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दस्तावेज़ :. कन्वेंशन एवं एआईपीएफ बैठक की रिपोर्ट.

3.11.2018

उड़ीसा में 26-27 अक्टूबर 2018 को एआईपीएफ के राष्ट्रीय अभियान समिति एवं परिषद की संयुक्त बैठक संपन्न हुई. 27 अक्टूबर को आगामी 2019 के चुनावों में एआईपीएफ की ओर से नागरिकों का घोषणा पत्र उड़ीसा राज्य के सम्मेलन में आए विभिन्न प्रतिनिधियों और प्रगतिशील लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए संघर्षरत नागरिकों /बुद्धिजीवियों के बीच जारी किया गया.
भारतीय जन का घोषणा पत्र इस भावना को स्पष्ट रूप से चिन्हित करता है कि ,मई 2014 से ही हमने देखा है कि मोदी सरकार ने भारत की जनता द्वारा खून पसीने से अर्जित अधिकारों को एक एक कर कुचलने का काम किया है, लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं को कमजोर और खत्म करने का कुचक्र किया है, जनता को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने और सांप्रदायिक तत्वों को संरक्षण दिया है, और तेजी से भ्रष्टाचार और कॉर्पोरेट लूट को बढ़ाया है. 2019 के आम चुनाव में ऐसे विनाशकारी मोदी सरकार को सत्ता से बेदखल करने और अपने सपनों के भारत को हासिल करने के लिए देश के हर नागरिक को अपनी पूरी ताकत झोंकनी होगी.

हम भारत के लोग, हमने अपने अधिकारों और आजादी के लिए अब तक हर सरकार से संघर्ष कर यह बहुमूल्य अधिकार हासिल किये हैं. 2019 के आम चुनाव को ध्यान में रखकर हम भारतीय जन की ओर से मांगपत्र पेश कर रहे हैं, यह मांगपत्र जनता के देश भर में चल रहे लोकतान्त्रिक आंदोलनों और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है, और यह मांगपत्र चुनाव के बाद भी हमें निर्देशित करता रहेगा। हम मांग करते हैं कि संसदीय विपक्ष खुद को जनता के इस चार्टर के प्रति खुद को वचनबद्ध करे – और इसे सुनिश्चित करने के लिए यदि वे अपनी सरकार बनाते हैं, तो हम लोग नए सत्तारूढ़ दल को भी इन मांगों के प्रति जिम्मेदार ठहराएंगे। हम भारत के लोग, नहीं भूले हैं कि किस प्रकार नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के लिए क्या क्या वादे किये और उनके इस वादाखिलाफी के लिए भारत की जनता उन्हें माफ़ नहीं कर सकती.

हम भारत के लोग, हर उन झूठे वादों का हिसाब किताब इस आम चुनाव में एक एक कर फिर से इस देश को याद कराएँगे और हम भारत के लोग अपने वाजिब हक और अधिकारों की रक्षा के लिए जिसका कि वह हकदार है, के लिए इस मंच के जरिये यह वचन लेते हैं कि भारत की बहुसंख्यक अवाम के हक, अधिकार, लोकतान्त्रिक वादे उन अधिकारों और अधिकारों की मांग करते हैं जिनके लिए हम पात्र हैं; हम न केवल उन अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को और स्थान मिले और हर इंसान को सम्मानपूर्वक जीने और उसकी बात सुने जाने का हक मिले.

पेश किया गया जन घोषणा पत्र पूरी तरह जन आकांक्षाओं और मांगो को आगे ही नहीं रखता है बल्कि इसे आगामी 2019 के चुनाव में मुख्य राजनैतिक मुद्दे के तौर स्थापित करने की पुरज़ोर कोशिश करेगी और आने वाली सरकार को इसके प्रति उत्तरदायी मानती है.
कन्वेंशन से पूर्व 26 अक्टूबर को आरंभ सांगठनिक सत्र का संचालन तीन भागों में किया गया. पहले राज्यवार रिपोर्ट उसके पश्चात एआईपीएफ सचिवालय टीम द्वारा तैयार नागरिक मांग पत्र पर सभी साथियों ने राय/सुझाव देकर उसे पारित किया गया अंत में एआईपीएफ के सांगठनिक ढांचे को चुस्त दुरुस्त करने के लिए राष्ट्रीय परिषद, अभियान समिति का पुनर्गठन किया गया.
सचिवालय टीम के विस्तार को बैठक से मंजूरी मिली. एआईपीएफ में राज्यों के स्तर पर बेहतर समन्वय के लिए गिरिजा पाठक राष्ट्रीय संयोजक चुने गए .

