आंदोलन महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार राजनीति

तीन दशको से महिला मुद्दो पर सक्रिय नेत्री दुर्गा झा की रिहाई क्यूं नहीं हो रही है?

 

20.06.2018/ रायपुर 

निरभाया दामिनी , तीसरी नज़र फीचेर्स

 

लगभग 3 दशक से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं देश भर मे महिला आंदोलन को नेतृत्व देने वाली साथी तथा वर्तमान मे आम आदमी पार्टी के छत्तीसगढ़ महिला अध्यक्ष दुर्गा झा को पार्टी के अन्य नेताओ के साथ रायपुर सेंट्रल जेल मे विगत 14 जून से अपराधियो के समान रखा गया है। ज्ञात हो कि पार्टी के नेतृत्वकर्ता विगत 14 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर ज्ञापन देने के लिए एयरपोर्ट पहूंचे थे, जहां उन्हे ना ही मोदी से मिलने के लिए दिया गया बल्कि सभी आप के महिला नेत्री सहित सभी नेताओ को जेल मे डाला गया। कारण यह था कि दुर्गा सहित सारे नेताओ ने मोदी से मिलने ना दिये जाने के संदर्भ मे नारा लगाकर विरोध प्रकट किया, जो कि किसी भी जनतंत्र मे नागरिकों का स्वाभाविक मौलिक अधिकार है।

 

दरअसल शुरू से ही पुलिस एफ०आई०आर० के प्रति किसी को भी नहीं दिखा रहे है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 जून को सभी नेताओ के ऊपर आरंभ मे 151, 107, 116 जैसे धराए लगाई गयी। बाद मे 15 जून को रायपुर एयरपोर्ट अधिकारियों के माध्यम से एक और एफ०आई०आर० किया गया जिसमे 5 अन्य गैर-जमानती सहित धराए जैसे 147, 186, 332, 353, 419 को जोड़ा गया। विशेष सूत्रो के अनुसार आप के द्वारा किए गए इस विरोध प्रदर्शन मोदी के कानो मे तुरंत पहुची, जिससे प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री रमन सिंह को सवाल किया। जो कि बात भाजपा के आलाकमान तक पहुँच गयी है, जिससे रमन सिंह के कंधो के सितारे उतारने की दर मंडरा रही है। सूत्रो के अनुसार यही कारण है कि डॉ सिंह इस मामले को स्वयं सीधा मोनिट्रिंग कर रहे है।

 

संभावता आम आदमी पार्टी के छत्तीसगढ़ नेतृत्व मे सामाजिक एवं राजनैतिक आंदोलन के परिपेक्ष मे दुर्गा झा सबसे वरिष्ठ होंगी। 2014 मे आप से जुडने के बाद, पार्टी को दुर्गा का नेतृत्व सभी अभियान एवं आंदोलनों मे मिला है। यहा तक़ कि जब प्रदेश संयोजक संकेत ठाकुर पार्टी छोड़कर एक साल जब चले गए थे, दुर्गा ने अन्य नेताओ के साथ पार्टी को प्रदेश मे संभाला था। पार्टी सूत्रो के अनुसार संकेत ठाकुर को मनाकर पार्टी मे वापस लाने मे दुर्गा की सबसे एहम भूमिका रही। वैसे पार्टी के प्रदेश नेतृत्व तो, केन्द्रीय नेतृत्व के ठीक विपरीत महिला नेत्रीयो के प्रति काफी असंवेदनशील है। महिलाओ की त्याग के इतिहास या कद का कोई इज्ज़त या मायने पार्टी के पुरुषप्रदान नेतृत्व देना नहीं चाहती। ऐसे मे दुर्गा या फिर सोनी सॉरी जैसे नेत्रियों का यह हर्ष होना स्वाभाविक ही है। 

 

51 साल की दुर्गा झा पिछले तीन दशको से महिला अधिकार, दलित-बहुजन अधिकार, मजदूरो के सवाल, शिक्षा के अधिकार, असंगठित कामकाजी महिला, प्रवासी मजदूर, पंचायती राज को पूर्णता अमल करने, पानी के सवाल इत्यादि के संदर्भ के संघर्षरत है।

 

वह 1987 से छात्र आंदोलन से जुडने के बाद, 1990 से पूर्ण रूप से सामाजिक कार्यो मे जुड़ी हुई है। दुर्गा जयप्रकाश नारायण और डॉ बाबासाहेब अंबेडकर के विचारो से काफी प्रभावित है। इन्होने चीन के बीजिंग मे 1995 मे आयोजित ‘चौथे विश्व महिला सम्मेलन’ मे भाग लिया, जहां ‘पंचायती राज एवं महिलाए’ विषय पर प्रस्तुतीकरण भी किया। 1990 मे ‘मध्यप्रदेश महिला मंच’ का गठन के मे सक्रिय भूमिका के अलावा छत्तीसगढ़ महिला अधिकार मंच का गठन भी किया। वे प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर कई सारे संगठनो और संस्थाओ की स्थापक नेत्री रही है। नवो, विमेन्स पावर कनैक्ट, वन बिल्यन रईसिंग, इत्यादि इनमे से कुछेक है। 2008 से दुर्गा भारत मे चुनाव सुधार अभियान के सक्रिय सदस्य रही है।

 

लेकिन ना ही सरकार या पार्टी ने इनके इन तमाम योगदानों को कोई वजूद दिये है। सरकार तो ऐसे वरिष्ठ महिलाओ को गलत साबित करने मे फर्जी मुकदमे दायर करने मे जुटी हुई है। वैसे अन्य लोग भी इसमे कोई कसर नहीं छोड़े है। यहाँ तक कि विगत 6 दिनो से जेल मे होने के बावजूद ना कोई मानव अधिकार संगठन या कार्यकर्ता या कोई महिला संगठन के लोग इनसे मिलने कि कोशिश किए या फिर किसी प्रकार की करवाही के लिए सामने आए। ना किसी पत्रकार इस संदर्भ मे कोई लेख या खबर छापी। ऐसे मे सवाल यह उठता है कि समाजिक और राजनैतिक आंदोलनों मे महिलाओ का क्या स्थान है। यदि दुर्गा जैसे साथी अन्य किसी देश मे पैदा हुए होते तो उन्हे राष्ट्र के बड़े पुरस्कारों से नवाजा होता और उनके सुझाव और अनुभव से प्रदेश और देश समस्याओ का निदान पाने मे मदद लेते। 

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