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नदी घाटी विचार सम्मेलन : दूसरा दिन

2 मार्च 2020 को नदी घाटी विचार सम्मेलन के दूसरे व अंतिम दिन सबने मिलकर ये संकल्प लिया कि –

हम, देशभर के विविध नदी घाटीयों से आए साथीगण, नदियों पर चिंतन, शोध करने वाले सहयोगी, आज यह संकल्प लेते हैं कि हम देश की नदियों की रक्षा करेंगे ।

नदी कछार और नदी घाटी की भूमि, जंगल, भूजल, रेत की रक्षा के प्रति हम हर संभव कोशिश करेंगे।
काला टीका मातृत्व और रात दातृत्व हमारी जिंदगी का आधार है । हम हमारे साथ नदी को भी जीवित रखने के लिए संघर्ष निर्माण करेंगे।

हम उत्तराखंड, आसाम, बंगाल, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, बिहार सहित राज्यों से और करीबन 25 नदी घाटियों से अब मिलकर आवाज उठायेंगे, विनाश और विस्थापन के खिलाफ !

चुनौती देंगे जल बंटवारे में गैर बराबरी को और जल प्रदूषण करने वाले जीवन प्रणाली को।
हम गांव और छोटी कछार के भूजल में स्रोतों को आधार और एकक मानकर करेंगे जलनियोजन!

हम, पूंजी, देसी और विदेशी, के साथ जनतंत्र, प्रकृति और संस्कृति को कुचलने के नीति, कानूनी बदलाव, और योजनाओं को रोकेंगे लेकिन विकेंद्रित, निरंतर, न्यायपूर्ण, सही तंत्र की जलयोजनाओं को आगे बढायेंगे। संघर्ष और निर्माण करेंगे।

नदी घाटी, प्रकृति और समृद्धि को बचाने की बात देश, दुनिया, और मानव बचाने की दिशा में है।

नदी बचाओ, देश बचाओ
देश बचाओ, देश बनाओ
लड़ेंगे, जीतेंगे

नदियां मात्र जल नहीं

‘नदी घाटी विचार मंच’ के स्थाई गठन की घोषणा हुई

एक गंभीर और क्रियात्मक प्रस्ताव के साथ गांधी भवन भोपाल में चला नदी विचार मंच संपन्न हुआ। विभिन्न नदी घाटी में काम करने वाले संगठन, विशेषज्ञ, पर्यावरणविद और तमाम कार्यकर्ता ने माना कि नदी घाटी नियोजन की जो योजनाएं रही हैं उसके गंभीर परिणाम हमारे सामने हैं।

सम्मेलन के दूसरे दिन जिन 6 विषयों पर सत्रवार चर्चा हुई वो इस प्रकार हैं

1॰ जल नीति में बड़े बांध और विकल्प : जल और ऊर्जा के
2॰ नदी घाटी नियोजन में भू अधिग्रहण, विस्थापन और पुनर्वास
3॰ नदी घाटी का पर्यावरण योजनाओं के असर और कानूनी दायरा
4॰ बांधों की आर्थिकी, सामाजिक, पर्यावरणीय पहलू, प्रक्रिया और जन हस्तक्षेप
5॰ नदी और कछार के संसाधन, अधिकार, सुरक्षा, दोहन और विकास की दिशा 
6॰ जल की उपयोगिता में प्राथमिकता

इन विषयों पर चर्चा के बाद मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घोषित की गई जल नीति पर टिप्पणी की गई और कारी योजना बनाई गई।

कार्य योजना इस प्रकार है

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने जल अधिकार कानून लाने की अगुवाई की हम इस का स्वागत करते हैं। इस कानून के मसौदे का अध्ययन करने पर हमारी टिप्पणी नीचे प्रस्तुत है:-

1.     इस कानून में विकेंद्रीत नियोजन की विकल्प का जिक्र जरुर है। लेकिन उसके अमल के लिए छोटी सी छोटी प्रशासकीय व पर्यावरणीय इकाई से ही नियोजन की शुरुआत की दिशा स्पष्ट लेना जरूरी है।

2.     जल नियोजन में बड़ी बांध, बड़ी पर्यटन, नदी जोड़ तथा जल परिवहन जैसी योजनाओं पर सामाजिक, पर्यावरणीय असर सामने रखें जाने पर पुनर्विचार की संभावना होनी चाहिए।

