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नेशनल कोंसिल ऑफ चर्चेज इंडिया ने भी लिखा पत्र प्रधानमंत्री को – महिलाओं ,बच्चों के साथ हिंसा और यौन अपराध पर रोष व्यक्त किया .

नेशनल कौंसिल ऑफ़ चुर्चेज़ (National Council of Churches in India) भारत में रेफोर्मेशन (Reformation) और सीरियन (Syrian) मसीही परंपरा के लगभग १ करोड़ ४० लाख ईसाईयों का प्रतिनिधित्व करती है.

माननीय  मंत्री  जी ,

यह ख़त हम अपने देश में सबसे अंधकारमय दौर के समय लिख रहे हैं, जब हमारी लड़कियों, महिलाओं और बच्चों को बचाने में सरकार पूर्णत: नाकाम रही है. कठुआ में आठ वर्ष की एक छोटी सी बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या, और उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक २० वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार जैसे असभ्य और जघन्य कृत के प्रति हम अपनी गहरी वेदना और व्यथा व्यक्त करते हैं.

यह ख़त हम केवल अपनी सामूहिक वेदना और व्यथा व्यक्त करने के लिए ही नहीं लिख रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही हम भारत में महिलाओं और लड़कियों पर बढ़ते अपराधों और यौन हिंसा के बारे में भी अपना रोष प्रकट करना चाहते हैं.
हमारे देश में महिलाओं और लड़कियों के शरीर महज़ रणभूमि बन कर रह गए हैं, जिन पर नफरत और असहिष्णुता — धार्मिक और सांप्रदायिक — की जंग लड़ी जा रही है. आतंक फैलाने के एक हथियार के रूप में बलात्कार का इस्तमाल किया जा रहा है. व्यक्तिगत, धार्मिक और राजनैतिक लाभ के लिए महिलाओं और बच्चों को एक हथियार या एजेंडा के रूप में लगातार निशाना बनाना और कुछ नहीं बल्कि मनावता के खिलाफ कभी न माफ़ करने योग्य जघन्य अपराध है. धर्म का राजनीतिकरण आज के समय हिंसा के स्त्रीकरण की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है.

‘माफिया’ और ‘गुंडों’ या एक ख़ास राजनैतिक एजेंडा को लागू करने वाले लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन की रैलियों में बलात्कारियों के समर्थन में न कि पीड़ितों, उनके परिवार और समुदाय के पक्ष में हमारे राष्ट्रीय ध्वज का इस्तमाल करना एक शर्मनाक बात है.

कठुआ में आठ वर्ष की एक छोटी सी बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या, और उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक २० वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार जैसी असभ्य और जघन्य कृत की नेशनल कौंसिल ऑफ़ चुर्चेज़ इन इंडिया घोर निंदा करता है. उन्नाव में युवा महिला के पिता की मृत्यु पर भी हम शोकित हैं, और सत्ता में बैठे लोगों ने जिस तौर-तरीके से उसकी जीवन-लीला को समाप्त कर दिया उसकी हम भर्त्सना करते हैं. अपराधी के खिलाफ, जो एक राजनेता है, बलात्कार की शिकायत को वापस लेने के लिए जिस तरह से उस जवान लड़की पर दबाव बनाया जा रहा है उससे पूरा देश परिचित है.

हमारे देश में यौन हिंसा एक व्यापक संक्रमण रोग (pandemic) बन गया है, और यह हमारे देश की सबसे विकराल समस्या है जिसका तत्काल और रणनीतिगत हल निकालने की ज़रुरत आन पड़ी है. माननीय प्रधान मंत्री जी, हम विकास की तो सोच भी नहीं सकते हैं; खुद को एक प्रगतिशील देश कहलाने की जुर्रत भी नहीं कर सकते हैं, जब तक कि हम अपनी लड़कियों, बच्चों और महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल न प्रदान कर सकें, ताकि वे बचपन से ही यौन शोषण से मुक्त एक निडर जीवन जीने के लिए जिंदा रह सकें.

