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दंतेवाड़ा : पालनार में छात्राओं से छेडख़ानी मामले में सभी आरोपी सुरक्षा कर्मीयों को कोर्ट ने किया दोषमुक्त .: पुलिस ने नहीं की सही जांच और आरोपियों को बचाने का आरोप .आदिवासी समाज नाराज़.

21.01.2019 / जगदलपुर.दंतेवाड़ा 

पालनार में रक्षाबंधन के दिन सुरक्षाकर्मियों द्वारा छात्राओं के साथ छेडछाड करने की घटना पूरे देश में चर्चित हुई थी .सुरक्षाकर्मियों ने बालिकाओं के साथ अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया था ,जिसपर सरकारी अधिकारियों तथा पुलिसकर्मियों को कई जांच में दोषी भी माना था .कई सामाजिक ,राजनैतिक संगठन के प्रतिनिधि और दलों ने घटना स्थल का दौरा करके यह माना था कि सुरक्षाकर्मियों को छत्रावास में कार्यक्रम करने की अनुमति देने से लेकर पुलिसकर्मियों ने बच्चीयों के साथ न केवल छेडख़ानी की उनके परिजनों को दबाव भी बनाया कि वे पूरे प्रकरण को वापस लेलें.

केस को सही तरीके से कोर्ट में प्रस्तुत न करने की वजह से दोनों आरोपियों को बरी कर दिया गया. सामाजिक संगठनों तथा आदिवासी संगठनों ने इस निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की है ,उन्होंने कहा कि हम निर्णय का विरोध नहीं करते बल्कि सम्मान करते है लेकिन पुलिस ने अपने लोगों को बचाने के लिये काम किया और तथ्यो से छेडछाड़ की गई.जिसके कारण वह लोग छूट गये.

सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया ने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र में महिलाओं पर लगातार पुलिस जवानों द्वारा शोषण करने की बात सामने आती रहीं है .एसे में महिलायें या छात्रायें वर्दीवालों को पहचानें तब उन्हें न्याय मिलेगा ,एसा कहना गलत होगा .पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चीयों को न्याय दिलाने के लिये आरोपियों तक पहुचें.मेंने खुद बच्चीयों से मिलकर बात की थी .छेडख़ानी जरूर हुई थी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी .

वहीँ आदिवासी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी ने कहा कि पुलिस अपने जवानों को बचाने के लिये इस दिशा में अच्छी तरह से जांच ही नही की .यही कारण है कि पीडितों के हाथ खाली हैं और दोषी बाहर घूम रहे हैं .आरोपियों को पहचानने की परैड से लेकर मामले की पूरी जांच सही तरीके से नहीं की गई. में इस केस को आगे ले जाउंगी .

सर्वे आदिवासी समाज बस्तर के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि मामले को दबाने के लिये जिला प्रशासन से लेकर पुलिस के अधिकारी लगे हुये थे.एसे में जांच सही दिशा में कैसे हो पाती .आरोपियों को पहचानने के लिय भी जांच टीम ने गलत तरीका अपनाया तो बच्चीयों को कैसे न्याय मिल पाता.दरसल जांच आरोपियों तक पहुचने के लिये नहीं बल्कि मामले को कैसे दबाया जाये और मामले को कैसे दबाया जाये इस पर केन्दित था.

कुल मिलाकर आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने मे पूरा पुलिस महकमा जुटा रहा और परिणाम यही हुआ कि दोनों आरोपी जवान दोषमुक्त हो गये.
संगठनों ने मांग की है कि इस निर्णय के खिलाफ अपील करें और सही जांच करके तथ्यो को प्रस्तुत किया जाये.

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