बैठक में एआईपीएफ के ढांचों को राज्यों के स्तर पर सक्रिय करने के लिए नागरिकों की ओर से जारी मांग पत्र को राज्य स्तर पर एआईपीएफ की राज्य स्तरीय बैठक और कन्वेंशन करके आगामी 2019 के लिये जनता के मांग पत्र को एआईपीएफ के एजेंडे के रुप उभारा जाय. बैठक में मौजूद तमिलनाडु, बंगाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब, दिल्ली, के साथियों ने जनवरी से पूर्व अपने राज्यों में सम्मेलन – एआईपीएफ ढांचे का निर्माण और मांग पत्र को जारी करने का फैसला किया. साथ ही विभिन्न कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो पाए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, असम, त्रिपुरा,मध्य प्रदेश में भी स्थानीय साथियों से बातचीत कर कार्यक्रम तय किया जाएगा. इस अभियान का समापन फरवरी में दिल्ली में राष्ट्रीय कन्वेंशन के माध्यम से होगा.
सांगठनिक बैठक के बाद सिटीजन चार्टर (नागरिकों का मांगपत्र) जारी करने के लिए आयोजित कन्वेंशन को एआईपीएफ के वरिष्ठ साथियों के साथ उड़ीसा में एआईपीएफ से एकजुटता रखने वाले विभिन्न लोकतांत्रिक – प्रगतिशील शख्सियतों एवं कन्वेंशन के लिए खास तौर पर आमंत्रित सफाई कर्मचारी आंदोलन के अगुवा बैजवाड़ा विल्सन, पत्रकार और वाम-लोकतांत्रिक आंदोलन एवं सफाई कर्मचारी आंदोलन से जुड़ी भाषा सिंह, एनएपीएम और समाजवादी आंदोलन से जुड़ी लक्ष्मी प्रिया मोहंती सहित विभिन्न साथियों ने कन्वेंशन को संबोधित किया.

सफाई कर्मचारी आंदोलन के बैजवाड़ा विल्सन ने आज सफाई कर्मियों की काम के बदतर हालातों और जीवन स्थितियों की ओर ध्यान खींचते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के दौर में आज सवर्ण ताकतों का वर्चस्व बढ़ा है और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े दबे कुचले हिस्से को पहले से कहीं ज्यादा बुरे हालातों का सामना करना पड़ रहा है. सफाई कामगार इनमें मुख्य हैं जो आज लगातार बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सफाई के लिए मेनहाॅल में उतारे जाते हैं, परिणामस्वरूप लगातार मौत के मुंह में समा रहे हैं.

बैजवाड़ा ने कहा कि इन परिस्थितियों से संघर्ष के लिए व्यापक एकजुटता की जरूरत है, एआईपीएफ के प्रयास का समर्थन करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि हमें एक दूसरे के संघर्षों के साथ एकजुटता में रहना होगा. एनएपीएम से जुड़ी लक्ष्मी प्रिया मोहंती ने वर्तमान फासीवादी दौर से लड़ने के लिए एआईपीएफ को समर्थन देते हुए कहा कि इस समय हमें देश की विरासत पर हो रहे हमले के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है. समाजवादी आंदोलन के नेता एवं उड़ीसा के पूर्व मंत्री बृज किशोर त्रिपाठी ने देश में समाजवादी आंदोलन के पुनर्गठन के साथ ही वाम-लोकतांत्रिक – समाजवादी धाराओं के बीच एक बड़ी एकता के लिए एआईपीएफ की जरूरत पर जोर दिया. कन्वेंशन को समाजवादी आंदोलन से जुड़े और एआईपीएफ की स्थापना के समय से ही एआईपीएफ में सक्रिय भूमिका निभा रहे विजय प्रताप ने इस बात पर बल दिया कि आज के सांप्रदायिक – फासीवादी उभार के दौर में इस बात की ज्यादा जरूरत है कि समाज में मौजूद विभिन्न संघर्षरत ताकतों को एक फोरम में बांधा जा सके.
एआईपीएफ सचिवालय टीम के वरिष्ठ सदस्य और मानवाधिकार आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार जाॅन दयाल ने वर्तमान समय में अल्पसंख्यकों – दलितों पर बढ़ रहे हमलों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अगर इसके खिलाफ एकजुट संघर्ष नहीं होता है तो आने वाला समय अमन पसंद नागरिकों के लिए और भयावह होगा इसलिए सभी ताकतों की एकजुटता जरूरी है.