माननीय प्रधान मंत्री जी, हम आपसे गुज़ारिश करते हैं कि:

अपराधियों को दण्डित करने उचित कदम उठाये जायें, और सरकार से उन सभी को तत्काल बर्खास्त किया जाए जो नफरत भरे अपराध और नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े हैं, और साम्प्रदायिक नफरत फैलाने वालों को दण्डित किया जाए, वर्ना हिंसा से हिंसा ही पैदा होगी.

कठुआ में उस छोटी बच्ची के परिजनों और उन्नाव में उस जवान लड़की से एकजुटता दर्शाते हुए पूरे देश की ओर से आप माफ़ी मांगे, और उनसे क्षमा-याचना की गुहार लगायें. उस दहशत और दर्द के दुस्वप्न और घावों की चंगाई के लिए यही सबसे बेहतर उपाय है.

अपराधियों के खिलाफ तुरंत उचित कार्यवाई करें, क्योंकि “न्याय में देरी से, न्याय वंचित होता है”

हमारे देश की महिलाओं, लड़कियों और बच्चों को, साथ ही अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के लिए, सम्मान से जीने के अधिकार को सुनिश्चित करें, और हमारे संवैधानिक अधिकारों की पुष्टि करते हुए उनका खुलकर समर्थन करें, ताकि वे निडर होकर अपना जीवन जी सकें.

यौन अपराधों और बलात्कार की कुसंस्कृति को समाप्त करने के लिए:

– न केवल नए कानून बनायें, वरन कानूनों को बिना पूर्वाग्रहों के लागू करें;
– हमारे शिक्षा-पाठ्यक्रमों में कम उम्र से ही जेंडर-न्याय (Gender-justice) और शांति जैसे विषयों पर पढाई-लिखाई को शामिल कर लोगों की मानसिकता में परिवर्तन लाने का प्रयास करें.

– जेंडर-आधारित हिंसा के खात्मे के लिए ग्रामीण और शहरी इलाकों के हमारे नागरिकों के सशक्तिकरण की दिशा में राष्ट्रीय नीति और रणनीति तैयार करें.

महिलाओं के जीवित बचे रहने की औसत दर के आधार पर खतरनाक देशों में भारत चौथे स्थान पर है. हमारे देश में 53 प्रतिशत बच्चे यौन हिंसा का सामना करते हैं, जिसमें लड़के भी शामिल हैं; इसका मतलब यह है कि दो में से एक बच्चा यौन हिंसा का शिकार है. ऐसी हिंसा पतित है, और इस व्यापक संक्रमक रोग को जड़ से उखाड़ भेंकने के लिए हमारी सरकार को कारगर कदम उठाने की ज़रुरत है.

माननीय प्रधान मंत्री जी, हम आशा और प्रार्थना करते हैं कि हमारी गुहार सुनी जाएगी, और यौन हिंसा और अपराधों के बर्बर कृत्यों के खात्मे की दिशा में उचित कदम उठाये जायेंगे. हम आशा और प्रार्थना करते हैं कि शांति और न्याय की संस्कृति को बढ़ावा देने में सरकार कामयाब होगी.

**

विनीत,
(हस्ताक्षर),
मोस्ट रेव्ह. डॉ. पी. सी. सिंग,
सभापति, एन.सी.सी. आई.
Most Rev Dr. P.C Singh,
President, NCCI

(हस्ताक्षर)
रेव्ह. डॉ. रॉजर गायकवाड ,
महासचिव, एन.सी.सी.आई.
Rev. Dr. Roger Gaikwad,
General Secretary, NCCI                                                                                                                                               
(हस्ताक्षर)
रेव्ह. मौमिता बिस्वास,
वीमेन कंसर्न्स मिनिस्ट्री, एन.सी.सी. आई.
Rev. Moumita Biswas,
Women Concerns Ministry, NCCI

प्रतिलिपि:

श्रीमती मेनका संजय गांधी, महिलाओं और बाल विकास

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