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पामेड़ चेरला : एक और मुठभेड पर उठे प्रश्न .पामेड़ ,चेरला की पुलिस के साथ संयुक्त अभियान में दो नक्सली ढेर की ग्राउंड रिपोर्ट .

पामेड़ ,चेरला की पुलिस के साथ संयुक्त अभियान में दो नक्सली ढेर करने का दावा किया था क्या है सच्चाई जानते हैं ग्राउंड जीरो

ग्रामीण था महुआ बीनने वाला लच्छू माडावी

पुष्पा रोकड़े की ग्राउंड रिपोर्ट .

बीजापुर — जिला मुख्यालय के आतिम छोर के जंगल मे पामेड़ थाना अंतर्गत अंतरराज्य नक्सली अभियान में जिला पुलिस बल बीजापुर चेरला पुलिस की संयुक्त टीम ने कवरगट्टा और दारवारम के बीच जंगल में 21/4 /2019 प्रातः 6:00 से 7:00 के मध्य हुए मुठभेड़ में दो नक्सली मार गिराने का दावा किया था । काफी सामन भी मिले थे । मुठभेड़ में 1 महिला और 1 पुरूष मारा गिराय था । मड़काम बड़ी 32 साल निवासी मिनागट्टा मिलिशिया सदस्य व माड़वी लछु 25 साल निवासी मिनागट्टा थे ।

मासे धर्मपत्नी में स्वर्गीय लच्छू मांडवी की धर्म पत्नी हूं 8 महीने से गर्भवती हु । मेरे पति के साथ मे अपने खेत पर महुआ बीनने गई थीं । घर से सुबह 5 बजे उसी दौरान सी एन सी सदस्य आई जो माओवादी के डॉ टीम की सदस्य थी । मुझे दवा देने आई थी क्योंकि गर्भवती होने के बाद से मुझे कोई टीका किसी भी तरह का कोई प्राथमिक उपचार नहीं मिला मेरा गांव पामेड़ से काफी दूर है अगर इलाज कराने जाऊं तो मेरे पास साधन भी नहीं था इसीलिए गांव के गांव में ही माओवादियों के द्वारा जो छोटी-मोटी बीमारियों के लिए दवाइयां दी जाती है उसी दवाई से हम सब ग्रामीण प्राथमिक उपचार लेते हैं जहां एक और घने जंगल में वसा हमारा गांव है वहां प्राथमिक उपचार स्वच्छ पानी बीमारी के लिए हॉस्पिटल बच्चों के लिए स्कूल यह सारी सुविधाओं से हम वंचित है। कोई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता य मितानी भी नहीं आती यहां स्व. बड़ी आई थी मुझे दवा देने के लिए और अचानक पुलिस आ गई । पहले हमें घेरा लगाकर पकड़ा फिर मेरे पति को बेरहमी के साथ मारा मेरे पति को जब मारा गया तब मैं और मेरी 4 साल की बेटी देख रहे थे । बड़ी को भी मार रहे थे पुलिस जब मैं आगे बढ़कर कुछ कहती रही थी । की छोड़ दो मत मारो कुछ जवन आगे आए और मुझे भी लकड़ी की बारीक डंडी से पैरों में मारा गया एक तो मैं गर्भवती ऊपर से एक छोटी बच्ची और मेरी तबीयत भी खराब तो मैं ज्यादा विरोध नहीं कर पाई और घर की ओर आ गई जब मेरे पति को पकड़ कर पुलिस मारी उस वक्त मेरे पति शर्ट और हाफ निकर पहने हुए थे ।

बड़े भैया स्व. लछु के जिन का नाम बीजू ने बताया कि किसी तरह लच्छू की धर्मपत्नी घर में आकर रोने लगी और मुझे बताएं कि किस तरह पुलिस ने बड़ी बेरहमी के साथ मेरे छोटे भाई को मार दिया है तब जाकर मैंने और गांव वाले पामेड़ थाना गए जहां से मुझे बोला गया कि तुम अब बीजापुर जाओ मैं आर्थिक रूप से परेशान होकर गांव में चंदा कर कुछ रुपए इकट्ठा किया उसके बाद दो मोटरसाइकिल में बीजापुर के लिए निकला जहां मीडिया की मदद से मुझे अस्पताल का पता चला और वहां से मेरे भाई की बॉडी मुझे सौंपी गई। घर से कुछ दूर ही हमारा खेत हैं । जहां महुआ बिन रहे थे । मेरे भाई बहु कुछ दिनों से मेरी बहु की तबियत खराब थी । उसे दाव लेना था । जो बड़ी देने आई थी । क्यों कि गांव में स्वास्थ्य को लेकर अगर कोई परेशानी या तबीयत बिगड़ी तो ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो हमें दवा दे गांव में एक तालाब ही है जो अभी गर्मी में सूख गया है पानी के लिए बोरिंग नहीं है स्कूल नहीं है आंगनबाड़ी नहीं है सरपंच और सचिव को तो हम देखें भी नहीं है ।

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