कन्वेंशन को संबोधित करते हुए एआईपीएफ की वरिष्ठ साथी कविता कृष्णन ने कहा कि सिटीजन चार्टर के माध्यम से हमने कोशिश की है कि जनता के व्यापक सवाल और मांग राजनीतिक दलों के सामने आ जाए. वर्तमान मोदी सरकार ने सत्ता में आने से पहले जिस तरह से विभिन्न वादे जनता से किए और सत्ता में आने के बाद जिस बेरहमी से उसकी भावनाओं को कुचला है एआईपीएफ के इस मांग पत्र पर उन सवालों को पुनः सामने लाने की कोशिश की है. आम जन के साथ की गई वादा खिलाफी के साथ ही देश के भीतर हर मेहनतकश तबका किस तरह से बुरी स्थिति और संकट का सामना करना पड़ रहा है, स्पष्ट किया गया है. उन्होंने कहा कि इस सरकार में संविधान-संवैधानिक संस्थाएं -संवैधानिक अधिकार सब खतरे में है, एआईपीएफ अपने इस चार्टर के माध्यम से सभी राज्यों में जनता के बीच जाएगा और कोशिश करेगा कि आगामी 2019 के चुनावों में यह जनता का घोषणा पत्र बने.

कन्वेंशन में सिटीजन चार्टर का हिंदी में सार एआईपीएफ सचिवालय टीम के मनोज सिंह ने रखा और उड़ीया में एआईपीएफ उड़ीसा राज्य परिषद और राष्ट्रीय अभियान समिति के सदस्य मानस जेना ने सार प्रस्तुत किया. कन्वेंशन में प्रस्ताव विद्या भूषण रावत ने पेश किए.
कन्वेंशन की अध्यक्षता उड़ीसा एआईपीएफ के वरिष्ठ साथी और समाजवादी नेता पंचानन सेनापति और संचालन गिरिजा पाठक ने किया.

मंच पर एआईपीएफ सचिवालय टीम के अंबरीश राय, पुरूषोत्तम शर्मा के अलावा विद्यासागर (तमिलनाडु) विनोद सिंह (झारखंड) संतोष सहर (बिहार) बी. एल. नेताम, प्रदीप साहू(छत्तीसगढ़) अबू रिदा एवं तुषार चक्रवर्ती (बंगाल), सुखदर्शन नत (पंजाब) , महेन्द्र परिदा, राधाकांत शेट्टी, प्रभाष सामंत राय, मेनका किन्नर, आतुशी मलिक, आदि मंच पर मौजूद थे.

कन्वेंशन ने प्रस्ताव पारित किए जिनमें रफाल सौदे में उजागर हुए बड़े घोटाले जिसमें सीधे तौर पर केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी अंतिम समय पर HAL के साथ हो रहे राफेल डील को रद्द कर अनिल अंबानी की कुछ ही दिन पहले बनी कंपनी के पक्ष में सौदा करवा दिया गया – के लिए प्रधानमंत्री को सीधे जिम्मेदार ठहराता है और उनसे अविलंब इस्तीफा देने की मांग करता है ऐसा ना होने पर इसके लिए देशव्यापी अभियान चलाने की घोषणा करता है.

कन्वेंशन देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई, जो राफेल डील समेत मोदी राज में हुए कई घोटालों और अपराधों की जांच कर रही है – के निदेशक को उनके पद से हटाने तथा उनकी जगह पर अपनी पसंद के तथा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारी को नियुक्त करने की साजिश के प्रति अपना तीखा विरोध जाहिर करता है और इस कार्यवाही को संविधान और कानून के प्रावधानों का खुला उल्लंघन मानता है.