3.     नियोजन तथा अमल में जन भागीदारी सुनिश्चित करने की लिए संविधान के अनुच्छेद 243 व ग्राम सभा का प्राथमिक स्थान और सम्मान सहमति भी जरुरी है।

4.     इस कानून में निजीकरण एवं ठेकेदारी के लिए रास्ता खुला छोड़ा हुआ दिखाई देता है। पीने का पानी तथा छोटी योजनाओ में नदियां, तलाब में मत्स्याखेट में भी प्रभावित तथा परंपरागत मछुआरो को ही अधिकार और प्राथमिकता देने का प्रावधान जैसा की मध्य प्रदेश की नीति में हैं, सम्मिलित किया जाए।

5.     नदी घाटी में आदिवासी जनसंख्या अधिक होते हुए पेसा कानून के हर राज्य में नियम बने और भूअर्जन व पुनर्वास की पूर्ति के पहले ग्राम सभा की सलाह- सलामती के प्रावधान पर पूर्ण अमल होने  का भरोसा दिया जाए।

6.     अवैध रेत खनन पर पूर्ण रोक तथा 27-2- 2012 की सर्वोच्च अदालत के पूर्ण पालन का प्रावधान होकर सख्त सजा स्पष्ट की जाए।

7.     कछार तथा लाभ क्षेत्र का विकास नियोजन किसी भी जल नियोजन की शर्त के रूप में स्वीकार किया जाए।

8.     पेड़-जंगल काटने के बदले हरा आच्छादन बचाने की ओर बढ़ाने की दिशा, हर संरचनात्मक कार्य में तय की जाय।

9.     जल आपूर्ति की मात्रा ग्रामीण व शहरी परिवारों के लिए मवेशियों की जरूरत सोचकर WHO के नियमानुसार भिन्न होना चाहिए।

इस संपूर्ण परिप्रेक्ष्य में सम्मेलन में सहभागी सभी साथियों ने उसी निम्नलिखित बिन्दुओं पर कार्य और दिशा तय की :-

· नदी घाटी विचार मंच के नाम से एक कार्यकारी समूह जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय की तहत कार्यरत रहेगा।

·  नदी घाटी विचार मंच सम्मेलन देश के हर विभागीय स्तर पर कम से कम एक नदी घाटी में आने वाले 6 महीनों में आयोजित होगा। जिसमे उस विभाग से अन्य अधिक घाटी से लोग भी पधारेंगे।

·  नदियों पर या कच्छार में बन चुकी परियोजनाओं के विस्थापितों के आजीविका के साथ पुनर्वास एवं में प्राथमिकता के लिए नदियों के जल उपयोगिता में तथा जल्द से जुड़ी व नदी की भूमि पर कानून नीतियों के उल्लंघन के साथ कंपनियां, उद्योगपतियों का कब्जा नामंजूर होकर प्रदूषण पर रोक लगाई जाए। नदी के पानी और कच्छर की भूमि पर आमंत्रित उद्योगों को रोजगार सुरक्षा खत्म करने का एवं उद्योग बंद करने का अधिकार ना दिया जाए। किसी उद्योग को बंद करने के बदले श्रमिकों की संस्था को ही उद्योग चलाने का अधिकार हस्तांतरण की साथ दिया जाए।

·  शहर और गांवों से नदी में बहना गंदा पानी रोककरशुद्धिकरण परियोजना पर प्राथमिकता से अमल में लाया जाये।

·  भूजल के दोहन पर सख्त नियमों का नियोजन व पालन हो इसलिए नदी के कछार के क्षेत्र में आवाज उठाएंगे, जनजागरण करेंगे

आगे की कार्यक्रम

देश में जगह-जगह और जल योजना में ‘जल ऑडिट’ की संकल्पना पर अमल होना चाहिए। शासन नहीं करें तो नागरिक समाज के मान्यवरो के द्वारा करना हम शुरू करें। इसकी शुरुआत हम एक शिविर द्वारा करेंगे जिसमें:-

जल नीति तथा बदलती कानूनों के परिप्रेक्ष्य में जरूरी है कि हमारे पास इसका दस्तावेजी करण करेंगे ।

