कला साहित्य एवं संस्कृति

द दुआबाबा शो” रोमांटिक गीतमयी सन्ध्या… श्रुति और राजेश दुआ ने प्रेम गीतों से सराबोर कर दिया बिलासपुर को.

रोशनी बंजारे ,कला प्रतिनिधि की रिपोर्ट .

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कल की शाम को मुकेश के जन्म दिन की पूर्व संध्या पर बिलासपुर प्रेस क्लब के तत्वाधान में, लखीराम ऑडिटोरियम बिलासपुर में आयोजित हुई “द दुआबाबा शो” रोमांटिक गीतमयी सन्ध्या… का आयोजन हुआ .

इब्तदाये इश्क की थीम पर आधारित थीम में राजेश दुआ उर्फ दुआबाबा और श्रुति ने 21 गानों की गीतमाला में लोगों को भावविभोर कर दिया.

22 जुलाई को प्रसिद्ध पार्श्व गायक मुकेश का जन्मदिन है….इसलिए मुकेश जी की स्मृति में उनके जन्मदिन की पूर्वसंध्या को यह शानदार संगीतमय कार्यक्रम प्रस्तुति रखी गई.

मुकेश जी के द्वारा गाये हुए 1000 गीतों में से चुन कर 21 गीतों को प्रस्तुत किया गया।

नगर की उभरती युवा कलाकार श्रुति को सुनना सचमुच मुग्ध कर देता है. शास्त्रीय संगीत की शिक्ष ले रहीं श्रुति को बिलासपुर ने बहुत सराहा और उनमें भविष्य की महान गीतकार होने की संभावना की दुआयों भी दी. राजेश दुआ जो मूलतः पत्रकारिता करते हैं ,उनके गीत और कला के प्रति समर्पण से आप पूरा शहर प्रभावित तो हैं ही.कुछ लोगों के लिये यह जानकारी भी है कि वे इतनी सुंदर आवाज में गाते भी है .विभिन्न अवसरों पर वे और रामाराव शास्त्रीय संगीत के आयोजन करते रहे है.जो नगर के कलाप्रेमियों के लिये बड़ा यादगार और आवशयक भी हैं.

खचाखच भरे सभागार में लगभग पूरा शहर ही उमड़ पड़ा ,जिनमें नामी गिरामी साहित्यकार,संगीतकार ,गायक, कलाकार, और गीत के रसिक एवं पत्रकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

प्रस्तुति देते कलाकरों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं को बांधे रखा…युवा एवं वरिष्ठ जन सभी ने गीतों की भावनाओ में खुद को सराबोर महसूस किया।

कार्यक्रम का सुंदर संचालन कला मर्मज्ञ विवेक जोगलेकर ने किया….बीच – बीच मे उन्होंने मुकेश जी के जीवन व गायकी से संबंधित कई बातें साझा की. उन्होंने प्रारंभ करते हुये कहा भी की आज की पीढी यह भी कहती है कि पुराने गीत कालजयी तो जरूर है लेकिन उन्हें
सुनकर नींद आती हैं , आज की पीढी नींद और ट्रांस में फर्क नहीं कर पाते हैं.यह नींद नहीं ट्रांस में चले जाना है .

गीतों की कड़ी की शुरुआत शोर फ़िल्म के गीत “एक प्यार का नग़मा है ” से हुई.
जिसके गीतकार हैं संतोष आनन्द जी, संगीत से सजाया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी ने
यह गीत खुद में राग यमन और बिलाल का आभास लिए हुए है..
मुकेश व लता मंगेशकर जी की आवाज़ से सुसज्जित इस गीत को दोनो ही कलाकारों ने बहुत ही मधुरता से प्रस्तुत किया।
श्रोतागण भावविभोर होने से खुद को रोक न पाए।

इसी क्रम में फ़िल्म- मेरे हमसफ़र का सुप्रसिद्ध गीत, किसी राह में किसी मोड़ पर तथा फ़िल्म मिलन का मधुर गीत “सावन का महीना पवन करे शोर” की प्रस्तुति दी गई… समस्त गीतों के भाव में श्रोतागण झूम उठे।
इसी तरह एक एक कर पूरे 21 गानों की प्रस्तुति दी गई।

कार्यक्रम की समाप्ति मिलन फ़िल्म के ” हम तुम युग-युग से ये गीत मिलन के गाते” गीत से हुई जो राग भैरव पर गुथा गया था.

संगीत आयोजन में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी याद किया गया जिनका निधन कल हुआ और आज ही अंतिम संस्कार किया गया.कार्यक्रम बिना किसी औपचारिकता के उनके सम्मान में शांति और मौन के साथ समाप्त हुआ.

नगर में इसतरह के आयोजन की निश्चित ही अत्यंत आवश्यकता है जिससे उभरती प्रतिभाओं को निरन्तर मंच मिलता रहे।

रोशनी बंजारे , कला प्रतिनिधि सीजीबास्केट .

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