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पहाड़ बचाओ पर हुआ रायपुर में विमर्श .आदिवासियों के हित में बैलाडीला स्थित ‘नंदराज पहाड़’ को बचाए सरकार , पर्यावरण हित में पहाड़ नीति बनाना जरूरी. ,छत्तीसगढ़ पहाड़ बचाओ अभियान.

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में जिस बैलाडीला पहाड़ी में खनन करने की अनुमति एक निजी कंपनी अडानी को दी गई है वहाँ आदिवासियों के अराध्य नंदराज विराजते हैं. यह सिर्फ एक आस्थावान पहाड़ ही नहीं बल्कि इस पहाड़ी में दक्षिण बस्तर के आदिवासियों का जीवन बसा हुआ है. ऐसे में इस पहाड़ को बचाने के राज्य सरकार को तत्काल पहल करनी चाहिए. ठीक उसी तरह जिस तरह उड़ीसा में नियमागिरी पहाड़ी को बचाया गया था. ये कहना है छत्तीसगढ़ पहाड़ बचाओ अभियान के गौतम बंधोपाध्याय का.

गौतम पाध्याय ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार को मिलकर आंदोलनरत् आदिवासियों के लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का सम्मान करते हुए एनएमडीसी के खदान-13 को रद्द करना चाहिए. वहाँ अडानी ही किसी को भी खनन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. क्योंकि वह पहाड़ आदिवासियों के लिए सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि उनके समूचे जीवन से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे प्रदेश में 27 प्रतिशत भू-क्षेत्र पहाड़ी है. ऐसे में छत्तीसगढ़ पहाड़ बचाओ अभियान की मांग है कि पहाड़ से खनिज उत्खनन एवं पर्यावरणीय परिस्थिति का वैज्ञानिक समीक्षा कर एक समग्र पहाड़ नीति बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए. पहाड़ बचाओ की ओर से मांग है कि राज्य सरकार तत्काल केन्द्र सरकार से आदिवासियों की आकंक्षा और आस्था को ध्यान रखते हुए एनएमडीजी में खदान-13 को रद्द करने का आग्रह करें. अभियान की यह भी मांग है कि वह क्षेत्र पेसा कानून के अधीन लिहाजा वहाँ पेसा कानून का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हो इस दिशा में भी सरकार ध्यान दें जिससे आदिवासियों के संवैधानिक हितों की रक्षा हो सके.

राज्य में दूसरी बार ‘पहाड़ बचाओ’ पर हुआ विमर्श .

पर्यटन के नाम पर खिलवाड़, बेहताशा माइनिंग से नुकसान, सरकार से नीति बनाने की मांग

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ राज्य में दूसरी बार पर्यावरण विशेषज्ञ गौतम बंधोपाध्यों की विशेष मौजूदगी में पहाड़ों को बचाने को लेकर विमर्श हुआ. इस विमर्श में पहाड़ को केन्द्र में रखकर वक्ताओं ने पर्यावरण से जुड़े अलग-अलग विषयों पर अपनी बात कही. विमर्श के दौरान पर्यटन के नाम पर पहाड़ों से हो रहे खिलवाड़ और माइनिंग से होते नुकसान की बात प्रमुखता से उठी. खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया कि सरकार को एक ठोस नीति बनाने की जरूरत पहाड़ों पर हो रहे खनन और विकास को लेकर है.

पहाड़ बचाओ अभियान की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी में पं.रविशंकर शुक्ल विवि के प्रो. निदाद बोधनकर ने बताया कि छत्तीसगढ़ को पहाड़ों का प्रदेश कहे तो गलत नहीं होगा, क्योंकि समूचा प्रदेश चारों ओर से पर्वत श्रेणियों से घिरा हुआ.राज्य में करीब 27 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ पर्वत श्रृँखलाओं का है. उन्होंने कहा कि हमें पहाड़ों को क्रांकीट होने से बचाना होगा. पहाड़ों की हरियाली बरकार रखनी होगी. उन्होंने हिमालय पर्वत बनने से लेकर छत्तीसगढ़ में पर्वतों पर प्रकाश डाला. वहीं वन विभाग की ओर से सीसीएफ अरुण पाण्डेय ने कहा कि यह सच है कि विभाग से कहीं बेहतर काम पहाड़ों, जंगल के संरक्षण में समूदाय का रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि आज भी पहाड़ों में एक बड़ा हिस्सा बंजर है. उसे हरा-भरा करने काम विभाग की ओर से किया जा रहा है. इसमें वन अमला आम लोगों की भागीदारी भी ले रहा है.

वहीं विचारक डॉ. विक्रम सिंघल ने कहा कि मूल बात है कि हम जिंदा कैसे रहेंगे. इसके लिए हमें अपनी नैतिकता पर काम करना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ हमसे दूर नहीं हम पहाड़ों से दूर हो गए हैं. वहीं मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने कहा कि हमें सामूहिक रूप से एक साथ प्रयास करने होंगे. कोई पहाड़ बचाने के लिए काम कर रहा है, को पेड़ लगाने और बचाने के लिए, कोई जल-जंगल बचाने के लिए. लेकिन मानव समाज को एक होकर पृथ्वी बचाने पर जोर देना होगा. इसमें सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है. वहीं इस दौरान प्रो. तपेश चंद्र गुप्ता, योगेश ठाकुर ने अपने अनुभव साझा किए तो वहीं कई सवाल भी उठे. युवा चिंतक विनयशील ने सवाल उठाया कि कब तक बंद एसी कमरों में हम किसी दिन विशेष में ऐसी चर्चाओं तक सीमित रहेंगे? तो वहीं एक सवाल यह भी उठा कि पर्यटन के नाम जो विकास या कहिए खिलवाड़ पहाड़ों के साथ उस पर कौन ध्यान देगा?

सरकार को बनानी चाहिए नीति

दोनों ही जायज सवाल थे इन सवालों के साथ संगोष्ठी में आए सुझाव पर बात गौतम बंधोपाध्याय ने की. गौतम द ने कहा कि यह जिम्मेदारी सिर्फ एक व्यक्ति, एक समूह की नहीं. नैतिकता का सवाल सिर्फ आम लोगों या आदिवासियों पर नहीं. सवाल इस बात को लेकर है कि सरकार क्या कर रही है, क्या करना चाहती है? सरकार को बेहाताश पहाड़ों पर, जंगलों पर हो रहे माइनिंग को रोकना होगा. उन्होंने कहा कि जरूरत है सरकार एक ऐसी ठोस नीति बनाए जिससे प्राकृतिक संसाधानों का दोहन एक पैमाने पर हो सके. पहाड़ को लेकर भी एक अलग से नीति बनाने की जरूरत है. क्योंकि पृथ्वी का मजबूत आधार पहाड़ है. संगोष्ठी में शिक्षा कुटीर सोसायटी की ओर पर्यावरण को लेकर किए जा रहे प्रयासों पर प्रेजेटेंशन रुपेश गुप्ता ने दिया. कार्यक्रम में अलग-अलग विचारवान लोगों की मौजूदगी रही.

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