भृष्टाचार

पाली : 30 करोड़ में खोदे 207 तालाब , एक बूंद भी नहीं निकला पानी.

कोरबा व करतला ब्लॉक के बाद पाली ब्लॉक में भी तालाब निर्माण में सामने आई गड़बड़ी

पत्रिका न्यूज

कोरबा . पाली ब्लॉक के दो गांव बतरा और करनारा में जनपद के अफसरों ने सूखे का हवाला देकर 18 और 11 तालाब खोद डाले । किसी एक गांव में इतने अधिक तालाब की खोदाई की गई और बाद में सभी तालाब सूखे निकले । इसी तरह कई अन्य गांव भी हैं जहां 3 से 4 नए तालाब एक ही वित्तिय वर्ष में बना दिए गए उनका भी यही हाल हैं ।

        कोरबा व करतला ब्लॉक के बाद पाली ब्लॉक में तालाब निर्माण कार्य में गड़बड़ी सामने आई है । इन तीनों ही ब्लॉक में सबसे अधिक तालाब पाली ब्लॉक में ही खोदे गए । पाली      

ब्लॉक में पिछले तीन साल रिकार्ड तोड़ कुल 227 नए तालाब बनाए गए । पहले साल 105 , दूसरे साल 79 और तीसरे साल 23 तालाब खोदे गए । गौरतलब है कि पाली विकासखंड पिछले तीन साल से आंशिक रूप से सूखे की चपेट में रहता है । अधिकारियों द्वारा इसका तर्क देकर ज्यादा से ज्यादा तालाब खोदे गए , लेकिन इसका फायदा ही ग्रामीणों को नहीं मिला । दो गांव ऐसे हैं जहां तालाब बनाने के नाम पर अधिकारियों ने कार्ड ही बना दिया । खतरा गात्र जहां की आबादी महज 4 से 5 दगार होगा । उस गांव में 18 तालाब बना दिए गए । इसी तरह कनारा गांव में कुल 11 तालाब बनाए गए । लेकिन आज इन तालाबों में एक बूंद पानी नहीं हैं । सूखे पड़े हुए हैं । पिछले तीन साल में कुल 30 करोड़ से ज्यादा के तालाब बनाए गए , लेकिन तालाबों में पानी निकला ही नहीं ।

ग्राम पंचायत से लेकर मुख्यालय तक के अधिकारियों की लापरवाही :

जनपद पयायत का कहना है प्रस्ताव ग्राम पंचायत से आता है।. उसे मुख्यालय भेज दिया जाता है । जिला पंचायत का कहना है कि प्रस्ताव जनपद से आता है इसलिए प्रस्ताव की खोजबीन नहीं की जाती । स्वीकृति दे दी जाती है । दो साल से एक गांव में इतने अधिक तालाब खोदे जा रहे हैं तालाब सूखे भी निकल रहे हैं । उसके बाद भी स्वीकृति देने से पहले के तालाबों की तस्दीक नहीं की जा रही है । आँख मूंद कर तालाब खोदे जा रहे है ।

तालाब को बनाने में कम से कम 150 मजदूरों की जरूरत , 1600 मजदूर तो गांव में ही नहीं ।

एक तालाब को बनाने में कम से कम 150 मजदूरों की जरूरूत होती है । जिनका कुल एक हजार दिन की मस्टररोल इसमें बनता है । बतरा गांव में एक साल में 11 तालाब बनाए और दूसरे साल में 7 तालाब खोदे गए । 11 तालाब के लिए कम से कम एक ही समय में 1650 मजदूरों की जरूरत पड़ती है । लेकिन गांव में इतने मजदूर हैं ही नहीं । गांव में एक हजार से ज्यादा मजदूर कार्यरत नहीं है । सवाल उठता है कि इतने मजदूर विभाग ने लाया कहां से और तालाब का निर्माण कैसे हुआ ।

इन गांव में भी एक से अधिक तालाब खोदे ।

नोंनबिर्रा 09
सिल्ली 04
पोलमी 05
इरफ 05
पटपरा 04
उड़ता 07
कपोट। 04
मदन। 05

जिला पंचायत अध्यक्ष के क्षेत्र में मेहरबानी , खोदे गए सबसे अधिक तालाब :

जिला पंचायत अध्यक्ष देवीसिह टेकाम पाली क्षेत्र से हैं । उनके ही क्षेत्र में सारी पक तालाबों को स्वीकृति मिला और निर्माण भी हुए। । सभी तालाबो का हाल बेहाल है । इससे पहले भी कई मद से पाली को अधिक कार्य मिले थे । इसकी जांच हुई थी । ईसमें भी लाखों की वसूली की कार्यवाही भी हुई थी ।

ग्राम पंचायतों से ही तालाबों के प्रस्ताव आते हैं उनकी स्वीकृति मुख्यालय से मिलने पर । काम शुरू करवाया जाता है । पाली थोड़ा सूखा क्षेत्त्र है इसलिए पानी दो से तीन साल में भरेगा । कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है ।

सुरेश यादव , परियोजना अधिकारी पाली जनपद

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