कला साहित्य एवं संस्कृति

निरंजन महावर : भारत के वेरियर एलविन नहीं रहे. – उत्तम कुमार .

1.08.2018 

तिथि सही सही याद नहीं वह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार पहली बार साल 1997 तथा दूसरी बार 2005 में उनसे मुलाकात संभव हो पाया था | दूसरी बार दिसम्बर के ठिठुरन भरे दिन में मैंने निरंजन महावर अर्थात भारत के वेरियर एलविन से अर्थात मेरी उनसे आदिवासियों से जुड़े विविध पहलुओं पर बात हुई थी | आदिवासियों पर उनका कार्य अतुल्यनीय था | उन्होंने साल 1960 में सागर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की और 1962 में अपने पारिवारिक कार्य पर बस्तर गए और आदिवासियों की जीवन-शैली से आकर्षित हुए और आदिवासी कला और संस्कृति के विविध पक्षों पर गहन अध्ययन कर लेखन कार्य नें जुट गए।

 

इसके साथ ही उन्होंने आदिवासी मिथक, लोक साहित्य तथा विविध जीवन-पद्धतियों पर शोध किया। कई दशकों के अपने कार्यों के आधार पर निरंजन ने आदिवासी और लोक-कलाओं पर पांच, लोकनाट्य पर आठ, आदिवासी अध्ययन पर चार मोनोग्राफ और लोकगीत, लोककथा आदि पर चार पुस्तकों सहित कई कालजयी लेखन किया है | बस्तर ब्रांजेस : ट्रायबल रिलिजन एंड आर्ट; पंडवानी : ए फोक थियेटर बेस्ड ऑन इपिक महाभारत; ट्रायबल मिथ्स ऑफ उड़ीसा (हिन्दी में अनूदित); कल्चरल प्रोफाइल ऑफ साउथ कोसला उनकी चर्चित पुस्तकें हैं |

उन्होंने अपने पास रखे बहुमूल्य बस्तर के आदिवासी धातु-शिल्प के अलावा उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल से संकलित कलाकृतियों का एक अनुपम संकलन से मेरा साक्षात्कार करवाया | भारत के एलविन कहूं तो अतिश्योक्ति नहीं होगा ने भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के बस्तर स्थित संग्रहालय को मध्य भारत से संकलित लगभग 600 टेराकोटा वस्तुएं उपहारस्वरूप प्रदान की हैं।

वे लगातार सक्रिय रहे | मध्य प्रदेश आदिवासी लोककला परिषद की कार्यकारिणी में बतौर आदिवासी विशेषज्ञ रहे। परिषद द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘चौमासा’ के सलाहकार मंडल में वर्षों तक कार्य करते रहे तथा दक्षिण-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के लोक आदिवासी संस्कृति के विशेषज्ञ के रूप में भी वर्षों तक अपनी सेवाएं दी | वे भाषा के विकिपीडिया थे, उत्तर भारतीय भाषाओं के लोक साहित्य पर एक विश्वकोश पर उनका कार्य उल्लेखनीय है | उनका जाना मध्य भारत से वेरियर एलविन का चले जाना है | जिस शरीर ने वर्षों तक सामाजिक विज्ञान पर शोध किया अब उनके जाने के बाद विज्ञान के छात्र उनके शरीर पर शोध करेंगे |

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