आदिवासी राजकीय हिंसा शासकीय दमन

दंतेवाड़ा : जियाकोडता में सुरक्षाकर्मियों ने फिर की आदिवासी युवक कमल मंडावी और ग्रामीणों से मारपीट : लिंगाराम कोडपी की रिपोर्ट .

 

लिंगाराम कोडपी की रिपोर्ट 

7.09.2018

 

बस्तर संभाग के आदिवासियों की हकीकत,
छत्तीसगढ़ राज्य के दन्तेवाड़ा जिला के ब्लॉक कटेकल्याण, थाना कुआकोण्डा, ग्राम पंचायत छोटे गुडरा, गाँव जियाकोडता का मामला हैं।

कल सुबह करीब 4 बजे पुलिस प्रशासन की सयुक्त फोर्स ने जियाकोडता गाँव को घेराबंदी कर गाँव के कई आदिवासी बच्चों, महिलाओं, पुरुषों की नक्सल के नाम पर मार पीट गया।

इस मारपीट के बाद उस गाँव से एक आदिवासी परिवार के युवा आदिवासी कमल मण्डावी पिता देवा को नक्सली संगठन में शामिल और नक्सली बताकर लाया गया हैं।

कमल के साथ मारपीट भी संयुक्त फोर्स बुरी तरह से किया है। कमल के पिता व भाई के बताए अनुसार कमल आठवीं पास हैं और दो साल पहले पढ़ाई छोड़ दिया और गाँव में रह कर माता पिता की खेती करने में मदद करता था और अपने जेब खर्च के लिये मजदूरी करता था।
गाँव के बच्चों, महिलाओं,को मारने के साथ ही कमल के पिता देवा मण्डावी पिता लखमा को भी बुरी तरह से मारा पीट किया गया। दन्तेवाड़ा जिले कि सयुक्त फोर्स यह भी नहीं सोची की मारपीट शरीर के किस हिस्से पर मारना हैं। देवा के बाएं कनपटी पर संयुक्त फोर्स ने बंदूक के बट से मारा जिससे देवा की आँख से खून जम गया हैं, आँख की नाजूक परिस्थिति को देखते हुए दन्तेवाड़ा जिला प्रशासन ने जगदलपूर रेफर किया था। 
देवा आदिवासी होने के साथ – साथ गरीब हैं।

सोनी सोरी आज मुझे B+ खून चढ़वाने जिला दन्तेवाड़ा अस्पताल लेकर गयी हुई थी, तभी जियाकोडता के देवा की मुलाकात सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी से हुई। मैंने जब देवा से पूछा कि वास्तविकता क्या हैं तो देवा ने अपनी पूरी व्यथा मुझे बताया कि उसे किसने मारा है।अभी देवा की हालत नाजुक हैं।

नाजुकता को देखते हुए सोनी सोरी देवा को जगदलपूर मेडिकल कॉलेज ईलाज के लिए लेकर गयी हैं।
आज पूरा भारत बंद हैं। क्या ऐसे ही आदिवासियों, दलितों को मारने के लिये आज भारत बंद हैं। जातियों,धर्मों में भेदभाव को रोकना विधायिका, कार्यपालिका, न्‍यायपालिका, का काम हैं। लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्‍तंभ माने जाते है। इसमें चौथे स्‍तंभ के रूप में मीडिया को शामिल किया गया। कहा जाता है कि किसी भी लोकतंत्र की सफलता और सततता के लिए जरूरी है कि उसके ये चारों स्तंभ मजबूत हों। चारों अपना अपना काम पूरी जिम्मेदारी व निष्ठा से करें तो देश में शांति, लोकतंत्र स्थाफित होंगी।

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लिंगाराम कोडपी

स्वतंत्र पत्रकार 

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