कला साहित्य एवं संस्कृति

नया थियेटर के मशहूर तबला वादक अमरदास जी नहीं रहे

रायपुर। नया थियेटर के तबला वादक अमरदासजी का देहान्त हो गया। उनका तकिया कलाम था ‘मने की।’ मैं जब नया थियेटर में रहा वही मेरे सबसे करीबी थे मैं उनके घर पर भोजन करता रहा। मेरे नया थियेटर छोड़ने के बाद भी वे मुझसे जरूर मिलते रहे। हम सारे नागरिक कलाकार उन्हें मौसा कहते थे। उनका विशेष स्नेह मेरे साथ हमेशा बना रहा। वे पुत्रवत मुझसे अनुराग रखते थे। बड़े चुपके से मुझे इशारा करके बुलाते और रहस्यमयता से स्टील का गिलास पकड़ा देते थे। कहते मने दुनों बाप-बेटा बर लाने रेहेंव कलेचुप मार ले और चल खाना खाबो। बहुत स्नेही थे मौसा आज उनके खामोश होने की मुझे अभी जब से सूचना मिली है उनके साथ बिताया समय मेरे लिए चलचित्र हो गया है।


अनेक पुरस्कारों से सम्मानित अमरदास ने अपना संपूर्ण जीवन हबीब साहब के नाटकों और छत्तीसगढ़ी नाचा में तबला बजाकर बिता दिया। छोटे मोटे रोल भी कर लेते थे लेकिन प्रमुख तौर पर उनकी ख्याति एक तबला वादक के रूप में थी। जीवन के अंतिम समय में वृद्धावस्था से उपजी अस्वस्थता उन्हें कुछ वर्षों से उनके गाँव कोल्हियापुरी लौटा लाई थी।जहाँ कल रात उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार उनके गृहग्राम कोलिहापुरी मे किया गया ।

विनम्र श्रद्धांजलि नमन।

जीवेश चौबे

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