मानव अधिकार शिक्षा-स्वास्थय

डॉ दिव्या पाण्डेय एक कवयित्री के अलावा एम्स ऋषिकेश में चिकित्सक हैं । मुजफ्फरपुर की घटना से वे दुखी भी हैं औऱ आक्रोशित भी .

इस पोस्ट में पढ़िए उनके विचार प्ररस्तुति : शरद कोकास

वे बताते रहे कि यह हीट-स्ट्रोक क्यों है ? एन्सिफ़ेलाइटिस और हीट-स्ट्रोक किस तरह अन्तर्सम्बन्धित हैं ? इसके लक्षण क्या हैं? मरीज़ बच्चों के शरीर में इससे जुड़े क्या-क्या मेटाबॉलिक परिवर्तन , किस प्रकार लक्षित होते हैं?

और आप चीखती रहीं कि डॉक्टर आपको कुछ बता नहीं रहे, समझा नहीं रहे, बेवकूफ़ बना रहे हैं।

अभद्रता जब अतिक्रमण पर उतर आये तो तर्क को कुम्भकरण होना पड़ता है।

दो दिन पहले आपके पुराने कारनामे से व्यथित होकर जब फेसबुक से किनारा किया था तब कहाँ मालूम था कि डॉक्टरो और मरीज़ों के बीच खाई खोदने का आपका दुस्साहसिक प्रयास दूसरी पोस्ट का मौक़ा भी देगा।

इस पूरे वाक़ये ने जिस बात की महत्ती आवश्यकता हम सबके सामने रखी है वह यह कि पत्रकारिता में भी विशेषज्ञ होने चाहिए।

ताकि जब आप किसी प्रतिष्ठित डॉक्टर से सवाल करें तो ग्रहणशीलता के अतिआवश्यक गुण के अलावा आपको मेडिकल साइंस की भी बेसिक जानकारी हो। ताकि जब वो आपको बीमारी से जुड़ी न केवल ज़मीनी बल्कि शोधपत्रों से जुड़ी ख़ासमख़ास बातें बता रहें हों तब आपको नाटकीयता का सहारा न लेना पड़े।

जिन डॉक्टर्स को आप कंफ्यूज बता रही हैं , असफल बता रही हैं … पूरा विश्व उनपर योंही बलिहारी नहीं जाता।

यह महज़ आपका काले अक्षर को भैंस बराबर समझना है।

डॉ दिव्या पाण्डेय
एम्स ऋषिकेश

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