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डॉ. कफ़ील की जमानत पर त्वरित प्रतिक्रिया : आज आठ महीने बाद लग रहा है जैसे किसी ने मेरे कंधे पर रखे पहाड़ को उठाकर मुझसे अलग कर दिया है .: आवेश तिवारी ,वरिष्ठ पत्रकार

25.04.2018

डॉ कफील को जमानत मिल गई ,वो अपनी बेटी के साथ है,सोचिये इससे सुन्दर कुछ होता है क्या ,पिता के साथ बेटी |शुक्रिया देश, शुक्रिया माई लार्ड | आप को पता नहीं होगा मैंने कभी बताया भी नहीं बस सहा ,खूब सहा, भयभीत भी हुआ , जब मैंने लिखा कि वो निर्दोष है लेकिन मीडिया के भेड़िये और भक्त मुझे घेर कर चीख रहे थे बार बार कहते रहे तू झूठा है केवल झूठा | मेरा ईश्वर जानता है डॉ कफील को या फिर गोरखपुर में बच्चों की मौत के बारे में लिखते वक्त मैंने एक फीसदी की भी बेईमानी नहीं की थी| जिस रात घटना घटी उसके अगले दिन मैं जब गोरखपुर पहुंचा तो सबसे पहले मुझसे डॉ कफील ही मिला था , उन्होंने जो कहा मैंने सिर्फ वो नहीं लिखा, जो मरने वाले बच्चों के मरीजों ने कहा जो सीमा पर मौजूद एसआईबी के कमांडेंट ने कहा मैंने वो माना ,याद है कमांडेंट कह रहा था डॉ कफील ने 22 मिनट में 13 बार फोन किया था| एक बात गोरखपुर ने समझाई है केवल सच लिखना तब तक लिखना जब तक लहू की आखिरी बूंद रगों में दौड़ रही है|

घटना को बीते इतने दिन हो गए गोरखपुर मेडिकल कालेज में बच्चे अभी भी इंसेफेलाईटीस से रोज रोज मर रहे हैं लेकिन अब हालात बदल गए हैं कोई डाक्टर यूपी की बेरहम, झूठी सरकार और क्रूर नौकरशाहों के बीच काम नहीं करना चाहता| मैंने अपनी बहन से डाक्टर के पेशे को जाना और समझा है जब कभी उसके आपरेशन थियेटर में कोई बच्चा मरता है उस रोज वो खाना नहीं खाती ,कोई फोन नही लेती ,लगभग सभी डाक्टर ऐसे होते हैं | गोरखपुर के असली गुनाहगारों को जिसमे मीडिया भी शामिल है ईश्वर भी माफ़ नहीं करेगा|


 वरिष्ठ पत्रकार आवेश तिवारी

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