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तेलंगाना से पैदल छात्तीसगढ़ आ रही महिला ने सड़क पर दिया बच्चे को जन्म, प्रसव के बाद जागा प्रशासन, खोखले हैं सरकार के दावे ?

फ़ोटो सौजन्य : आज तक

ट्रेन और बस चलाने के सरकारी दावों के बीच हज़ारों किलोमीटर का सफ़र करते हुए मजदूर अब भी पैदल चलने को विवष हैं. आजतक की खबर के मुताबिक पैदल सफ़र करते हुए अपने परिवार के साथ तेलंगाना से छत्तीसगढ़ आ रही एक गर्भवती महिला को रास्ते में सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा.

बच्चा पैदा होने तक अदद के लिए कोई नहीं आया

अनीता छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की रहने वाली हैं. वो अपने पूरे परिवार के साथ मजदूरी करने हैदराबाद गई हुई थी. लॉकडाउन में परिवार की रोज़ी रोटी बन्द हो गई थी. वहां की सरकार ने न उसके लिए खाने की कोई व्यवस्था की, न उसके रहने की कोई व्यवस्था की और न ही उसे वापस घर पहुचाने की कोई व्यवस्था की. मजबूरन उसे पैदल ही घर के लिए निकलना पड़ा.

वो गर्भवती थी लिहाज़ा इतना लंबा सफ़र पैदल नहीं कर पाई. महिला के पति ने कहा कि हैदराबाद से लगभग 70 किलोमीटर दूर चलने के बाद उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई और बाद में सड़क के किनारे बच्चे को जन्म दिया. नरसिंगी मंडल के जप्ती शिवनुर गांव से लगे हाइवे में करीब सुबह 4 बजे उसे खुले आसमान के नीचे बच्चे को जन्म देना पड़ा. प्रसव के बाद सूचना मिलने पर पुलिस आई और महिला को अस्पताल पहुचाया. दंपति का पहले से ही एक तीन साल का बेटा है जो लॉकडाउन में उनके साथ पैदल चल रहा था.

फ़ोटो सौजन्य : आज तक

घटना ने प्रधानमन्त्री के दावों की पोल खोल दी

एकतरफा मन की बात करने वाले प्रधानमंत्री जी के सिस्टम ने पूरे रास्ते कहीं भी इस गर्भवती महिला की सुध नहीं ली. अनीता के साथ हुई इस घटना ने पूरे सरकारी तंत्र की पोल खोल कर रख दी है.

मानव अधिकार कार्यकर्ता और वकील प्रियंका शुक्ला ने बताया कि ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ में भी सामने आया था. उन्होंने बताया कि राजधानी रायपुर से 7 माह की एक गर्भवती महिला पैदल चलते हुए झारखंड के लिए निकली थी जिसे पूरे छत्तीसगढ़ में कहीं भी नहीं रोका गया ना ही कोई सुविधा दी गई. वो तो गनीमत है कि सड़क में उसका प्रसव नहीं हुआ.

कुछ सवाल हैं जो सरकारी दावों की पोल खोलते हैं

लोगों को एक राज्य से दुसरे राज्य न जाने देने वाली सरकार की घोषणाएं खोखली है ?

पूरे इलाके में पुलिस ने कहीं भी चेक पोस्ट नहीं लगाया जो महिला प्रसव के पहले अस्पताल पहुचाता ?

ग़रीब मजदूर मरे या जिए सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता ?

मजदूरों को काम से निकाल देने वाली कंपनियों और फैक्ट्रियों को सरकार दामाद की तरह क्यों पुचकार रही है ?

लाखों मजदूरों को काम से निकाल दिया गया है और सरकार गूंगी बहरी बनी बैठी है ?

मजदूरों के लिए सरकार ने अब तक कोई पुख्ता इंतज़ाम क्यों नहीं किए हैं ?

वो पार्टी को मोटा चन्दा नहीं देते इसलिए ?

भूपेश सरकार भी नहीं ले रही अपने लोगों की सुध

छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने अन्य जगहों में फंसे अपने मजदूरों को सुविधा दिलाने के लिए अन्य राज्य सरकारों के साथ अब तक कोई कारगर संवाद स्थापित क्यों नहीं किया है?

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