आदिवासी नक्सल नीतियां मानव अधिकार राजकीय हिंसा राजनीति

नई सुबह का सूरज या डूबता सूरज.

लिंगा राम कोडोपी की रिपोर्ट बस्तर कोया टाईम्स के लिये

छत्तीसगढ़ राज्य के दन्तेवाड़ा जिला में ” नई सुबह का सूरज ” नाम से दन्तेवाड़ा पुलिस प्रशासन द्वारा एक छोटा सा 10 मिनट का चलचित्र बनाकर प्रकाशित किया गया हैं। इस फिल्म में नक्सलियों की प्रेम कथा व आत्म समर्पण के बारे में बताया गया है। फिल्म का विमोचन छत्तीसगढ़ प्रदेश के माननी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा 16/8/2019 को दन्तेवाड़ा में किया गया हैं।

नक्सली हूँगी दलम में रहते हुए हिड़मा के साथ प्रग्नेंट हो जाती हैं। हूँगी आत्म समर्पण के बाद एक लड़का को जन्म देती हैं और उसी बच्चे के नाम से ,,”नई सुबह का सूरज”,, नाम दिया गया हैं। यह पुलिस द्वारा आत्म समर्पित नक्सलियों की कहानी को दर्शाया गया है।

 जो नक्सली हैं आत्म समर्पण कर पुलिस कि नौकरी कर रहे हैं। नक्सलवाद हथियार बंद संगठन हैं। पुलिस प्रशासन नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने कि बात करती हैं और दुबारा उन्हें हथियार थमाती हैं। यह कैसा मुख्यधारा हैं?

समर्पित नक्सली सबसे पहले एक अपराधी हैं। समर्पित नक्सली ने जो अपराध नक्सल संगठन में रहकर किया हैं उस अपराध की सर्व प्रथम उसे दंड मिलना चाहिए व उसके बाद उन्हें नए जीवन जीने की राह दिखाना चाहिए। या फिर हथियार न देकर किसी और विभाग में नौकरी दे सकते हैं। पुलिस की ही नौकरी क्यों?

पुलिस व्यवस्था भारत देश के लोकतांत्रिक, गणतंत्र के रक्षक हैं। फिर अपराधियों को हथियार देकर कौन से मुख्यधारा में लाया जा रहा हैं।

इस चलचित्र में दूसरा भाग क्यों नहीं दिखाया गया? नक्सली विचारधारा से लोग क्यों जुड़ते हैं?

हमारा संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात पर जोर देते हुए एक समानता की बात करते हुए एक ऐसे समाज के निर्माण की बात करता है जिसमें सब समान हों, सब को अपना अपना हक मिले। 

Related posts

What Modi government wants to stop that PMS is one the oldest and dream scheme of Dr. B.R. Ambedkar to ensure educational justice

News Desk

कोरबा ःः नये भूमि कानून 2013 का कड़ाई से पालन कर वर्तमान बाजार भाव का का 4 गुना मुआवजा दिया जायेगा. ःः राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री छत्तीसगढ़

News Desk

शिकागो का भाषण : मुझे तो झूट का पुलंदा नज़र आया, उसमे इतिहास की पूरी उपेक्षा की गई है -कवँल भारती

News Desk