शिक्षा-स्वास्थय

दो माह बाद भी एनहूर स्कूल में नहीं आए शिक्षक , पालकों ने खुद शाला में फहराया तिरंगा

दुर्गुकोंदल , छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा की अलख जगाने के लिए व्यापक मुहिम चला रही है । इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च कर प्रचार – प्रसार भी कर रही है । इसलिए की गांव का हर बच्चा शिक्षित हो और गांव का जिम्मेदार नागरिक बने बच्चों को पढ़ाने शिक्षक भी नियुक्त कर हर महीने वेतन दे रही है माओवादी प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को आज भी प्राथमिक शिक्षा मुनासिब नहीं है । माओवादी इलाके के बच्चों को पढ़ लिख कर जिम्मेदार नागरिक बनना तो दूर वर्णमाला और गिनती भी पढ़ने नहीं आता है । मामला कोयलीबेड़ा विकासखंड की नक्सल प्रभावित क्षेत्र के एनहूर गांव की है ।

छत्तीसगढ़ सरकार ने यहां शिक्षक के पद पर कन्हैयालाल मालेकर हरीश उड़के की भर्ती की है । लेकिन शिक्षा सत्र प्रारंभ होने की 2 महीने बाद भी शिक्षकों का अता पता नहीं है । बच्चे इस उम्मीद से स्कूल जाते हैं , कि गुरुजी आएंगे और हमें शिक्षा देंगे लेकिन शिक्षा सत्र प्रारंभ हुए 2 महीने हो गए शिक्षकों ने अब तक एनहूर गांव के स्कूल में कदम नहीं रखा है । बच्चे स्कूल जाते हैं और मध्यान्ह भोजन खाकर , दिनभर खेल खेलकर घर वापस लौट जाते हैं ।

ग्रामीण शिक्षकों की अनुपस्थित रहने की खबर कई बार खंडशिक्षा अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को दे चुके हैं । बावजूद स्कूल से नदारद शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही गांव के आदिवासी बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था की है । यहां के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है ।

पत्रिका न्यूज

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