेहरू दूसरी बार भिलाई आए थे। तब उनके हाथों भिलाई की रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल का उद्घाटन हुआ था। तब का उनका भाषण नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी नई दिल्ली में सुरक्षित है। कारखाने में रेल मिल का उद्घाटन करने जाते वक्त नेहरू जी शायद कुछ मजाहिया मूड में थे। लिहाजा उन्होंने भाषण खत्म करते और मशीन की तरफ जाते हुए कहा-” मुझसे कहा गया है कि कोई बटन दबाऊं या हैंडल इधर-उधर कर के। यहां क्या है, रेल और स्ट्रक्चरल मिल। हां कुछ थोड़ा सा मैं समझा हूं यह, लेकिन पूरी तौर पर नहीं समझा हूं। क्योंकि मेरी पढ़ाई इंजीनियरिंग की नहीं थी, वह तो और तरफ झुक गई थी लेकिन खैर थोड़ा बहुत मैं समझा और अब मैं वह हैंडल घुमाने वाला हूं। मुझे ठीक ठीक नहीं मालूम घुमाने से क्या होगा। लेकिन कुछ न कुछ तो होगा ना..? हां, अब अब घुमाऊं ना, अच्छा तो मालगाड़ी चलने वाली है इधर से।” (इसके साथ ही चारों तरफ तालियों की गडगड़़ाहट के बीच रेल मिल का औपचारिक उद्घाटन हो गया)

पं. नेहरू पर बच्चे की फूलों की मार

इस माह 9 मई को भिलाई विद्यालय सेक्टर-2 में शिक्षक और एनसीसी एयरविंग के इंचार्ज रहे डीआर सिन्हा सर का 80 बरस की उम्र में निधन हो गया। सिन्हा सर तब क्लास में अक्सर भिलाई विद्यालय में पं. नेहरू के दौरे से जुड़ी कई बातेेंं बताते थे। सिन्हा सर को श्रद्धांजलि के साथ पं. नेहरू की एक छोटी सी याद। सिन्हा सर ने एक बार क्लासरूम में हम बच्चों को बताया था-पं. नेहरू जब भिलाई विद्यालय आए तो उनके स्वागत के लिए रशियन और भारतीय बच्चे हाथ में फूल लिए खड़े थे। नेहरू जी आगे बढऩे लगे एक बच्चे ने कुछ फूलों को निशाना लगाते हुए उनकी तरफ फेंक दिया। नेहरू जी ने भी तुरंत उनमें से कुछ फूल लपक कर कैच ले लिया और बच्चों सी खिलखिलाहट के साथ फूल उसी बच्चे को दे मारा। इससे पहले की बच्चा सहमता, पं. नेहरू ने तुरंत उसे गोद में उठा लिया।

फूल वाला प्रसंग इसलिए भी क्योंकि पिछले 4 साल से सोशल मीडिया पर पं. नेहरू के खिलाफ संगठित मुहिम कुछ ज्यादा ही सक्रियता से चल रही है। खैर, इससे पं. नेहरू की छवि को को फर्क नहीं पड़ता।
बहरहाल आप गौर करिए, फूल वाली घटना अगर आज होती तो..? वैसे दिमाग पर ज्यादा जोर डालने की जरूरत नहीं है। 3 का पहाड़ा वाली घटना याद है ना..? दो महीना पहले किसी बच्चे ने अचानक हमारे मौजूदा प्रधान जी से 3 का पहाड़ा पूछ दिया था। बाद में खबर आई कि उस बच्चे को शरारती बताते हुए स्कूल से निकाल दिया गया है। आज पुण्यतिथि पर पं. नेहरू को श्रद्धांजलि के साथ सोचिए कि हम कहां से कहां पहुंच गए हैं..?

@ mzhbhilai27518

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