साम्प्रदायिक भीड़ द्वारा हिंसा यानि ‘माॅब लिंचिंग’ की बढ़ती घटनाओं जिसका शिकार खासतौर पर दलित और मुस्लिम समुदाय को बनाया जा रहा है और जिसकी वजह से देश की छवि दुनिया भर में धूमिल हो रही है – के दोषियों को संरक्षण व प्रश्रय देने की मोदी सरकार – भाजपा – संघ परिवार की भूमिका की कठोर भर्त्सना करते हुए यह कन्वेंशन इन अपराध के दोषियों को सख्त सजा देने की मांग करता है.

कन्वेंशन पिछले दिनों – गौतम नवलखा, वरवर राव, सुधा भारद्वाज, वर्नौन गौंजाल्विस, अरुण फरेरा आदि समेत देश के कई चर्चित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं बुद्धिजीवियों – लेखकों पर अर्बन नक्सल के रूप में बदनाम करने और झूठे आरोपों के तहत प्रताड़ित करने – गिरफ्तार करने की कड़ी निंदा और पुरजोर विरोध करता है

कन्वेंशन ने 29 अक्टूबर को वेतन कटौती, समान काम के लिए समान वेतन और मजबूत जन परिवहन की मांग पर डीटीसी कर्मचारियों और इन्हीं सवालों पर आंदोलनरत हरियाणा परिवहन कर्मियों की हड़ताल का समर्थन प्रस्ताव लिया.

कन्वेंशन एक अन्य प्रस्ताव में 28-30 नवंबर को दिल्ली में AIKCC के आह्वान पर आयोजित हो रहे किसानों के संसद मार्च और रैली तथा अगले वर्ष 8-9 जनवरी को आयोजित हो रहे अखिल भारतीय हड़ताल के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करता है.

एक अन्य प्रस्ताव में कन्वेंशन ने ‘बहुत हुआ बेटी पर वार’ बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ नारों के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार के राज में कठुआ और उन्नाव जैसी बलात्कार की नृशंस घटनाओं, लव जेहाद तथा आॅनर के नाम पर हत्यायें तथा शेल्टर गृहों, शिक्षण संस्थानों और कार्य स्थलों पर यौन हिंसा की घटनाओं ने यह जाहिर कर दिया है कि महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं.

यह कन्वेंशन महिलाओं के खिलाफ हिंसा और बलात्कार जैसी जघन्य घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने, त्वरित कार्रवाई कर सख्त सजा दिए जाने की मांग करता है.

कन्वेंशन में गंगा को स्वच्छ बनाने की मांग को लेकर महीनों से आंदोलनरत स्वामी सानंद की मौत के लिए मोदी सरकार की उपेक्षा को जिम्मेदार मानती है,और मांग करता है कि गंगा सहित सभी नदियों की सफाई के लिए कारगर कदम उठाए जाए और नदियों को प्रदूषित कर रहे उद्योगों पर कठोर कार्रवाई की जाए.

कन्वेंशन सफाई कर्मचारी आंदोलन की मांगों के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए मांग करता है कि ‘स्वच्छ भारत अभियान ‘ के नाम पर बहाए जा रहे लाखों – करोड़ों की लूट पर रोक लगे और सफाई के काम में लगे सफाई के काम का आधुनिकीकरण किया जाए. स्थाई नौकरी के साथ ही उन्हें सम्मानजनक वेतन और सुविधाएं दी जाएं.

‘मी टू’ अभियान के तहत अपने साथ कार्यस्थल सहित विभिन्न मौकों पर हुए यौन दुर्व्यवहार को सामने लाने वाली महिलाओं का कन्वेंशन समर्थन करता है और मांग करता है कि सामने आए मामलों की जांच के लिए कानूनविदों – बुद्धिजीवियों – मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का स्वायत्त पैनल मामलों की जांच करे और दोषियों को सजा दी जाए.

कन्वेंशन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के उस बयान की घोर आलोचना करता है जिसमें वो केरल की चुनी हुई सरकार को खुले आम हिंसा की धमकी देते हैं जबकि केरल सरकार द्वारा सबरीमाला मामले में मंदिर में महिलाओं के प्रवेश संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने की कोशिश कर रही है।

आगामी 2019 चुनाव के मद्देनजर बीजेपी और उनसे जुड़े संगठन सबरीमाला और अयोध्या को लेकर हिंसा और अफरातफरी की साज़िश के प्रति भारत की जनता को आगाह करता है।

गिरिजा पाठक
सचिवालय टीम की ओर से.

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