नर्मदा के डिंडोरी से नरसिंहपुर तक के क्षेत्र में एक सशक्त संगठन खड़ा करेंगे।

इस मुद्दे पर हम नदी घाटियों की राष्ट्रीय यात्रा कुछ समय बाद हम आयोजित करेंगे।

हर नदी घाटी में पौधारोपण का कार्य का नियोजन हम संगठन और संस्था त्वरित शुरू करें और आने वाली वसंत में इस पर अमल करें।

घाटी के युवा छात्र आदि की शक्ति जोड़कर रखेंगे। उसके लिए शिविरों बैठकों का आयोजन करेंगे और जागरण बढ़ाएंगे। महिला शक्ति को हर संघर्ष और निर्माण में अगुवाही में रखेंगे।

नदी और नदी घाटियों के मुद्दे और संवाद

हम शहरी नदियों की स्थिति और सुलझाव का भी आकलन करेंगे और उन्हें नदी घाटी विचार मंच में सम्मिलित करेंगे।

शिप्रा के कछार में विकेंद्रित विकास को आगे बढ़ाएंगे। अन्य क्षेत्रों में भी छोटी नदी उपनदी वह नदी घाटियों के मछुआरों का सशक्त संगठन बनाएंगे और हर जलाशय पर हक जताएंगे।

निरंतर न्याय पूर्ण व समतावादी विकास की अवधारणा पर नदी को जल, जंगल, जमीन, जानवर, खनिज,जलसंपदा को जोड़कर एक पुस्तिका तैयार करेंगे और उसके द्वारा जागरण करेंगे।

श्रमजीवी और बुद्धिजीवियों की जनशक्ति जुटाएंगे।

कोसी नदी घाटी, बांध विस्थापन और सही विकास पर सोच और सिफारिशों के लिए एक जन आयोग गठित किया जाएगा और उसके अध्ययन और निर्णय के आधार आगे बढ़ेंगे।

नर्मदा में चुटका, सरदार सरोवर, बर्गी, जोबट, गंजाल मोरण्ड और सभी बड़े बांध; कोसी, कृष्णा, तापी की नदी घाटी में चल रहे संघर्ष का हम सक्रिय समर्थन करेंगे। सही जगह पर इसे सम्मिलित करे ।

सम्मेलन के बाद गांधी भवन न्यास की अध्यक्ष श्री दयाराम नामदेव जी के नेतृत्व में सभी लोग गांधी जी की मूर्ति के पास गए और वहां सभी ने एक संकल्प लिया की नदियों को अविरल और निर्मल रखने के लिए जो प्रस्ताव पारित किया गया उस पर संकल्प पूर्ण अमल करेंगे। 

नारा दिया  “नदियों को अविरल बहने दो नदियों को निर्मल रहने दो नदी बचाओ देश बचाओ देश बचाओ देश बनाओ”।

नदी घाटी विचार मंच में  विभिन्न नदी घाटी समूह शामिल थे। नर्मदा नदी घाटी, गंगा यमुना घाटी, गोदावरी नदी घाटी, यमुना नदी घाटी, कृष्णा नदी घाटी, पोलावरम नदी घाटी, सिंगरी व बारु रेवा नदी घाटी, कावेरी नदी घाटी, कोसी नदी घाटी, मैदानी गंगा घाटी, विश्वामित्री व साबरमती नदी घाटी, गोसीखुर्द नदी घाटी, हलोन नदी घाटी, व अन्य नदियां।

विभिन्न नदी घाटियों से आए कार्यकर्ता, स्वतंत्र विशेषज्ञ, पर्यावरणविद व राजनेता – शरद चंद्र बेहर, भूतपूर्व मुख्य सचिव, सौम्या दत्ता, जन वैज्ञानिक, डॉ भरत झुनझुनवाला, नदी विशेषज्ञ व अर्थशास्त्री, सुभाष पांडे,  पर्यावरणविद, मनोज मिश्रा, यमुना जीये अभियान, प्रफुल्ल सामंत्रा, पर्यावरणविद, विवेकानंद माथने, जल विशेषज्ञ, देबादित्या सिन्हा, पर्यावरण शास्त्री, सुनीति सु0 र0 वरिष्ठ समाजकर्मी, मीनाक्षी नटराजन, पूर्व सांसद, प्रदीप चटर्जी व सोमेन,  पर्यावरण विशेषज्ञ राष्ट्रीय नदी मत्स्य, राजकुमार सिन्हा, मेधा पाटकर व विमल भाई आदि शामिल थे।     

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